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ऑर्गैनिक फूड्स को खेतों से सीधे आपकी खाने की मेज तक पहुंचा रहा यह स्टार्टअप

'हेल्दी बुद्धा'की कहानी...
22nd Nov 2018
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बेंगलुरु स्थित हेल्दी बुद्धा का सिर्फ एक ही लक्ष्य है, वह है जैविक भोजन को जन-जन तक पहुंचाना और आज के जमाने में ऐसा कौन व्यक्ति होगा जो अपनी खाने की प्लेट में केमिकल-मुक्त खाना न देखना चाहता हो?

हेल्दी बुद्धा के फाउंडर गौतम और अनुराग

हेल्दी बुद्धा के फाउंडर गौतम और अनुराग


हेल्दी बुद्धा फिलहाल भारत के 12 राज्यों में 244 किसानों के साथ जुड़ा हुआ है और कुल मिलाकर 347 एकड़ जमीन पर काम कर रहा है। बीते चार सालों में इस स्टार्टअप ने 24,013 किलोग्राम केमिकल्स और उर्वरकों के इस्तेमाल से बचने में मदद की है।

श्रीधर वेंकटरमन वर्ष 2016 में एक इंश्योरेंस कंपनी के वाइस प्रसिडेंट थे, लेकिन जैविक और ताजे खाने के प्रति अपने प्रेम के चलते उन्होंने कॉर्पोरेट जगत को अलविदा कहकर तमिलनाडु के देनकनिकोट्टी में स्थित अपने छः एकड़ के कृषि भूखंड पर पूरी तरह से काम करना शुरू कर दिया। आज वे साथी किसान मुनीसामी के साथ मिलकर गोभी, टमाटर और सेम जैसी सब्जियों की जैविक खेती करते हैं।

लेकिन शुरुआत में अपने उत्पादों के लिए सीधे ग्राहकों को तलाशना इतना आसान नहीं था। एक छोटे स्तर के जैविक किसान के रूप में श्रीधर को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा जिनमें स्थानीय मंडियों और बिचैलियों से निबटने के अलावा अपने उत्पादों को मजबूरी में ऐसे दामों में बेचना पड़ा जो बाजार में लंबे समय तक टिकने की दिशा में बहुत मुश्किल साबित होता।

आखिरकार बेंगलुरु स्थित हेल्दी बुद्धा की राह की दुश्वारियों दूर हुईं। यह स्टार्टअप न सिर्फ छोटे और स्थानीय ग्रामीण परिक्षेत्र से आने वाले किसानों को सीधे शहरी उपभोक्ताओं से जुड़ने में मदद करते हैं बल्कि उन्हें जैविक खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों के बारे में भी प्रशिक्षित करते हैं और उनके दिन-प्रतिदिन के सवालों के जवाब देते हैं।

हेल्दी बुद्धा फिलहाल भारत के 12 राज्यों में 244 किसानों के साथ जुड़ा हुआ है और कुल मिलाकर 347 एकड़ जमीन पर काम कर रहा है। बीते चार सालों में इस स्टार्टअप ने 24,013 किलोग्राम केमिकल्स और उर्वरकों के इस्तेमाल से बेचने में मदद की है।

हेल्दी बुद्धा की शुरुआत

वर्ष 2014 में तकनीकी विशेषज्ञ गौतम पीबी और अनुराग डालमिया द्वारा हेल्दी बुद्धा की स्थापना शहरों में बसे लोगों को 100 प्रतिशत शुद्ध ऑर्गैनिक फूड्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी जो पौष्टिक भी हो। 38 वर्षीय गौतम कहते हैं, 'चेन्नई में रहने वाले मेरे पिता पीबी मुरली एक नामचीन और पुरस्कार प्राप्त जैविक किसान हैं। उनकी वजह से मैं बचपन से अच्छे जैविक खाद्य पदार्थ खाते हुए बड़ा हुआ हूं। बेंगलुरु का रुख करने के बाद मैं अपने बच्चों को भी वही या वैसा ही पौष्टिक खाना उपलब्ध करवाना चाहता था लेकिन मुझे यह देखकर काफी हैरानी हुई कि ऐसा करना इतना आसान नहीं था जितना सोचना है। तब कुछ सीमित उत्पाद ही मिलते थे जिनके लिये कई दुकानों पर घूमना पड़ता था और इसके बाद भी इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि हम जो उत्पाद खरीद रहे हैं वह कहां से आ रहा है और पूरी तरह से जैविक है भी या नहीं।'

इसी अभिलाषा ने गौतम को एक डिजिटल मंच स्थापित करने को प्रेरित किया। गौतम बताते हैं, 'इसके अलावा हम किसानों के सामने आने वाली दो प्रमुख समस्याओं का भी समाधान करना चाहते थे- उन्हें सही दाम दिलवाना और उनके उत्पादों के लिये बाजार सुनिश्चित करना।' इन दोनों संस्थापकों ने अपनी नियमित नौकरियों के साथ ही गौतम के घर से शुरुआत की और वे व्यक्तिगत रूप से हर खेत पर जाते और खरीदने से पहले उनके उत्पाद को मान्यता देते।

गौतम के पिता द्वारा तमिलनाडु और कर्नाटक में जैविक किसानों के तैयार किये गए नेटवर्क से प्रेरित होकर इस जोड़ी ने बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड और इंदिरानगर क्षेत्रों में बनी बहुमंजिला इमारतों में स्टॉल लगाकर शहद, आटा, दालें और गुड़ जैसे खराब न होने वाले खाद्य पदार्थों के जैविक विकल्प पेश करने शुरू किये। वहां से मिलने वाले ऑर्डरों को उन्होंने वीकेंड में डिलीवर करना शुरू किया। इसी के साथ इन्होंने विभिन्न अच्छे जैविक किसानों को चिह्नित करते हुए उनके उत्पादों को खरीदने के लिये विभिन्न जैविक खेतों के दौरे करने भी शुरू किये।

इसके बाद इन्होंने दो कर्मचारियों को नौकरी पर रखा, एक अलग दो कमरों का घर किराये पर लिया और हेल्दी बुद्धा के लिये पूर्णकालिक रूप से काम करने के क्रम में अपनी नौकरियां भी छोड़ दीं। खुद के पैसों से शुरू किए गए इस उद्यम के पास अब मराथाहल्ली में 6,000 वर्गफीट का गोदाम है और यह 50 से अधिक कर्मचारियों को रोजगार उपलब्ध करवा रहा है। कंपनी का दावा है कि वे प्रति सप्ताह 2,000 से अधिक उपभोक्ताओं को जैविक उत्पाद उपलब्ध करवाते हैं। गौतम कहते हैं कि चूंकि उत्पादों को उत्पादन की मांग के आधार पर उगाया जाता है इसलिये सबकुछ बिल्कुल ताजा होता है और इसके अलावा बर्बादी भी न के बराबर ही होती है।

फार्म टू फोर्क से कहीं आगे

एक तरफ जहां मंडी ट्रेड्स, एग्रीबोलो, ऑर्गेनिक ठेलेवाला और अर्थफूड समेत दूसरे कई अन्य स्टार्टअप फार्म-टू-फोर्क मॉडल पर काम कर रहे हैं, गौतम के अनुसार किसानों के बाजार में आमने-सामने बातचीत कर उपभोक्ता और किसानों के मध्य सीधे संबंध स्थापित करना हेल्दी बुद्धा की यूएसपी है। इसके अलावा उपभोक्ता को उप किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों से भी रूबरू करवाया जाता है जिनके उत्पाद वे उपयोग कर रहे हैं और 'प्रीमियम पेड' फलों और सब्जियों के पीछे का कारण भी बताया जाता है।

गौतम कहते हैं, 'यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आज भी ऑर्गैनिक फूड्स को विशिष्ट और अमीर लोगों के खाने के रूप में देखा जाता है क्योंकि जैविक खाद्य पदार्थ गैर-जैविक और रसायनों से भरे उत्पादों के मुकाबले काफी अधिक महंगे होते हैं। हालांकि अब समाज में बढ़ती जागरुकता और मांग के चलते अधिक किसान जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं और समय के साथ दामों में गिरावट होनी लाजमी है।'

हेल्दी बुद्धा किसानों को उपज के बिक्री मूल्य का 60-65 प्रतिशत उपलब्ध करवाने के साथ यह भी सुनिश्चित करता है कि बाजार में कीमतों में गिरावट होने के बावजूद उन्हें उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना जारी रहे। टीम हर दो महीने में एक बार किसान बाजार का आयोजन भी करती है। इसके अलावा यह टीम अलग-अलग खास जगहों से मौसमी फल प्राप्त करने के लिये खास किसानों के साथ भी काम करती है- चाहे वे कर्नाटक के बीजापुर और महाराष्ट्र के शोलापुर के हरे अंगूर हों या फिर कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के सेब।

अब इनका नवीनतम प्रोजेक्ट है इनकी वेबसाइट पर शुरू हुआ 'एग्री विकिपीडिया' जिसका उद्देश्य किसानों को इस बात की जानकारी देना है कि किसानों को क्या उगाना चाहिये और वह भी कब। कीटों के मामले में वे किसानों से अपनी विशेषज्ञता के जरिये जुड़ते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान करते हैं।

भविष्य की योजनाएं

जैविक उत्पादों के लिये राज्य और केंद्र, दोनों की सरकारों के बढ़ते समर्थन के चलते गौतम को निकट भविष्य में जैविक उत्पादों की मांग में वृद्धि होने की पूरी उम्मीद है। फिलहाल यह टीम बेंगलुरु और गोवा के अलावा अन्य राज्यों में भी विस्तार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। गौतम आगे कहते हैं, 'हम जैविक खाने सिर्फ अभिजात्य वर्ग का खाना न बनाते हुए उसे अधिक से अधिक लोगों से जोड़ना चाहते हैं क्योंकि हर किसी को स्वच्छ, रसायन मुक्त और गैर-विषैले भोजन का अधिकार है।'

वर्तमान में हेल्दी बुद्धा की पैदावार और उत्पाद गोजरेज नेचर्स बास्केट, फूड हॉल और बिग बाजार जैसे स्टोरों और अमेजन, बिग बास्केट, हेल्दीफाइम और प्लेस ऑफ ओरिजन जैसे ई-प्लेटफार्मों पर भी उपलब्ध हैं।

यह भी पढ़ें: आर्थिक तंगी के चलते जिसे बीच में ही छोड़नी पड़ी थी पढ़ाई, वो चिकनकारी निर्यात से कर रहा है 3 करोड़ का सालाना व्यापार

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