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क्या आप जानते हैं अमेज़न के 'अलेक्सा' को बनाने के पीछे लगे इंडियन दिमाग को?

24th Jul 2018
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अमेज़न के 'एलेक्सा' नाम की डिवाइस को बनाया तो है रोहित प्रसाद ने, लेकिन प्रचारित किया जाता है कि इसका आविष्कार अमेज़न ने किया है। रांची (झारखंड) के रोहित इस समय एमेजॉन की ओर से अलेक्सा आर्टिफिशिअल इंटेलिजेंस के हेड साइंटिस्ट हैं।

रोहित प्रसाद

रोहित प्रसाद


रोहित की पढ़ाई-लिखाई रांची के डीएवी पब्लिक स्कूल में हुई है। उन्होंने बीआईटी से इंजीनियरिंग करने के बाद आगे की पढ़ाई इलिनॉइस इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में की। वहीं से वह वायरलेस कोडिंग पर रिसर्च करते हुए आवाज पहचान कर जवाब देने की तकनीक की खोज करने लगे।

लगभग चार साल पहले नए जमाने की एक सुखद सूचना ने संगीत प्रेमियों की दुनिया में तहलका मचा दिया था कि जर्मनी की एक कंपनी ने लाइट सेंसर और माइक्रोफोन से लैस एक ऐसा वायरलेस स्पीकर बनाया है, जिससे जहां चाहें, पसंदीदा म्यूजिक का लुत्फ उठा सकते हैं। तब से अब तक बूम-बूम किस्म के म्यूजिक शौकीनों के लिए गंगा में बहुत पानी बह चुका, दुनिया कहां से कहां पहुंच चुकी है। ऑनलाइन वेबसाइट्स पर तरह-तरह के ऐसे इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज की बाढ़ आई पड़ी है। इसी में ई-कॉमर्स वेबसाइट एमेजॉन पर वायरलेस स्पीकर की फसल लहलहा रही है। यहां अक्सर 76 परसेंट तक डिस्काउंट का ज्वार-भाटा उठता-गिरता रहता है।

2,990 रुपए का स्पीकर 699 में ही बिकने लगता है। ये जो बिक रहा है, इसके पीछे एक कड़वी हकीकत छिपी है, जिसे जानबूझ कर अमेज़न छिपाए रहता है। वह हकीकत है, इस वायरलेस स्पीकर की खोज करने वाले झारखंड के रोहित प्रसाद का नाम छिपाए रखने की। इस 'एलेक्सा' नाम के डिवाइस को बनाया तो है रोहित प्रसाद ने, लेकिन प्रचारित किया जाता है कि इसका आविष्कार अमेज़न ने किया है। रांची (झारखंड) के रोहित इस समय एमेजॉन की ओर से अलेक्सा आर्टिफिशिअल इंटेलिजेंस के हेड साइंटिस्ट हैं।

रोहित की पढ़ाई-लिखाई रांची के डीएवी पब्लिक स्कूल में हुई है। उन्होंने बीआईटी से इंजीनियरिंग करने के बाद आगे की पढ़ाई इलिनॉइस इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में की। वहीं से वह वायरलेस कोडिंग पर रिसर्च करते हुए आवाज पहचान कर जवाब देने की तकनीक की खोज करने लगे। और तब जन्म हुआ एक नए तरह के आधुनिक वायरलेस स्पीकर का। वर्ष 2013 में रोहित अमेज़न से जुड़े। दो साल पहले अमेज़न ने उनको हेड साइंटिस्ट नियुक्त किया। आज रोहित वर्ल्ड रीकोड की सौ लोगों की सूची में नौवें नंबर पर हैं। इस सूची में टेक, बिजनेस और मीडिया से जुड़ी इन सौ हस्तियों में जेफ बेजोज, सुसान फॉलर, मार्क जकरबर्ग, टिम कुक, सुंदर पिचाई, एलन मस्क, सत्या नडेला जैसे नाम शामिल हैं। आज उनके आविष्कार की घर-घर में पहचान है। एमेजॉन उनके नाम को छिपाता क्यों है, किसी को मालूम नहीं। सच तो ये है कि जानने वाले, खुद जान जाते हैं।

आज मार्केट में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस एलेक्सा को बेजोड़ इनवेंशन माना जाता है। ये डिवाइस किसी के भी हर सवाल का जवाब देता है। गाने की फरमाइश करो तो गाने सुनाने लगेगा, चाहे जो सवाल करो, उससे झटपट जवाब ले लो। तो ये खोज है न लाजवाब! लेकिन इसी सवाल-जवाब के बीच जब कोई पूछता है कि 'एलेक्सा, आपको किसने बनाया है?' तो जवाब चौंकाने वाला होता है- 'मुझे एमेजॉन ने बनाया है!' जबकि बनाया है रोहित प्रसाद ने। रिकोड के मुताबिक रीड और रोहित ने मिलकर इस डिवाइस को बनाया है। रोहित का परिवार रांची में रहता है। वह साल में एक बार अपने परिजनों से मिलने आते रहते हैं। रोहित के पिता मीकॉन के लिए काम करते थे। दादा हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन में कार्यरत रहे। इसलिए वह पुश्तैनी रूप से इंजीनियरिंग से परिचित रहे। इस फील्ड में वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं। इंजीनियरिंग की आगे की पढ़ाई के लिए तो उनके सामने कई ऑफर थे लेकिन उन्होंने रांची में ही बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को चुना।

रोहित प्रसाद वर्ष 1997 में इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए थे। वहां चौदह साल तक वह बीबीएन टेक्नोलॉजी में काम करते रहे। उसके बाद एमेजॉन से जुड़ गए। वहां ग्राहकों की रुचियों पर वह काम करने लगे। वह पूछने-जानने लगे कि ग्राहक उनकी कंपनी अमेज़न से क्या चाहते हैं। इसी दौरान उन्होंने हॉलीवुड फिल्म स्टार ट्रेक से प्रेरित होकर अपना काम रिडिजाइन किया। फास्ट कंपनी का कहना है कि प्रसाद और रीड ने अलेक्सा को कैटेगरी डिफाइनिंग कंज्यूमर एक्सपीरियंस में बदल दिया है। यहीं उन्होंने वायरलेस ऐप्लिकेशन्स के लिए लो बिट रेट स्पीच कोडिंग पर रिसर्च किया। यहीं से उनकी आवाज पहचानने की टेक्नॉलजी में रुचि बढ़ी। आगे वह डिफेंस कंपनी रेयथॉन की अनुसंधान और विकास शाखा बीबीएन तकनीक में व्यापार ईकाई के उप प्रबंधक पद पर रहे। यद्यपि आज स्वयं रोहित भी इस सवाल पर कुछ कहने से बचते हैं कि वास्तव में एलेक्सा का आविष्कार किसने किया है लेकिन दुनिया जा चुकी है। यह झारखंड ही नहीं, पूरे हिंदुस्तान के लिए कितने गर्व की बात है कि उनके आविष्कार के पूरी दुनिया के सुर-शब्द प्रेमी मुरीद बन चुके हैं।

यह भी पढ़ें: असम की ट्रांसजेंडर स्वाति बरुआ ने जज बनकर रच दिया इतिहास

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