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राजनीति में टोना-टोटका, जादू-मंतर चालू आहे

7th Nov 2017
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राजनीति में ज्योतिष, पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र को लेकर लालू प्रसाद यादव के ताजा प्रकरण पर कुछ कहने-बताने से पहले आइए, एक ज्योतिषी के अभिमत से परिचित हो लेते हैं। वह बताता है- 'चुनाव जीतने के तीन बल हैं। अपनी कुन्डली को खोल कर देखिये कि यह तीनों बल आपके किस किस भाव में अपनी शोभा बढ़ा रहे हैं, और यह तीनो बल आपकी किन किन सफलता वाली कोठरियों के बंद तालों को खोल सकते हैं।

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पहला है- मानव बल, दूसरा है भौतिक बल और तीसरा है दैव बल। बिना दैव बल के न तो मानव बल का कोई आस्तित्व है और न ही भौतिक बल की कोई कीमत है। मानव बल और भौतिक बल समय पर फ़ेल हो सकता है लेकिन दैव बल इन दोनो बलों के समाप्त होने के बाद भी अपनी शक्ति से बचाकर ला सकता है।

भगवान गणेश मानव बल के देवता हैं, माता लक्ष्मी भौतिक बल की दाता हैं और माता सरस्वती विद्या तथा शब्द बल की प्रदाता हैं। इन तीनों देव शक्तियों का उपयोग चुनाव में शर्तिया सफ़लता दिला सकती है। राहु को विराट रूप मे देखा जाता है। राजनीतिक क्षेत्र मे एक प्रकार का प्रभाव जनता के अन्दर प्रदर्शित करना होता है जिसके अन्दर जनता के मन मस्तिष्क मे केवल उसी प्रत्याशी की छवि विद्यमान रहती है जिसका राहु बहुत ही प्रबल होता है। 

राजनीति में ज्योतिष, पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र को लेकर लालू प्रसाद यादव के ताजा प्रकरण पर कुछ कहने-बताने से पहले आइए, एक ज्योतिषी के अभिमत से परिचित हो लेते हैं। वह बताता है, 'चुनाव जीतने के तीन बल हैं। अपनी कुन्डली को खोल कर देखिये कि यह तीनों बल आपके किस किस भाव में अपनी शोभा बढ़ा रहे हैं, और यह तीनो बल आपकी किन किन सफ़लता वाली कोठरियों के बंद तालों को खोल सकते हैं। पहला है- मानव बल, दूसरा है भौतिक बल और तीसरा है दैव बल। बिना दैव बल के न तो मानव बल का कोई आस्तित्व है और न ही भौतिक बल की कोई कीमत है। मानव बल और भौतिक बल समय पर फ़ेल हो सकता है लेकिन दैव बल इन दोनो बलों के समाप्त होने के बाद भी अपनी शक्ति से बचाकर ला सकता है। 

भगवान गणेश मानव बल के देवता हैं, माता लक्ष्मी भौतिक बल की दाता हैं और माता सरस्वती विद्या तथा शब्द बल की प्रदाता हैं। इन तीनों देव शक्तियों का उपयोग चुनाव में शर्तिया सफ़लता दिला सकती है। राहु को विराट रूप मे देखा जाता है। राजनीतिक क्षेत्र मे एक प्रकार का प्रभाव जनता के अन्दर प्रदर्शित करना होता है जिसके अन्दर जनता के मन मस्तिष्क मे केवल उसी प्रत्याशी की छवि विद्यमान रहती है जिसका राहु बहुत ही प्रबल होता है। राहु मंगल के साथ मिलकर अपनी शक्ति से जनता के अन्दर नाम कमाने की हैसियत देता है। राहु सूर्य के साथ मिलकर राजकीय कानूनो और राजकीय क्षेत्र के बारे मे बडी नालेज देता है। 

वही राहु गुरु के साथ मिलकर उल्टी हवा को प्रवाहित करने के लिये भी देखा जाता है। राहु शनि के साथ मिलकर मजदूर संगठनों का मुखिया बना कर सामने लाता है। भारत का राहु वृश्चिक का राशि का है और इस राशि का राहु हमेशा ही भारत के दक्षिण को अपना प्रभुत्व देता है। जब राजनीति करने वाले एक नशे के अन्दर आ जाते हैं और उन्हे केवल अपने अहम के अलावा और कुछ नहीं दिखाई देता है, वे समझते है कि वे ही अपने धन और बाहुबल से सब कुछ कर सकते है राहु उनकी शक्ति को अपने ही कारण बनवा कर उन्हे ग्रहण दे देता है, लेकिन जो सामाजिक मर्यादा से चलते हैं, समाज को राजनीति से सुधारने के प्रयास करते हैं, राहु उन्हें भी ग्रहण देता जरूर है पर कुछ समय बाद उन्हे उसी प्रकार से उगल कर बाहर कर देता है जैसे हनुमान जी लंका में जाते समय सुरसा के पेट में गये जरूर थे लेकिन अपने बुद्धि और पराक्रम के बल पर बाहर भी आ गये थे।'

अब आइए, चलते हैं बिहार, जहां लालू यादव की राजनीति में तंत्र-मंत्र आ घुसने से इन दिनो एक नए तरह का हो-हल्ला मचा हुआ है। लालू यादव ने उत्तर प्रदेश में कभी अफसर रहे एक ज्योतिषी पंडित शंकर चरण त्रिपाठी को अपनी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल का प्रवक्ता नियुक्त कर दिया है। वह सुबह-सवेरे चैनलों पर भविष्यवाणियां करते रहते हैं। लालू यादव ने ख़ुद मीडिया को बता रहे हैं कि वह तंत्र मंत्र के बहुत बड़े जानकार हैं और अब उसी से नीतीश कुमार का इलाज करेंगे। दरअसल लालू का तंत्र-मंत्र से पुराना नाता है। राजनीति में पाखंड एक बड़ा कारगर शस्त्र रहा है। 

कभी ऐसी भी चर्चा सुर्खियों में रही थी कि नीतीश कुमार किसी बाबा के प्रभाव में हैं। उस वक्त लालू ने कहा था कि सबसे बड़े तांत्रिक तो वो खुद हैं। कुछ साल पहले जब नीतीश कुमार चुनाव हार गए थे, अपने किसी मित्र के घर गए। वहां एक बाबा लालू मुर्दाबाद, नीतीश जिंदाबाद बोल रहे थे। इसी तरह पिछले दिनो का एक वाकया कर्नाटक का है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ही नहीं, पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा भी कोलेगल कस्बे से जुड़ी कथित काले जादू संबंधी चर्चाओं के केंद्र में रहे। जब कैबिनेट में फेरबदल के बाद सिद्धारमैया मैसूर स्थित अपने घर पहुंचे थे, उन्हें एक व्यक्ति ने ‘अभिमंत्रित’ कपड़ा देना चाहा तो बिना लिए वह आगे बढ़ गए। फिर वह व्यक्ति उनकी कार तक पहुंच गया। कुछ बुदबुदाते हुए उसने उनके ऊपर टोटका कर दिया। फिर उसको मनाने की कोशिश की गई कि वह मुख्यमंत्री पर से टोटका वापस ले ले।

भारतीय राजनीति में तंत्र-मंत्र, धर्म-कर्म, पाखंड कोई नई बात नहीं है। कांग्रेस के पॉवरफुल पॉलिटिकल करियर में एक थे चंद्रास्वामी। एक दौर में एक साथ कई देशों की सरकार के ताकतवर लोगों के साथ उठने-बैठने के लिए वह मशहूर थे। बचपन से उनकी दिलचस्पी तंत्र साधना में हो गई और 16 साल की उम्र में वो तांत्रिक कहलाने लगे। वह सबसे पहले जैन संत महोपाध्याय अमर मुनि के सानिध्य में पहुंचे। तेईस साल की उम्र में बनारस में गोपीनाथ कविराज के पास पहुंच गए। तंत्र-मंत्र की साधना करने लगे। छब्बीस साल के हुए तो उन्होंने पहला महायज्ञ कर लिया। बीच में बिहार में कुछ साल रहे लेकिन वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय बताते हैं कि उनको ना तो तंत्र-मंत्र आता था, न ज्योतिष का कोई ज्ञान था। एक न्यूज़ एजेंसी के एडिटर रामरूप गुप्त ज्योतिषी थे। चंद्रास्वामी लोगों की कुंडलियां लेकर उनके पास आते रहते थे और गुप्त जी जो बताते, वही सब चंद्रास्वामी लोगों को बताते रहते थे। 

जिस तरह से हमारे समाज में अनेक तरह के अंधविश्वास जड़ जमाए हैं, वैसे ही राजनेताओं के दिल-दिमाग में भी। हाल ही में अंधविश्वास का एक मामला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मध्यप्रदेश यात्रा को लेकर चर्चाओं में रहा। पीएम को नमामि देवी नर्मदे यात्रा के समापन अवसर पर मध्यप्रदेश के अमरकंटक पहुंचना था। कहा जाता है कि जिस भी राजनेता ने नर्मदा नदी को लांघा, उसे अपनी सत्ता गंवानी पड़ी। जैसे कि इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, अर्जुन सिंह, मोतीलाल वोरा, उमा भारती, सुंदरलाल पटवा, श्यामाचरण शुक्ल, विद्याचरण शुक्ल, भैरोसिंह शेखावत आदि। इसी भय वश मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हवाई यात्रा कर नर्मदा के ऊपर से आजतक नहीं गए। उन्होंने इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी को भी हवाई यात्रा से नर्मदा को लांघने नहीं दिया। 

ये भी पढ़ें: कालाधान, तू डाल-डाल, मैं पात-पात

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