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ड्राइवर ने लौटाए ऑटो में मिले गहने, महिला ने दिया भाई का दर्जा

8th Aug 2017
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 महाराष्ट्र में एक ऑटो ड्राइवर की दरियादिली की वजह से महिला को उसका गहनों का बैग वापस मिल गया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक योगिता गायकवाड़ नाम की महिला रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाई के घर राखी बांधने के लिए जा रही थी।

<b>ये असल फोटो नहीं है, सिर्फ उदारण के लिए लगाई गई है। फोटो साभार: </b>thebetterindia

ये असल फोटो नहीं है, सिर्फ उदारण के लिए लगाई गई है। फोटो साभार: thebetterindia


पिंपलास (भिवंडी) में हुई घटना को देखकर समाज में कहीं दुबकी पड़ी ईमानदारी पर भरोसा मजबूत हुआ है, कि हां अभी भी समाज में ईमानदारी बची हुई है और ऐसे लोग अभी भी हैं जिन्हें बेईमानी की रोटी बिल्कुल पसंद नहीं है। 

ऑटो ड्राइवर अनिल पाटिल को जब ऑटो में लावारिस बैग पड़ा मिला तो उन्होंने तुरंत बैग को पुलिस के हवाले कर दिया। अपने गहने वापस पाकर योगिता को इतनी खुशी मिली कि उन्होंने अनिल पाटील को अपना भाई ही बना लिया।

महाराष्ट्र में एक ऑटो ड्राइवर की दरियादिली की वजह से महिला को उसका गहनों का बैग वापस मिल गया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक योगिता गायकवाड़ नाम की महिला रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाई के घर राखी बांधने के लिए जा रही थी। गलती से उसने ज्वैलरी से भरा बैग ऑटो में ही छोड़ दिया। ऑटो ड्राइवर अनिल पाटिल को जब ऑटो में लावारिस बैग पड़ा मिला तो उन्होंने तुरंत बैग को पुलिस के हवाले कर दिया। अपने गहने वापस पाकर योगिता को इतनी खुशी मिली कि उन्होंने अनिल पाटील को अपना भाई ही बना लिया।

योगिता ने रक्षाबंधन के दिन अनिल के घर जाकर उन्हें राखी भी बांधी। ऑटो ड्राइवर अनिल भिवंडी में अपने एक रिश्तेदार के घर में रहते हैं। उन्होंने सिर्फ हायर सेकंडरी तक की पढ़ाई की है और साथ-साथ प्रफेशनल कंप्यूटर कोर्स भी किया है। लेकिन मजबूरी में उन्हें ऑटो चलाना पड़ता है। अनिल को नई बहन मिलने का किस्सा काफी रोचक है। रविवार दोपहर का वक्त था और कल्याण की रहने वाली योगिता अपने बच्चों रितेश और दर्शन के साथ पिंपलास (भिवंडी) में अपने भाई योगेश के घर के लिए निकली थी। योगिता ने बताया कि जब वह शिवाजी चौक पहुंचीं तो उन्होंने कोनगांव के लिए शेयर ऑटो लिया। कोनगांव से उन्होंने एक बार फिर पिंपलास के लिए ऑटो लिया।

ऑटो से उतरने के दौरान योगिता का ध्यान कहीं और था और वह भागमभाग में अपने बच्चे का स्कूल बैग लेना भूल गईं। इसी स्कूल बैग में योगिता ने गहने रखे थे। जब योगिता को बैग छूटने का पता चला तो उन्होंने घबराकर अपने पति उमेश और भाई से संपर्क किया। योगिता ने बताया कि यह ज्वैलरी ही उनकी संपत्ति थी। बैग की खोज में वह शिवाजी चौक ऑटो स्टैंड भी पहुंचीं, लेकिन उन्हें ऑटो ड्राइवर नहीं मिला। वह किसी तरह भागती हुई पुलिस के पास पहुंचीं।

इसके बाद उन लोगों ने कल्याण के महात्मा फुले पुलिस स्टेशन का रुख किया। तभी योगिता को उनके भाई योगेश का फोन आया कि ऑटो ड्राइवर अनिल बैग लेकर कोनगांव पुलिस स्टेशन पहुंचा है। एसआई आरएल शेले ने पुष्टि हो जाने के बाद बैग योगिता को सौंप दिया और अनिल को सम्मानित भी किया। अनिल ने बताया कि पिछले साल भी उन्हें एक यात्री के 2500 रुपये मिले थे। उन्होंने वे पैसे भी उस यात्री को लौटा दिए थे। अनिल ने कहा, 'मैं भी खुश हूं कि मुझे रक्षाबंधन के दिन एक और बहन मिली।'

योगिता ने कहा कि वह यह जानकर काफी खुश हुईं कि अभी भी समाज में ईमानदारी बची हुई है और ऐसे लोग अभी भी हैं जिन्हें बेईमानी की रोटी बिल्कुल पसंद नहीं है। सब इंस्पेक्टर आर एल शेले ने पूरी पड़ताल की और जब पता चल गया कि यह बैग योगिता का ही है उन्होंने उसे सौंप दिया। अनिल के चाचा जी अमर पाटिल पुलिस विभाग में ही कार्यरत हैं। उन्होंने कहा, 'मेरा भतीजा पिछले साल भर से किसी अच्छी नौकरी की तलाश में है, हमें उसकी ईमानदारी पर गर्व है।'

पढ़ें: महिलाओं का स्टार्टअप शुरू करवाती हैं पुणे की आंत्रप्रेन्योर दिना

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