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कल तक ब्रेड और अंडे बेचकर गुजारा करने वाले आज इंजीनियर, IAS बनने में बच्चों की कर रहे हैं मदद

2nd Apr 2016
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वो बच्चा गरीबी के कारण कभी ब्रेड बेचकर, तो कभी वाहनों के टायर बदलकर अपना गुजारा करता था आज वो मैकेनिकल इंजीनियर है। घर में उसकी मां चूल्हा जला सके, इसके लिए वो गलियों से कभी कोयला बीनता था। लेकिन आज अपने जैसे गरीब बच्चों को ये दिन देखना ना पड़े इसके लिए वो उनको आईएएस, डॉक्टर और इंजीनियर बनने में मदद कर रहा है। अमोल साईनवार। दुनिया भले ही अमोल साईनवार को नहीं जानती हो पर जो जानते हैं उनके लिए वो बहुत बड़ी चीज़ हैं। अमोल अपने संगठन 'हेल्प ऑवर पीपल फॉर एजुकेशन' यानी 'होप' के जरिये गरीब बच्चों की उम्मीदों को पूरा कर रहे हैं, तो "शिवप्रभा चेरिटेबल ट्रस्ट" के जरिये ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और योग के विकास में काम कर रहे हैं।


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अमोल जब 8 साल के ही थे तो उनके पिता का देहांत हो गया। इसलिए उनको अपनी इंटर तक की पढ़ाई ब्रेड-अंडे बेचकर और दूसरे बच्चों को पढ़ाकर पूरी की। इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वो अपनी पढ़ाई जारी रख सकें, तब उनके दोस्त उनकी मदद के लिए आगे बढ़े, जिसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई ‘राजीव गांधी इंजीनियरिंग कांलेज, चंद्रपुर, नागपुर’ से पूरी की। बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्होंने एमटेक करने के बारे में सोचा तब भी उनके सामने पैसे की समस्या आई। इसलिए जब बीटेक में वे अपने कॉलेज में प्रथम आये तो उनको 13 हजार 500 रुपये इनाम में मिले। उन्होंने वो पैसे स्कूल की लाइब्रेरी को किताबें खरीदने के लिए दान में दे दिये, ताकि वो बच्चे भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर सकें जो पैसे की वजह से किताबें नहीं खरीद पाते।


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साल 2006 में अमोल जब ‘सिप्ला’ कंपनी में काम कर रहे थे तो उस वक्त काम के सिलसिले में उनको युगांडा जाना पड़ा। जहां की गरीबी और कुपोषण को देखकर उन्होंने फैसला किया कि वो शिक्षा के क्षेत्र में जो काम अपने स्तर पर कर रहे हैं उसे और ज्यादा फैलाने की जरूरत है। दोस्तों से बातचीत करने के बाद साल 2007 में उन्होने 'हेल्प ऑवर पीपल फॉर एजुकेशन' संस्था बनाई। इसके जरिये साल 2012 तक करीब 400 लड़कों को 2.75 लाख रुपये की स्कॉलरशिप दी।


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शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के बाद साल 2012 में ही ‘रूरल डेवलपमेंट’ के तहत इन्होंने 6 गांवों को गोद लिया है। इसके अंतर्गत अमोल ने ‘विद्यादीप’ कार्यक्रम चलाया। इसमें उन क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को सोलर लैम्प दिये गये, जिन इलाकों में बिजली नहीं पहुंची थी। साल 2012 से 2015 तक अमोल ने 400 बच्चों तक सोलर लैम्प पहुंचाये हैं। इनकी कोशिशों के कारण ही साल 2014 में महाराष्ट्र के लोनवारी गांव में बिजली आ पाई और सड़क भी बन गयी है। इस गांव के स्कूल को भी इन्होंने डिजिटल किया है। साथ ही सोलर पंप की मदद से यहां पर पानी भी पहुंचाया है।


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अमोल साईनवार ने योर स्टोरी के साथ बातचीत में बताया, 

"रूरल डेवलपमेंट में हम दूसरा काम महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कर रहें हैं, इसके पीछे उद्देश्य है महिलाओं को मजबूत करना। पिछले दो सालों में निश्चित आय न होने की वजह से जब किसान की फसल सूखे या बारिश के कारण खराब हो जाती थी तो वो आत्महत्या कर लेते थे। इसे ध्यान में रखते हुए हमने साल 2014 में ‘शिव प्रभा चैरिटेबल ट्रस्ट’ बनाया। इसके अन्तर्गत ‘प्रभा महिला ग्रोथ’ के माध्यम से किसानों की पत्नियों और विधवाओं को सिलाई की ट्रेनिंग देकर उन्हें सिलाई मशीन दी है। कुछ महिलाओं को भैंस, बकरी और कैंटीन तैयार दी है ताकि हर महीने उन्हें एक निश्चित आय मिल सके।" 

जिससे की आगे चलकर किसानों की आत्महत्या में कमी आये। अभी तक वे करीब 70 महिलाओं की इस तरह की मदद कर चुके हैं। इसके अलावा ये स्वास्थ्य के क्षेत्र में उन लोगों की मदद करते हैं जो गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। अमोल ये सब काम "शिवप्रभा चेरिटेबल ट्रस्ट" के जरिये करते हैं। जिसकी अपनी एक टीम भी है। 


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ये लोग कुल फंडिग का 20 प्रतिशत स्वास्थ्य में, 40 प्रतिशत रूरल डिवेलपमेंट में, 30 प्रतिशत शिक्षा में और 10 प्रतिशत योग और आध्यात्म पर खर्च करते हैं। साथ ही इन्होने किसानों की मदद के लिए ‘बहि राजा ग्रुप’ बनाया है जिसमें ये किसानों को उन्नत किस्म की खेती का ज्ञान विशेषज्ञों के माध्यम से कराते हैं


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अपनी फंडिग के बारे में अमोल साईनवार का कहना है, 

"कुछ फंड क्रांउड फंडिग के जरिये जुटाते हैं। साथ ही हमारे साथी ट्रस्ट में अपनी आय का 10 प्रतिशत हिस्सा देते हैं। और अगर किसी बच्चे को स्कॉलरशिप देनी होती है तो हम फेसबुक के माध्यम से भी पैसा इकट्ठा करते हैं। जब भी हम किसी बच्चे को हायर एजुकेशन के लिए स्कॉलरशिप देते हैं तो उसे नौकरी मिलने के बाद संस्था उससे कहती हैं कि उसे जितनी स्कॉलरशिप मिल रही थी उतनी ही स्कॉलरशिप वो किसी गरीब बच्चे को दे दें। जिससे दूसरे बच्चे भी तरक्की कर सकें।"


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भविष्य की योजनाओं के बारे में अमोल साईनवार का कहना कि साल 2016-17 में उन्होने सौ महिलाओं का सशक्तिकरण करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही 100 बच्चों का विकास और 5 स्कूलों को डिजिटल करने का भी इनका लक्ष्य है। अमोल की कुछ विदेशी निवेशकों से भी बातचीत चल रही हैं जिससे की वे कृषि में निवेश कर सकें।

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