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भारत की पहली LGBT मॉडलिंग एजेंसी खोलने वाली ट्रांसजेंडर

26th Apr 2017
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भारत में ट्रांसजेंडर कम्युनिटी को उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में तमाम तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। घर परिवार से लेकर, स्कूल-कॉलेज, ऑफिस, मार्केट हर जगह। यही वजह है कि उन्हें बाकी इंसानों की तरह सामान्य जिंदगी जीने में काफी मुश्किल होती है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि हमारी सोसाइटी में अधिकतर लोगों को सही से पता ही नहीं होता कि ये ट्रांसजेंडर होते क्या हैं। उन्हें तमाम तरह की गलतफहमियां होती हैं, जिन्हें दूर करने के प्रयास बहुत कम ही होते हैं। 38 साल की रुद्राणी छेत्री चौहान खुद एक ट्रांसजेंडर महिला हैं और वह मित्र ट्रस्ट (Mitr Trust) के माध्यम से ट्रांसजेंडर समुदाय की बेहतरी और समाज में ऐसे लोगों के प्रति जागरूकता फैलाने का काम करती हैं।

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"मित्र ट्रस्ट भारतीय ट्रांसजेंडर लोगों के साथ होने वाली मुश्किलों को शेयर करता है। इसके साथ ही उन्हें सशक्त बनाने के फिनेंशियल से लेकर मेंटल सपोर्ट भी देता है। ट्रस्ट ने अकेले दिल्ली में 1500 से ज्यादा ट्रांसजेंडरों की मदद की है। ट्रस्ट आमतौर पर कॉलेज के बाकी छात्रों को इकट्ठा कर उन्हें ट्रांसजेंडरों के बारे में जानकारी देता है और आसपास ऐसे लोगों के साथ कैसे बर्ताव करना है इसके बारे में भी बताता है।"

रुद्राणी छेत्री चौहान ने HIV और अन्य यौन संचारित संक्रमणों (STI) के जोखिम को कम करने और विकासशील देशों में पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों के प्रजनन और यौन स्वास्थ्य में सुधार के उद्देश्य से जनवरी 2005 में मित्र ट्रस्ट की स्थापना की। वे कहती हैं, '2005 के पहले मैं कई HIV के प्रति जागरूकता फैलाने वाले अलग-अलग संगठनों से मिला करती थी। उस वक्त मुझे समझ नहीं आता था कि मैं क्या हूं। मैं अपने शरीर के साथ सहज नहीं थी। और मैं इस असुविधाजनक स्थिति से बाहर निकलना चाहती थी, इसलिए मैंने मित्र ट्रस्ट की शुरुआत की।'

मित्र ट्रस्ट भारतीय ट्रांसजेंडर लोगों के साथ होने वाली मुश्किलों को शेयर करता है। इसके साथ ही उन्हें सशक्त बनाने के फिनेंशियल से लेकर मेंटल सपोर्ट भी देता है। रुद्राणी कहती हैं, 'ट्रांसजेंडर लोगों में काम को लेकर काफी सामर्थ्य होता है। उन्हें बस सपोर्ट और सम्मान की जरूरत होती है। अगर लोग इस बात को समझने लगें तो उन्हें मुख्यधारा में आने में देर नहीं लगेगी।'

"दिल्ली यूनिवर्सिटी से इंग्लिश ऑनर्स में ग्रैजुएट इंद्राणी ने दिसंबर 2015 में ट्रांसजेंडरों के लिए मॉडलिंग एजेंसी की शुरुआत की थी। इंद्राणी कहती हैं कि ट्रांसजेंडर लोगों को समाज इतना भयभीत कर देता है कि उनका आत्मविश्वास एकदम खत्म हो जाता है।"

मित्र ट्रस्ट ट्रांसजेंडर मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए आस्त्रेय लेस्बियन फाउंडेशन फॉर जस्टिस के साथ मिलकर काम कर रहा है। आस्त्रेय फाउंडेशन दिल्ली ट्रान्सपोर्ट कॉरपोरेशन, दिल्ली मेट्रो और दिल्ली में विभिन्न कॉलेजों के साथ मिलकर मित्र ट्रस्ट को सपोर्ट करता है। ट्रस्ट ने अकेले दिल्ली में 1500 से ज्यादा ट्रांसजेंडरों की मदद की है। ट्रस्ट आमतौर पर कॉलेज के बाकी छात्रों को इकट्ठा कर उन्हें ट्रांसजेंडरों के बारे में जानकारी देता है और आसपास ऐसे लोगों के साथ कैसे बर्ताव करना है इसके बारे में भी बताता है।

ऐसे समय में जब ट्रांसजेंडर लोगों के लिए नौकरी तलाशना काफी मुश्किल होता है, उनके लिए मनचाहा करियर ऑप्शन चुनना नामुमिन सा लगता है। इसी मुश्किल को दूर करने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी से इंग्लिश ऑनर्स में ग्रेजुएट इंद्राणी ने दिसंबर 2015 में ट्रांसजेंडरों के लिए मॉडलिंग एजेंसी की शुरुआत की थी। इंद्राणी कहती हैं, कि ट्रांसजेंडर लोगों को समाज इतना भयभीत कर देता है कि उनका आत्मविश्वास एकदम खत्म हो जाता है। उन्हें ये अहसास करा दिया जाता है कि वे सिर्फ भीख मांगने जैसा काम ही कर सकते हैं। इंद्राणी ने कहा कि इसे बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि ट्रांसजेंडर फैशन, टीवी, फिल्म और मीडिया जैसे क्षेत्र में सम्मानपूर्वक काम कर सकें। हमारी मॉडलिंग एजेंसी उन्हें ये सब मुहैया कराती है।'

लेकिन दुखद बात ये है कि इस मॉडलिंग एजेंसी के लॉन्च होने के एक साल में सिर्फ एक प्रॉजेक्ट करने का मौका मिला है। वो भी एचआईवी अवेयरनेस प्रोग्राम करने वाले संगठन की तरफ से कॉन्डम का प्रचार करने के लिए। इंद्राणी बताती हैं कि उनके प्रोजेक्ट की काफी तारीफ होने के बाद भी ट्रांसजेंडर मॉडलों की मांग काफी कम है। वो बताती हैं कि समाज में ट्रांसजेंडरों की स्वीकार्यता न होने की वजह से ऐसा होता है।

इंद्राणी ने कहा, 'वास्तव में हमें ये उम्मीद नहीं थी, कि पहले दिन से ही हमें जॉब मिलने लगेगी या फिर लोग इसे काफी सकारात्मक रूप से लेंगे। लेकिन इसके बाद भी कई सारे ट्रांसजेंडर्स ने लक्मे फैशन वीक जैसे प्रोग्राम में रैंप वॉक किया। अब धीरे-धीरे लोग हमारे बारे में जानने लगे हैं और ये समझ रहे हैं कि हम भी उनकी तरह ही समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लोगों को पता चल रहा है कि हम भी बाकी लोगों की तरह ही प्रतिभाशाली हैं।'

ट्रांस कम्यूनिटी के संघर्ष और उनकी जिंदगी को सहेजने के लिए मित्र संगठन एक इंडियन-ब्रिटिश फिल्ममेकर्स की टीम के साथ मिलकर पिछले दो सालों से काम कर रहा है। इससे इन लोगों के काम को देश के साथ-साथ विदेश में भी पहचान मिल रही है।


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