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अपना काम छोड़कर दिल्ली का यह शख्स अस्पताल के बाहर गरीबों को खिलाता है खाना

गाड़ी के जरिए अलग-अलग इलाकों में जाकर दिल्ली का एक शख़्स कर रहा है लोगों को भूख के खिलाफ लड़ने के लिए जागरुक...

1st Feb 2018
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दिनेश और उनकी टीम हर मंगलवार, शनिवार और त्योहारों पर गरीबों को खाना खिलाते हैं। उनके खाने में पूरी-सब्जी, हलवा और काबुली चने के अलावा खास मौकों पर मिठाई भी होती है। दिनेश ने बताया कि वे एक बार में वे 1000 लोगों को नश्ता खिलाते हैं। 

दिनेश चौधरी और खाने की तलाश में लोग

दिनेश चौधरी और खाने की तलाश में लोग


दिनेश यह सारा खाना अपने घर पर ही बनवाते हैं। हालांकि दिनेश बड़े ही धार्मिक प्रवृत्ति के इंसान हैं, लेकिन वे कहते हैं कि धर्म निजता का मामला है। इसके नाम पर झगड़े नहीं होने चाहिए। 

देश में गरीबी और भुखमरी का ये आलम है कि भुखमरी सूचकांक में भारत का स्थान 100वें नंबर पर आता है। किसी भी शहर में आपको राह चलते हुए गरीबों और बेसहारों की कतार दिख जाती है। उन्हें देखकर आपका भी मन दुखता होगा और मन में ये ख्याल आता होगा कि काश हम इनकी मदद कर पाते। लेकिन सबकी कुछ न कुछ मजबूरियां होती हैं जिसकी वजह से उन्हें देखकर भी अनदेखा करते हुए लोग आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन दिल्ली में रहने वाले दिनेश चौधरी ने गरीबों का पेट भरने के लिए अपना कामकाज भी छोड़ दिया। दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में वे एक-एक दिन करके गरीबों को खाना खिलाते हैं।

इस काम में दिनेश चौधरी का पूरा परिवार साथ देता है। दिनेश गाड़ी के जरिए अलग-अलग इलाकों में जाकर भूख के खिलाफ अभियान चलाते हैं। गाड़ी पर हनुमानजी की तस्वीर वाला एक बैनर लगा रहता है। जिसपर लिखा होता है, 'बालाजी कुनबा- एक परिवार भूख के खिलाफ'। इसमें आगे लिखा है, 'वह मंदिर का लड्डू भी खाता है, मस्जिद की खीर भी खाता है। वह भूखा है 'साहब' उसे, मजहब कहां समझ में आता है।' दिनेश की टीम में 8-10 सदस्य हैं। ये सभी लोग उनके परिवार के लोग ही होते हैं। उनके कुछ दोस्त भी होते हैं जो इस काम में उनका साथ देते हैं।

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दिनेश दिल्ली के आईएनए मार्केट के पास पिल्लांजी इलाके में रहते है। यहां स्थित एक मंदिर से इस मुहिम को संचालित किया जाता है। यहीं पर नाश्ता और खाना तैयार किया जाता है। ब्रेड पकोड़ों को तल रहे 31 साल के दिनेश चौधरी ने कहा, 'हमारा लक्ष्य है-एक परिवार भूख के खिलाफ। हमारा संदेश है, 'भूख पर क्रोध दिखाओ, धार्मिक मुद्दों पर नहीं।' बैनर पर बने हनुमानजी की तस्वीर के बारे में उन्होंने बताया कि यहां हनुमानजी के क्रोध से हम भूख और गरीबी मिटा रहे हैं।

इस शुरुआत के बारे में दिनेश ने हमें बताया कि पिछले साल 2017 में ही उन्होंने बालाजी कुनबे की शुरुआत की थी। इसके पहले वे मंदिर पर ही भंडारे करते थे, लेकिन उन्होंने बताया कि उस भंडारे में अपना पेट भरने वाले सामान्य लोग ज्यादा आते थे। उसमें जरूरतमंदों की मदद नहीं हो पाती थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों जैसे एम्स, आरएमएल और जीबी पंत अस्पताल के बाहर मुफ्त में खाना खिलाने लगे। इसके अलावा ये लोग बेघर और झोपड़पट्टियों, फ्लाईओवर के नीचे रहने वाले लोगों को भी खाना देते हैं।

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दिनेश ने बताया कि शुरुआत में इस काम को उन्होंने चार चचेरे भाइयों के साथ शुरू किया था। बाद में यह टीम बढ़कर 10 लोगों की हो गई। पिछले करीब 10 महीनों से यह सिलसिला चल रहा है। दिनेश ने बताया, 'मैं अक्सर भूखे बच्चों को सड़क किनारे भीख मांगते देखता था, तभी मैंने फैसला किया कि इन्हें पैसे देने से अच्छा है खाना दिया जाए।' दिनेश और उनकी टीम हर मंगलवार, शनिवार और त्योहारों पर गरीबों को खाना खिलाते हैं। उनके खाने में पूरी-सब्जी, हलवा और काबुली चने के अलावा खास मौकों पर मिठाई भी होती है। दिनेश ने बताया कि वे एक बार में वे 1000 लोगों को नश्ता खिलाते हैं। दिनेश की शादी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी को भी उनका यह काम सोशल मीडिया के जरिए मालूम चला था।

खाने के लिए लंबी लाइन में भूखे लोग

खाने के लिए लंबी लाइन में भूखे लोग


दिनेश यह सारा खाना अपने घर पर ही बनवाते हैं। हालांकि दिनेश बड़े ही धार्मिक प्रवृत्ति के इंसान हैं, लेकिन वे कहते हैं कि धर्म निजता का मामला है। इसके नाम पर झगड़े नहीं होने चाहिए। वे कहते हैं कि और भी कई लोग ऐसा करने की सोचते होंगे, लेकिन कई मुश्किलों से नहीं कर पाते होंगे। वहीं वे यह भी कहते हैं कि उनसे भी अच्छा और बड़ा काम करने वाले लोग भी हैं। लेकिन यह तो उनका बड़प्पन है। दरअसल वे खुद न जाने कितने लोगों के भूखे पेट का सहारा बन गए हैं। ऐसे लोग ही हमारे समाज के रियल हीरो हैं।

यह भी पढ़ें: घर में स्कूल खोलकर इस महिला ने किया पूरे गांव को शिक्षित

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