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माया नेगी की कोशिश महिलाओं के अंधरे जीवन में लाई उजाला

मिलें एक ऐसी महिला से जो अपनी कोशिशों से महिलाओं को डेरी और खेती के माध्यम से बना रही हैं आत्मनिर्भर।

10th Apr 2017
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माया नेगी वो नाम हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और सच्ची लगन के बल पर इलाके की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया है।

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अब तक माया महिलाओं के 100 समूह का गठन कर चुकी हैं और इन समूहों की सदस्य संख्या लगभग 1200 है।

12वीं पास करने के बाद उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई को जारी रखते हुए औरतों को पढ़ाना शुरू कर दिया।

हल्द्वानी, कोटाबाग के पास के गन्तीगांव में जन्मी माया नेगी बचपन से ही समाज में महिलाओं की स्थिति को देख कर व्यथित रहती थीं। महिलाओं की दुर्दशा से दुखी माया ने उनकी दशा सुधारने के लिए कुछ करने की ठानी। 12वीं पास करने के बाद उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई को जारी रखते हुए औरतों को पढ़ाना शुरू कर दिया। ऐसा करने से न उन्हें महिलाओं को और करीब से समझने में मदद मिली, बल्कि महिलाओं के बीच उनका विश्वास भी प्रगाढ़ हुआ।

इसी दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए डेरी उद्योग के साथ महिलाओं को जोड़ माया ने रोजगार उपलब्ध करने की पहल की और इस कार्यक्रम में लगभग 150 महिलाओं को शामिल कर पाने में वे सफल हुईं। अब तक माया महिलाओं के 100 समूह का गठन कर चुकी हैं। इन समूहों की सदस्य संख्या लगभग 1200 है। इस प्रकार से माया नेगी के प्रयासों से अब तक लगभग 1200 महिलाएं स्वावलंबी बन चुकी हैं।

आज माया नेगी इस क्षेत्र की महिलाओं के लिए एक उदहारण होने के साथ-साथ उनके हर दुःख-सुख की साथी भी हैं, हालांकि उन्होंने अपनी शुरूआत बहुत ही छोटे स्तर से की थी, लेकिन महिलाओं के प्रति उनका प्रयास आज एक बड़े अभियान का रूप से ले चुका है।

माया नेगी अपनी सूझ-बूझ और समझ का परिचय देते हो महिलाओं को उस अनोखे अभियान से जोड़ने का प्रयास किया है, जिसे सामाजिक तौर पर अनदेखा किया जाता है। उन्होंने स्थानीय महिलाओं को खेती से जोड़ने का प्रयास किया है। इस काम के लिए उन्होंने गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि विश्वविद्यालय से साझेदारी की है। कृषि विश्वविद्यालय ने महिलाओं को कृषि की नई और उन्नत तकनीक का प्रशिक्षण दिया है, जिसके परिणाम स्वरूप आज अनेकों महिलाएं सब्जी एवं फल का उत्पादन करके आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर बन चुकी हैं।

अपनी पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहने वाली माया के सामने भी किसी अच्छी नौकरी में जाने विकल्प था, लेकिन उन्होंने महिलाओं की दशा को सुधारने का बीड़ा उठाया और अपनी प्रतिबद्धता और जूनून से सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी में मुस्कान लाने में कामयाब हो सकीं हैं। माया ने महिलाओं के उत्पादों के विपणन के लिए नाबार्ड से साझीदारी की है, जिससे इन गरीब महिलाओं को अपने उत्पाद का उचित दाम मिलता है और बिचौलिये उनका शोषण भी नहीं कर पाते। वास्तव में माया नेगी की इस पहल ने महिलाओं के जीवन में उल्लेखनीय सुधार किया है।

माया कहती हैं, "यदि कोई भी महिला सहायता लिए मुझे फोन करती है, तो मैं अपने आप को रोक नहीं पाती। रात में अँधेरे या खराब मौसम की परवाह किये बिना भी मैं निकल पड़ती हूँ।" साथ ही वे ये भी कहती हैं, कि "यदि हम किसी की मदद की स्थिति में हैं, तो हमें जरूर मदद के लिए आगे आना चाहिए। क्योंकि हमारी थोड़ी सी कोशिश जरूरतमंद लोगों की ज़िन्दगी में बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है।" वास्तव में समाज सेवा और लोगों के प्रति कुछ कर पाने की भावना आज उनका जूनून बन चुकी है।

-प्रकाश भूषण सिंह

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