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इस शख़्स ने बिहार में दहेज के खिलाफ मिशन चला कर कराई 13 लड़कियों की शादी

4th Jan 2018
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दहेज का बोझ लड़की के परिवार वालों पर लाद दिया जाता है। लेकिन इस कुप्रथा को बदलने का जिम्मा बिहार के मुजफ्फरपुर के मोहम्मद इम्तियाज अली ने उठाया है।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर


इम्तियाज दहेज के लेन-देन को रोकने के लिए घर-घर जाते हैं और लोगों को जागरूक करते हैं। वे अपने साथ अपनी वाइफ निखत अहमद को भी इस मिशन पर ले जाते हैं। इन दोनों ने मिलकर पिछले एक साल में 13 लड़कियों का विवाह बिना दहेज के करवाया है।

दहेज लेने और देने की प्रथा को भले ही कानूनन जुर्म बना दिया गया है, लेकिन अभी भी यह रीति अच्छी तरह से फल फूल रही है। 2015 के एक डेटा के मुताबिक भारत में हर रोज 21 महिलाएं दहेज से संबंधित प्रताड़ना की वजह से अपनी जान गंवा देती हैं। समाज में दहेज में कैश और बहुमूल्य सामान के रूप में लेनदेन जारी है। अक्सर रिश्ता पक्का करने से पहले लड़के वाले लड़की के घरवालों से एक निश्चित रकम की डिमांड कर देते हैं। दहेज का बोझ लड़की के परिवार वालों पर लाद दिया जाता है। लेकिन इस कुप्रथा को बदलने का जिम्मा बिहार के मुजफ्फरपुर के मोहम्मद इम्तियाज अली ने उठाया है।

इम्तियाज दहेज लेन देन को रोकने के लिए घर-घर जाते हैं और लोगों को जागरूक करते हैं। वे अपने साथ अपनी वाइफ निखत अहमद को भी इस मिशन पर ले जाते हैं। इन दोनों ने मिलकर पिछले एक साल में 13 लड़कियों का विवाह बिना दहेज के करवाया है। उन्होंने पटना बीट्स से बात करते हुए कहा, 'हर साल न जाने कितनी बच्चियां जन्म लेने से पहले ही कोख में मार दी जाती हैं। उसके पीछे एक वजह ये भी होती है कि लड़कियों को बोझ समझा जाता है। हम सब को इस बुरी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाना होगा और आगे भी आना होगा।'

जब परिवार के लोग बिना दहेज के शादी करने के लिए मान जाते हैं तो शादी के वक्त स्टेज पर एक पोस्टर लगाया जाता है जिसमें सभी से शादी में दहेज न लेने के बारे में बात कही गई होती है। इम्तियाज ने जेएनयू से पढ़ाई की है। मुस्लिम लड़की की शादी के वक्त वह दहेज न लेने के लिए उपदेश देते हैं। इम्तियाज इस बात के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं कि शादी के कार्ड पर भी साफ-साफ लिख दिया जाए कि कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह का उपहार लेकर शादी में नहीं आएंगे।

पटना हाई कोर्ट में वकील राजन कुमार पांडेय कहते हैं कि बिहार पुलिस ने महिला सेल का गठन किया हुआ है और हर जिले में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों को देखने के लिए महिला थाना भी बनाए गए हैं। राज्य में दहेज विरोधी कानून भी लागू है, लेकिन इस सबके बावजूद दहेज का धड़ल्ले से लेन देन हो रहा है। पिछले चार सालों से बिहार दहेज की वजह से हुई मौतों के मामले में दूसरे नंबर पर रहा है। इस स्थिति में इम्तिया जैसे लोगों का काम सराहनीय तो है ही साथ में तमाम लोगों को दहेज के खिलाफ खड़ा कर रहा है।

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