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एचआईवी पीड़ित महिला दूसरों को कर रही है जागरूक

20 सालों से है एचआईवीएचआईवी पीड़ित महिलाओं को सशक्त बनाने की कोशिश

Harish Bisht
24th Dec 2015
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जो महिला कभी एचआईवी होने के कारण डिप्रेशन में आ गई थी वो आज दूसरी एचआईवी पीड़ित महिलाओं को उस डिप्रेशन से बाहर निकाल रही हैं। वो महिला जिसने कभी जीने की उम्मीद ही छोड़ दी थी वो आज दूसरी महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं। अहमदाबाद में रहने वाली वर्षा को करीब 20 सालों से एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी है लेकिन वो इस सब से बेपरवाह कई सालों से इस बीमारी को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने का काम कर रही है।

वर्षा को जब डॉक्टरों ने बताया कि इनकी जिंदगी केवल 2-3 सालों की बची है इसलिए ये अपनी जिंदगी को जैसे जीना चाहे वो इन सालों में जी लें। इस वजह से ये काफी डिप्रेशन में आ गई थी। क्योंकि ये नहीं जानती थी एचआईवी क्या बीमारी है, कैसे फैलती है, कहां इसका इलाज होता है। उस वक्त इस बीमारी से जुड़े ज्यादा डॉक्टर भी नहीं थे। शुरूआत के करीब तीन साल तक ये हर रोज इस डर से मरते की कब उनकी मौत हो सकती है। इस दौरान ये कभी दवाइयां लेती थी तो कभी नहीं। इसके बाद जब इनकी तबयित ज्यादा बिगड़ी तो इन्होने अपना चैकअप कराया जिसके बाद इनको लगने लगा कि अब कुछ ठोस करना ही होगा। तब ये सिविल अस्पताल में गये जहां इनकी एचआईवी को लेकर कांउसलिंग हुई। जहां इनको पता चला कि इस बीमारी ये अकेली पीड़ित नहीं हैं बल्कि और भी कई सारे लोग हैं जिनको ये बीमारी है और वो सभी अच्छी तरह से अपनी जिंदगी को जी रहे हैं।

इस दौरान ये दूसरे एचआईवी पीड़ित लोगों से मिली जिनमें से कई ऐसे लोग थे जो सालों से एचआईवी पीड़ित थे। काउंसलर ने वर्षा को भरोसा दिया कि अगर वो अपना इलाज कराएंगी तो कई साल ठीक ठाक रह सकती हैं। काउंसलिंग के दौरान इनको पता चला कि जैसे ब्लड शुगर और डायबटिज की बीमारी होती है ठीक उसी तरह एचआईवी एक तरह का वायरस है। जिसके लिए समय समय पर दवाई लेते रहना चाहिए और जांच कराती रहनी चाहिए। तब इनको इस बात का भरोसा हो गया कि जिस तरह दूसरे लोग जिंदा रह सकते हैं तो क्यों ना वो भी वैसे ही कोशिश करें। जिसके बाद ये “आधार चैरिटेबल ट्रस्ट” नाम की एक स्वंय सेवी संस्था के साथ जुड़ गई। ये संस्था एचआईवी पीड़ित लोगों की मदद करने का काम करती थी। आज वर्षा इस संस्था की अध्यक्ष हैं।

संस्था के साथ जुड़ने के बाद ये और ऐसी कई एचआईवी पीड़ित महिलाओं से मिली और उनकी तकलीफों को समझा और उनके साथ काम किया। अब तक करीब साढ़े तीन हजार लोगों को अपने साथ जोड़ चुकी वर्षा ना सिर्फ एचआईवी को लेकर उनसे बात करती है बल्कि आर्थिक दिक्कतों को दूर करने के कई उपाय भी उनको सुझाती हैं। इस काम के लिए वो गुजरात एड्स कंट्रोल सोसयटी और अहमदाबाद म्युनिसिपल कोआपरेशन एड्स कंट्रोल सोसायटी से भी मदद लेती हैं। इसके तहत वर्षा ने एक ड्रापिंग सेंटर चलाया। जिसके तहत ये एचआईवी पीड़ित लोगों के घर खुद गई और उनको इस बीमारी को लेकर जागरूक करने का काम किया। इस दौरान उन्होने ऐसी महिलाओं के साथ कई बैठकें भी जिसमें उन्होने हैल्थ और न्यूट्रीशियन की जानकारी दी। इस काम में नॉको ने इनकी काफी मदद की।

महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए इनकी संस्था खाने पीने का भी समान बनाती है। इस समान में सैंडविच, थेपला, खाखरा, भाखरी, समोसा, शर्बत जैसी चीजें शामिल हैं। ये लोग जहां कहीं कोई उत्सव होता है तो ये अपना स्टॉल लगाते हैं और शादी-ब्याह के ऑर्डर भी लेते हैं। हालांकि “आधार चैरिटेबल ट्रस्ट” की अध्यक्ष वर्षा की ये शुरुआत छोटी थी लेकिन अब समान का जितना ऑर्डर इनको मिलता है उस हिसाब से ये महिलाओं को अपने साथ जोड़ती हैं। बावजूद ये काम इतना आसान भी नहीं था। जब शुरू में लोगों को पता चला कि खाने पीने का ये सामान एचआईवी पीड़ित लोग बनाते हैं तो वो इन्हें खरीदने से झिझकते थे। धीरे धीरे लोगों में जब जागरूकता पैदा हुई कि एड्स रोगी का बनाया कुछ भी खाने से किसी को एड्स नहीं होता तो उसके बाद धीरे-धीरे इनका कारोबार आगे बढ़ता गया।

इसके अलावा स्कूल, कॉलेज और विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में जाकर एचआईवी को लेकर इनकी संस्था लोगों को जागरूक करती है। ये उन एचआईवी पीड़ित लोगों के बैंक एकाउंट खुलवाने में भी मदद करती हैं जिनके पास एकाउंट नहीं हैं। साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी मदद करती हैं।

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