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नए प्रयोगों से डिजिटल मार्केटिंग के स्वरूप को बदल रहा यह स्टार्टअप

अपने स्टार्टअप के माध्यम से डिजिटल मार्केटिंग को इस तरह बदल रही हैं मानसी...

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27th Apr 2018
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इस कंपनी की शुरूआत और इसके आइडिया की कहानी काफ़ी दिलचस्प है। इसका आइडिया भी कुछ दोस्तों को एक साथ कॉफ़ी पीते हुए आया था। मानसी बताती हैं कि लगभग 3 कप कॉफ़ी पीने के बाद उनके दोस्त (जो अब कंपनी के को-फ़ाउंडर हैं) और वह ख़ुद इस बात से सहमत हो पाईं कि उन्हें डिजिटल मार्केटिंग के बाज़ार में संभावनाएं तलाशनी चाहिए। 

मानसी

मानसी


हालांकि, कंपनी ने अभी तक किसी भी तरह का बाहरी निवेश नहीं लिया है और बूटस्ट्रैप्ड फ़ंडिंग के आधार पर चल रही है, लेकिन माइक्रोसॉफ़्ट और स्टार्टअप इंडिया की ओर से कुछ फ़ायदे और सहयोग कंपनी को ज़रूर मिल रहे हैं। 

आज हम नई दिल्ली आधारित एक मार्केटिंग टेक कंपनी के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिसका नाम है, ‘द फ़्राइडे कोड’। यह कंपनी विभिन्न प्रकार के ब्रैंड्स औऱ संगठनों के साथ मिलकर काम करती है और डिजिटल स्ट्रैटजी बनाने में उनकी मदद करती है।

कैसे हुई शुरूआत?

इस कंपनी की शुरूआत और इसके आइडिया की कहानी काफ़ी दिलचस्प है। इसका आइडिया भी कुछ दोस्तों को एक साथ कॉफ़ी पीते हुए आया था। मानसी खन्ना, मुथु सरावनन और गोपालस्वामी उस दिन डिजिटल मार्केटिंग के विस्तार, और उससे पैदा होने वाले बड़े मौक़ों के बारे में बातचीत कर रहे थे। मानसी बताती हैं कि लगभग 3 कप कॉफ़ी पीने के बाद उनके दोस्त (जो अब कंपनी के को-फ़ाउंडर हैं) और वह ख़ुद इस बात से सहमत हो पाईं कि उन्हें डिजिटल मार्केटिंग के बाज़ार में संभावनाएं तलाशनी चाहिए। वह उनकी ज़िंदगी के कुछ सबसे यादगार दिनों में से एक था। मानसी यह भी बताती हैं कि उन लोगों ने अगले ही दिन से कम्पनी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। मानसी ने आईएमटी ग़ाज़ियाबाद से एमबीए की पढ़ाई की थी, और उनके पास अपना वेंचर शुरू करने से पहले 10 साल का डिजिटल और ऐड टेक का अनुभव था।

मोबाइल ऐडवरटाइज़िंग का लंबा अनुभव

उन्होंने अपने करियर की शुरूआत सिटीबैंक से की थी, जिसके बाद कुछ समय के लिए उन्होंने स्पाइस डिजिटल के लिए काम किया और फिर भारती एयरटेल के साथ जुड़ गईं, जहाँ उन्होंने मोबाइल एजुकेशन और मोबाइल हेल्थ के क्षेत्र में अच्छा काम किया। इसके बाद उन्हें मोबाइल ऐडवरटाइज़िंग की कमान संभालने का जिम्मा सौंप दिया गया। मानसी का कहना है कि कई तकनीकी कंपनियों के आने के साथ डिजिटल विज्ञापन उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है। हालांकि, डिजिटल मार्केटिंग चलाने का माध्यम उन डिजिटल मार्केटर के लिए अब भी कई टुकड़ों में बंटा है, जो वास्तव में ब्रैंड और ख़र्चों का प्रबंधन करते हैं।

मानसी ने आगे बताया “मुझे इस बात का अहसास तब हुआ, जब मैं एयरटेल के लिए मोबाइल ऐडवरटाइज़िंग का काम संभाल रही थी। मैंने ऐडवरटाइज़िंग प्रोडक्ट्स बेचने के लिए कई बड़े ब्रैंड्स और एजेंसिया के साथ काम किया है। एक डिजिटल मार्केटर का जीवन कई डैशबोर्ड, बहुआयामी शब्दकोष और असंख्य एक्सेल शीट्स पर निर्भर करता है। यदि हम ज़्यादा गहराई में उतरते हैं, तो अधिकांश मार्केटर जितना ख़र्च कर रहे हैं, वह अधिग्रहण की लागत से अधिक है। कुछ संगठनों में तो सिर्फ़ ट्रैकिंग के लिए टूल और तकनीक पर जितना ख़र्च किया जाता है, वो कुल विज्ञापन के ख़र्च का 18 प्रतिशत है।

ज़्यादा लागत और सुविधाओं की कमी, संयुक्त रूप से हमारे लिए एक्सप्लोर करने का एक बड़ा अवसर था। मैंने इसे महसूस किया और मैं भाग्यशाली थी कि मेरी मुलाक़ात ऐसे लोगों से हुई (हाल में कंपनी के को-फ़ाउंडर्स), जिन्होंने न सिर्फ़ मेरी बात पर भरोसा किया, बल्कि अपने अलग-अलग स्किल्स से इस कम्पनी को खड़ा किया और इस तरह ही हमारा सॉफ्टवेयर-ऐज़-अ-सर्विस (SAAS) प्रोडक्ट, ‘‘क्लॉक’’ लॉन्च हुआ और एक ऑन्त्रप्रन्योर के रूप में मेरी यात्रा की शुरूआत हुई।

‘‘क्लॉक’’ पर विस्तार से बताते हुए वह कहती हैं, "यह एक सरल और स्मार्ट तरीक़े से संचालित समाधान के माध्यम से डिजिटल मार्केटिंग के प्रबंधन के लिए एक स्मार्ट मार्केटिंग प्लेटफ़ॉर्म है। यह हर तरह की डिजिटल मार्केटिंग की ज़रूरतों को पूरा करती है, जैसे कि - डिमांड साइड प्लेटफ़ॉर्म (डीएसपी), विज्ञापन सर्वर, कैम्पेन प्रबंधक और इन सब की एक साथ रिपोर्टिंग। हमने विडियो को प्रचार के माध्यम के रूप में विकसित करने के लिए कई प्रयोग किये हैं, चाहे वो नए फ़ॉर्मैट लेकर आना हो या बेहतरीन विडियो पब्लिशर्स के साथ जुड़ना।

हमारी तकनीक भी बेहद मज़बूत है, जिसके लिए हम माइक्रोसॉफ़्ट से मदद लेते हैं। ‘‘क्लॉक’’ अपने आप में ख़ास है क्योंकि बाजार में अन्य टूल्स जो पैसा खर्च करने के बाद केवल पोस्ट-मॉर्टम करते हैं, उनके विपरीत ‘‘क्लॉक’’ की तकनीक ख़र्च करने से पहले पैसे बचाने पर ध्यान देती है और हम नवीनतम इंटरएक्टिव विज्ञापन ब्यूरो (आईएबी) मानकों के अनुरूप हैं।"

‘द फ़्राइडे कोड’ में एक व्यापार मॉडल है, जो मुख्य रूप से प्लेटफ़ॉर्म लाइसेंस शुल्क पर आधारित है। भारतीय डिजिटल उद्योग लगभग 1.6 अरब डॉलर का है – और बहुत कम भारतीय कम्पनियां इसपर काम कर रही हैं, जिस वजह से यहां ऐसे स्टार्टअप के लिए बड़े अवसर हैं। माइक्रोसॉफ़्ट की ओर से ‘द फ़्राइडे कोड’ को 25 हज़ार डॉलर्स की क़ीमत वाले माइक्रोसॉफ़्ट एज़्योर क्रेडिट्स मिले और कंपनी इसे अपनी सबसे बड़ी सफलताओं में गिनती है।

क्या है आगे की प्लानिंग?

हालांकि, कंपनी ने अभी तक किसी भी तरह का बाहरी निवेश नहीं लिया है और बूटस्ट्रैप्ड फ़ंडिंग के आधार पर चल रही है, लेकिन माइक्रोसॉफ़्ट और स्टार्टअप इंडिया की ओर से कुछ फ़ायदे और सहयोग कंपनी को ज़रूर मिल रहे हैं। ‘द फ़्राइडे कोड’ के पास 11 लोगों की कोर टीम है और टीम इस बात की पूरी कोशिश कर रही है कि मार्केटिंग टेक के सेक्टम में उपलब्ध मौकों और संभावनाओं का बेहतर से बेहतर से इस्तेमाल किया जा सके।

कंपनी की आगे की प्लानिंग के बारे में जानकारी देते हुए मानसी खन्ना ने बताया कि उनकी टीम, बाज़ार में नए विडियो ऐडवरटाइज़िंग फ़ॉर्मेट्स लाने और मशीन लर्निंग ऐल्गॉरिद्म्स को बेहतर करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी की कोशिश है कि रीजनल पब्लिशर्स के नेटवर्क को और भी मज़बूत किया जा सके।

यह भी पढ़ें: गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली लड़की को कैसे मिली नासा की इंटर्नशिप

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