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तो अब कॉफी से बने डीजल से चलेंगी लंदन की मशहूर डबल डेकर बसें!

यहां डीजल से नहीं कॉफी से चलती है बस...

22nd Nov 2017
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लंदन स्थित टेक्नॉलजी फर्म बायो-बीन लिमिटेड ने कहा है कि एक साल में एक बस को ऊर्जा प्रदान करने के लिए पर्याप्त कॉफी का उत्पादन किया गया है।

लंदन की बसें (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

लंदन की बसें (फोटो साभार- सोशल मीडिया)


 'कॉफी में तेल की अत्यधिक मात्रा होती है। यहां तक कि कॉफी ग्राउंड के कचरे से 20 प्रतिशत तेल निकाला जा सकता है यह बायोडीजल के विकल्प के रूप में अच्छा स्रोत साबित हो सकता है।' 

कॉफी के अलावा मक्का और गन्ने के कचरे में एथेनॉल मिलाकर ईंधन तैयार किया जा रहा है जिसे इंजन में प्रयुक्त किया जाता है। जिसे यूएस और साउथ अमेरिका में प्रयोग किया जा रहा है। 

लंदन की बसों की एक अलग ही पहचान है। आपको जानकर हैरानी होगी कि आने वाले समय में ये बसें कॉफी से चलेंगी। ज्यादा अंचभित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि बायो ईंधन तैयार करने वाले कुछ वैज्ञानिकों ने इसे सच साबित करके दिखा दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉफी के कचरे से निकाले गए तेल को डीजल में मिलाकर जैव ईंधन तैयार किया गया है और इसका इस्तेमाल सार्वजनिक परिवहन के लिए ईंधन के रूप में किया जा रहा है। लंदन की कंपनी बायो-बीन जीवाश्म ईंधनों पर परिवहन के बोझ को घटाने और बायो फ्यूल बढ़ावा देने के लिए ऑयल कंपनी शेल के साथ एक साझेदारी की थी। इस साझेदारी के मुताबिक एक साल में 6,000 लीटर तेल उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

बायोबीन के फाउंडर आर्थर के ने एक इंटरव्यू में बताया कि, 'कॉफी में तेल की अत्यधिक मात्रा होती है। यहां तक कि कॉफी ग्राउंड के कचरे से 20 प्रतिशत तेल निकाला जा सकता है यह बायोडीजल के विकल्प के रूप में अच्छा स्रोत साबित हो सकता है।' हालांकि ऐसा अभी प्रयोग के तौर पर किया गया है। प्रयोग सफल रहा तो इस जैव ईंधन का इस्तेमाल काफी तेजी से होने लगेगा। लंदन स्थित टेक्नॉलजी फर्म बायो-बीन लिमिटेड ने कहा है कि एक साल में एक बस को ऊर्जा प्रदान करने के लिए पर्याप्त कॉफी का उत्पादन किया गया है। ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन (टीएफएल) परिवहन के दौरान धुआं उत्सर्जन को कम करने के लिए तेजी से जैव ईंधन के उपयोग की तरफ बढ़ा है।

आर्थर के ने बताया कि लंदन के लोग कॉफी से एक साल में 2 लाख टन कचरा निकालते हैं। कंपनी कॉफी की दुकानों और तत्काल कॉफी फैक्ट्रियों से कॉफी का कचरा लेती है, और अपने कारखाने में इससे तेल निकालती है, जिसे बाद में मिश्रित बी20 जैव ईंधन में संसाधित किया जाता है। बायो-बीन के संस्थापक ऑर्थर केय ने कहा, 'यह इसका बेहतरीन उदाहरण है कि हम कचरे को एक संसाधन रूप में इस्तमाल कर सकते हैं।' हालांकि खाद्य पदार्थों से बायोडीजल के उत्पादन के कारण पर्यावरणविदों ने इसे खतरनाक बताया था और कहा था कि इससे खाद्य संकट जैसी समस्या का जन्म हो सकता है। इसलिए बायो बीन जैसी कंपनी ने खाद्य कचरे से बायोडीजल के उत्पादन पर ध्यान देना शुरू किआ।

कॉफी के अलावा मक्का और गन्ने के कचरे में एथेनॉल मिलाकर ईंधन तैयार किया जा रहा है जिसे इंजन में प्रयुक्त किया जाता है। जिसे यूएस और साउथ अमेरिका में प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन लंदन में कॉफी से बायोडीजल बनाने की घटना शायद पहली बार हो रही है। इसके लिए कंपनी ने यूके में हजारों कॉफी शॉप्स के साथ समझौता किया है इसमें कॉस्टा कॉफी और कैफे नीरो जैसे आउटलेट्स भी शामिल हैं। आर्थर के ने बताया कि पूरे यूके में सालाना 5 लाख टन कचरा निकलता है। जिसे पर्याप्त मात्रा में ईंधन तैयार किया जा सकता है। लंदन के ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रयोग के तौर पर पिछले सोमवार से बसों को कॉफी वाले डीजल से चलाया जाने लगा है।

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