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पीएफ में रखे 19 लाख रुपयों से डॉक्टर ने लड़कियों के कॉलेज जाने के लिए चलवा दी बस

डॉक्टर ने किया ऐसा काम, जिस पर गर्व कर रही हैं गांव की बेटियां...

16th Oct 2017
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डॉ. यादव ने 19 लाख में 52 सीटर नई बस खरीदकर गांव से कोटपुतली तक पढ़ाई के लिए जाने वाली बेटियों की ज़िंदगी को संवारने का एक बेहतरीन काम किया है, साथ ही बस के रखरखाव और संचालन का खर्च भी डॉक्टर खुद ही उठाएंगे। इस पहल से प्रभावित इलाके के ट्रांसपोर्ट ऑफिसर ने इस स्पेशल बस के लिए रोड टैक्स में छूट दिलाने का वादा किया है। 

बस के साथ डॉ. आर पी यादव

बस के साथ डॉ. आर पी यादव


राजस्थान के जयपुर ग्रामीण इलाके में चूरी, पावला, रामनगर, कायमपुराबास भोपालपुरा की 54 लड़कियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। अभी बस से 40 लड़कियां कॉलेज जा रही हैं। 

समाज में न जाने कितने ऐसे भले लोग हैं जो दूसरों के लिए खुद को न्योछावर कर देते हैं। राजस्थान के जयपुर ग्रामीण के कोटपुतली तहसील में डॉ. आर पी यादव मिसाल हैं उन तमाम लोगों के लिए जो लड़कियों को लड़कों से कमतर मानते हैं। डॉ. यादव ने एक दिन चार लड़कियों को बारिश में पैदल भीगते हुए कॉलेज जाते हुए देखा तो उनका मन द्रवित हो गया। उन्होंने अपने पीएफ खाते में सुरक्षित लगभग 19 लाख रुपयों को निकलवाकर एक बस खरीदी और उसे इन बच्चियों की सेवा में लगा दी। डॉ. ने लगभग 20 वर्ष पहले अपनी बेटी को एक हादसे में खो दिया था। उन्होंने कहा कि अगर उनकी बेटी होते तो ये पैसे उसकी शादी और पढ़ाई-लिखाई में खर्च हो जाते।

वह कहते हैं कि गांव की लड़कियां दूर तक पढ़ने के लिए पैदल जाती हैं ऐसे में उन्हें छेड़खानी जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लोग अपने पीएफ के पैसों को बुढ़ापे के लिए बचाकर रखते हैं लेकिन उन पैसों को समाज के हित में खर्च कर डॉ. यादव ने एक मिसाल पेश की है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी यादव सामाजिक सरोकार के कार्यों से जुड़े रहते हैं। उन्होंने गांव में कई सामाजिक कार्य किए हैं। चिकित्सा विभाग से जुड़े अधिकारी समेत गांव के सभी लोग डॉ. यादव के प्रयासों अभिभूत हैं।

डॉ. यादव ने बताया कि इस साल कॉलेज में नया सत्र शुरू होने से पहले ही नई बस बुक करवा दी थी। लेकिन एजेंसी में बस न होने की वजह से कंपनी ने कहा कि उन्हें नई बस मिलने में थोड़ी देरी हो सकती है। वाकई बस मिलने में 17 दिनों की देरी हुई। इस दौरान छात्राएं कॉलेज जाने को तैयार हो गई। डॉ. दंपती ने खुद के पैसों से किराए पर बस का प्रबंध किया। फिलहाल चूरी, पावला, रामनगर, कायमपुराबास भोपालपुरा की 54 लड़कियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। अभी बस से 40 लड़कियां कॉलेज जा रही हैं। निशुल्क बेटी वाहिनी से कॉलेज जाने वाली लड़कियों से कोई खर्चा नहीं लेंगे।

डॉ. आरपी यादव ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का अभाव और निजी वाहनों में छेड़छाड़ जैसी घटनाओं से परेशान ग्रामीण बेटियों को पढ़ाने के लिए कॉलेज नहीं भेज पाते थे। इसके अलावा बारिश के मौसम में पांच गांवों की लड़कियां कई किलोमीटर पैदल चलकर कॉलेज आती थीं। पिछले साल डॉ. यादव अपनी पत्नी तारावती के साथ नीमकाथाना से अपने गांव चूरी जा रहे थे। बारिश के मौसम में कीचड़ भरे रास्ते से पांच लड़कियां कॉलेज से लौटकर गांव जा रही थी। डॉ. दंपती ने अपनी गाड़ी में लिफ्ट दी। रास्ते में बातचीत में लड़कियों ने कहा- परिवहन सुविधा नहीं होने से हर रोज पैदल आती हैं। कई बार रास्ते में छेड़छाड़ की घटना होती हैं।

इस बात ने डॉ. यादव को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने उसी वक्त अपने पीएफ के पैसों से बेटियों को कॉलेज जाने के लिए बस खरीदकर देने का वादा किया था। उन्होंने बताया कि उनकी ख्वाहिश थी कि पीएफ का पूरा पैसा अपनी बेटियों की पढ़ाई पर खर्च कर देंगे। डॉ. यादव ने 19 लाख में 52 सीटर नई बस खरीदकर गांव से कोटपुतली पढ़ाई के लिए जाने वाली बेटियों के लिए दी। बस के लिए तो कोई पैसा लिया ही नहीं जाएगा। इसके अलावा बस के रखरखाव और संचालन का खर्च भी डॉक्टर खुद ही उठाएंगे। इस पहल से प्रभावित इलाके के ट्रांसपोर्ट ऑफिसर ने इस स्पेशल बस के लिए रोड टैक्स में छूट दिलाने का वादा किया है।

डॉ. ने उन्हीं चार लड़कियों को बुलाकर बस की पूजा कराई जिन्होंने उन्हें कार में बताया था कि पैदल गांव जाना काफी मुश्किल होता है। गांव की बेटियों को पढ़ाने के लिए डॉ. दंपती की पहल पर शुरू हुई निशुल्क बेटी वाहिनी को गांव के 98 साल के बुजुर्ग हरनारायण यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इतना ही नहीं कोटपुतली तहसील के आस-पास पड़ने वाले टोल प्लाजा ने भी टोल टैक्स में छूट देने का वादा किया है। डॉ. यादव बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ अभियान से जुड़े हैं। इसके लिए लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: बंधनों को तोड़कर वरुण खुल्लर बने भारत के पहले दिव्यांग डीजे

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