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बीटेक के छात्र ने खोला ‘नाइट फूड एक्सप्रेस’, ताकि भर सके रात में नौकरी करने वालों का पेट

Harish Bisht
25th Feb 2016
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शहरीकरण के दौर में लोगों को अपनी नौकरी के लिए अपने शहर को छोड़कर दूसरों शहरों में बसना पड़ता है। परिवार से दूर व्यक्ति को जब रात की नौकरी करनी पड़ती है तब उसके सामने जो सबसे बड़ी समस्या आती है वो होती है खाने की, क्योंकि रात की नौकरी करने के बाद व्यक्ति के पास इतनी ताकत नहीं होती कि वह अपने लिए खाना बनाएं। उस समय या तो वह भूखा ही सो जाता है या फिर फ्रिज में रखा हुआ बासी खाना खाता है। ऐसी ही समस्या से रूबरू हुए दिल्ली से सटे नोएडा में रहने वाले रमा शंकर गुप्ता, जिन्होंने इस समस्या का तोड़ निकाला और खुद ही ऐसा किचन शुरू किया, जो रात में नौकरी करने वालों को भूखे नहीं रहने देता।


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मूल रूप से मध्य प्रदेश के कटनी जिले के रहने वाले रमा शंकर गुप्ता ने फरीदाबाद के अरावली इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक से बीटेक किया है। इसके बाद नोएडा के एचसीएल कंपनी में उन्होंने ट्रेनी के तौर पर काम किया। यहां पर वे नाइट शिफ्ट में ही काम किया करते थे, रमाशंकर ने योरस्टोरी को बताया, 

“नाइट शिफ्ट में काम करने के दौरान जब रात में मुझे और मेरे दोस्तों को भूख लगती थी तो नोएडा में सिर्फ एक जगह पर ही खाना मिलता था और वहां का खाना भी हमें ज्यादा पसंद नही आता था। इतना ही नहीं शिफ्ट खत्म करने के बाद जब हम वापस सुबह 4 बजे घर पहुंचते तो हममें इतनी ताकत नहीं होती थी कि हम अपने लिये खाना बना सकें। इसलिए हम भूखे ही सो जाया करते थे।" 

रमा शंकर इस समस्या से काफी परेशान थे तब उन्होंने सोचा कि क्यों ना एक ऐसा कारोबार शुरू किया जाये जहां पर नाइट शिफ्ट में काम करने वालों को खाना मिल सके।

काम को शुरू करने से पहले इस काम के बारे में उन्होने अपने माता-पिता से बात की और उन्हें भरोसे में लिया। शुरूआती निवेश के बारे में बात करते हुए रमा शंकर कहते हैं, 

"मैंने इस काम को शुरू करने के लिए अपने पिता से डेढ़ लाख रुपये लिए और जुलाई 2013 में नोएडा के सेक्टर-45 में ‘नाइट फूड एक्सप्रेस’ नाम से अपने वेंचर की शुरूआत की। इस काम के लिए पहले 1 कुक और 1 हेल्पर को काम पर रखा। शुरूआत के 6 महीने तक इसका बहुत अच्छा रिस्पांस नहीं मिला। इस दौरान मैं खुद ही खाने की डिलिवरी का काम करता था। धीरे धीरे खाना लोगों को पसन्द आने लगा और काम का विस्तार होता गया।" 

आज ये नोएडा के अलावा दिल्ली में मयूर विहार, पटपड़गंड और उसके आस पास के एरिया, इंदिरापुरम्, वैशाली, क्रासिंग रिपब्लिक और ग्रेटर नौएडा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा इन्होंने गुड़गांव में भी अपनी सेवाएं शुरू की हैं। जल्द ही इनकी योजना पूरी दिल्ली में अपनी सेवा देने की है।


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‘नाइट फूड एक्सप्रेस’ में उत्तर भारतीय और चायनीज दोनों ही तरह के व्यजंन मिलते हैं। नोएडा में दोपहर 12 बजे से सुबह के 5 बजे तक लोगों के आर्डर लेते हैं जबकि दूसरी जगहों पर ये लोग शाम के 7 बजे से सुबह के 5 बजे तक आर्डर लेते हैं। खाने के रेट भी इन्होंने काफी किफायती रखे हैं ताकि आम आदमी भी इनके बनाये खानों का लुत्फ़ उठा सके। इनके यहां पर सबसे कम कीमत 50 रुपये में पराठा मिलता है जबकि ग्रेवी चिकन की कीमत सबसे ज्यादा 600 रुपये है। रमा शंकर बताते हैं कि 300 रुपये तक के आर्डर पर ये किसी भी तरह का डिलीवरी चार्ज नहीं लेते हैं, इससे कम के आर्डर पर ये 50 रुपये डिलीवरी चार्ज लेते हैं।

इस समय इनके यहां पर 2 कुक और 4 हेल्पर काम कर रहे हैं, जबकि डिलीवरी के लिए इन्होने 7 लड़के रखे हैं। शुक्रवार, शनिवार और रविवार को ज्यादा आर्डर आने की वजह से इन दिनों में डिलीवरी करने वालों की संख्या 10 तक पहुंच जाती है। अपने काम में आने वाली दिक्कतों के बारे में बताते हुए रमा शंकर कहते हैं कि कभी कभी लोग रात में खाने के आर्डर देने के बाद सो जाते हैं तब उन्हें जगाना बहुत मुश्किल होता है, ऐसी स्थिति में कई बार खाना वापस आता है। दूसरी दिक्कत के बारे में उनका कहना है कि कई बार लोग झूठी कॉल करके भी खाना बुक कराते हैं ऐसे लोगों को ये काली सूची में डाल देते हैं।


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‘नाइट फूड एक्सप्रेस’ फिलहाल अपनी एक वेबसाइट बनाने पर भी काम कर रहा है ताकि लोग ऑनलाइन बुकिंग के जरिये खाने का ऑर्डर कर सकें। इसके अलावा इनकी योजना एक ऐप बनाने की है ताकि ग्राहकों को अच्छी सुविधा मिल सके। भविष्य की योजनाओं के बारे में उनका कहना है कि वह अपने इस वेंचर का विस्तार पूरे एनसीआर में करना चाहते हैं उसके बाद इनकी योजना पुणे और बेंगलुरू में भी इसके विस्तार की हैं। इस काम के लिए ये कई लोगों से बातचीत कर रहे हैं ताकि अगले दो सालों के अंदर इन जगहों पर ‘नाइट फूड एक्सप्रेस’ की शुरूआत की जा सके।

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