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अब बिना किसी सर्जरी के हो सकता है ब्रेन ट्यूमर का इलाज

साइबरनाइफ सर्जरी का कमाल...

21st Jul 2018
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साइबर नाइफ सिस्टम अपने आप ही सामंजस्य बैठा लेता है और ट्युमर का पता लगा लेता है जिससे स्वस्थ अंगों और उतकों तक रेडिएशन के एक्सपोजर को और कम करने में सहायता मिलती है। पारंपरिक रेडिएशन उपचार और सर्जरी की तुलना में साइबर नाइफ रेडिएशन सर्जरी के कईं लाभ हैं।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर


रेडियोथेरेपी सर्जरी से भी यह ट्यूमर खत्म किया जा सकता है। यह एक नई पद्धति है जो पूरी तरह से नॉन- इन्वेसिव है। यानी इसमें किसी भी तरह का चीरा या टांका लगाने की जरूरत नहीं होती।

आगरा की रहने वाली 32 वर्षीय गृहणी इंदु ने जब डॉक्टर को बताया कि उन्हें 1 साल पहले कान में सीटी की आवाज जैसा महसूस होने के बाद से ही शरीर में एक के बाद एक समस्याओ का सामना करना पड़ रहा हैं तो उनके मस्तिष्क का एमआरआई स्कैन किया गया। इससे पता चला कि उनके मस्तिष्क में एक ट्यूमर है जो उनकी कान की तंत्रिकाओं के साथ जुड़ा हुआ है। मेडिकल लैंग्वेज में इसे अकॉउस्टिक न्युरोमा कहा जाता है। उनके न्युरो सर्जन ने उन्हें ओपन सर्जरी कराने की सलाह दी।

लेकिन इंदु ओपन सर्जरी कराने के मूड में नहीं थी। वह गुरुग्राम स्थित आर्टेमिस हॉस्पिटल के डॉक्टर आदित्य गुप्ता से मिलीं। डॉ. गुप्ता ने पूरी जांच करने के बाद उन्हें बताया कि रेडियोथेरेपी सर्जरी से भी यह ट्यूमर खत्म किया जा सकता है। यह एक नई पद्धति है जो पूरी तरह से नॉन- इन्वेसिव है। यानी इसमें किसी भी तरह का चीरा या टांका लगाने की जरूरत नहीं होती।

रेडियोसर्जरी प्रक्रिया होने के बाद उन्हे उसी दिन अस्पताल से छुट्टी मिल गई और वह अपने सामान्य दैनिक कार्य भी करने लगी। इस प्रक्रिया में कोई खतरा नहीं था, कोई दर्द नहीं, न ही आईसीयू में रहने की आवश्यकता पड़ी। उन्हें एक सप्ताह तक अस्पताल में नहीं रुकना पड़ा और न ही उनके पति को चिंता और परेशानी में ऑपरेशन थिएटर के बाहर इंतजार करना पड़ा। अब कुछ साल बाद उनका एमआरआई स्कैन किया गया तो पता चला कि वह अब पूरी तरह स्वस्थ है और अनके सुनने की क्षमता भी सामान्य है।

साइबरनाइफ रेडियोसर्जरी क्या है?

डॉ आदित्य गुप्ता के अनुसार साइबरनाइफ रेडियोसर्जरी सिस्टम को सर्जरी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है या मस्तिष्क के कैंसर युक्त और कैंसर रहित ट्युमरों के प्रबंधन में दूसरे उपचारों के साथ यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह तकनीक भारत में पिछले 3-4 वर्षों से इस्तेमाल की जा रही है। इस तकनीक के द्वारा शरीर के अधिकतर कैंसर युक्त ट्यूमरों और कैंसर-रहित ट्यबमरों का उपचार संभव है, जिसमें सम्मिलित हैं प्रोस्टेट, फेफड़े, लिवर आदि के ट्यूमर। अब सामान्यता इसका इस्तेमाल मस्तिष्क और स्पाइन के ट्युमरों को नष्ट करने के लिए किया जा रहा है।

मूल रूप से साइबर नाइफ रेडिएशन सर्जरी सर्वाधिक विकसित, नान-इनवेसिव रेडिएशन थेरेपी टूल है जो कैंसर युक्त ट्युमरों के साथ ही कैंसर रहित ट्युमरों और अन्य बीमारियों के उपचार के लिए उपलब्ध है। इस थेरेपी में रेडिएशन की हाई डोज परिशुद्ध किरणों का इस्तेमाल किया जाता है। इस उपचार में न तो कोई दर्द होता है, ना ही कोई खतरा। इसके लिए अस्पताल में रुकने की जरूरत भी नहीं पड़ती है क्योंकि सेशन पूरा होते ही तुरंत अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। साइबर नाइफ रेडिएशन सर्जरी में रेडिएशन का हाई डोज सीधा आपके ट्यूमर को दिया जाता है जिसके लिए परिष्कृत इमेज गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।

साइबर नाइफ रेडिएशन थेरेपी की सफलता दर काफी अधिक है, हालांकि, यह उन ट्यूमरों के लिए सर्वश्रेष्ठ कार्य करती है जिनका आकार लगभग 2-2.5 से.मी. होता है। हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में, इसका इस्तेमाल मस्तिष्क के ट्यूमरों के उपचार के विकल्प के रूप में भी किया जाता है जिन्हें या तो मस्तिष्क में उनकी स्थिति के कारण ऑपरेशन द्वारा नहीं निकाला जा सकता या उन मरीजों के लिए, जिनकी खराब मेडिकल कंडीशन आदि के कारण ब्रेन कैंसर सर्जरी नहीं की जा सकती। इस उपचार की सफलता दर 90 प्रतिशत से अधिक हो सकती है अगर उपचार के लिए सही मरीज का चयन किया जाए।

साइबरनाइफ की अगली जनरेशन-एम-6 भारत में पहले इस्तेमाल की जाने वाली सर्जरुयों की तुलना में अत्यधिक परिष्कृत है, क्योंकि इसकी कुछ असाधारण विशेषताएं हैं। इसमें रेडिएशन का अधिकतम डोज कईं अलग-अलग कोणों से सीधे ट्यूमर तक पहुंचाया जाता है, इसकी सफलता दर भी काफी अधिक है। इसके साथ ही, गहन उर्जा की उत्सर्जित केंद्रित किरणें कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं और ट्यूमर के विकास को नियंत्रित (ट्यूमर सिकुड़ जाता है) करती हैं। यह लक्षित कोशिकाओं को मल्टीप्लाई करने से रोकती हैं। रेडिएशन थेरेपी का उद्देश्य हानिकारक कोशिकाओं को नष्ट करना और स्वस्थ कोशिकाओं को कम से कम नुकसान पहुंचाना होता है।

इसके अलावा, साइबर नाइफ सिस्टम अपने आप ही सामंजस्य बैठा लेता है और ट्युमर का पता लगा लेता है जिससे स्वस्थ अंगों और उतकों तक रेडिएशन के एक्सपोजर को और कम करने में सहायता मिलती है। पारंपरिक रेडिएशन उपचार और सर्जरी की तुलना में साइबर नाइफ रेडिएशन सर्जरी के कईं लाभ हैं।

साइबर नाइफ बनाम गामा नाइफ

ब्रेन ट्युमर या कैंसर रोगियों के लिए, गामा नाइफ उपचार सुविधाजनक या आरामदायक नहीं है। इसका सबसे प्रमुख कारण है कि गामा नाइफ के लिए इनवेसिव हेड फ्रेम की आवश्यकता पड़ती है जिसे खोपड़ी में बोल्ट के द्वारा कसा जाता है। इसके अतिरिक्त, उपचार की पूरी प्रक्रिया इमेजिंग, उपचार की योजनाएं और उपचार एक ही दिन में हो जाता है। सामान्यता, सुबह मरीज की खोपड़ी में हेड फ्रेम लगाई जाती है, इसके पश्चात इमेजिंग स्कैन किया जाता है। इसके पश्चात मरीज को खोपड़ी में हेड फ्रेम के साथ उपचार की योजना की प्रक्रिया के दौरान अस्पताल में इंतजार करना पड़ता है

इसकी तुलना में, साइबर नाइफ हाई-डोज रेडिएशन थेरेपी, परिशुद्ध वितरण के लिए नान-इनवेसिव, रियल-टाइम मोशन ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी है। भारी हेड फ्रेम के स्थान पर साइबर नाइफ में उपचार के दौरान केवल मुलायम मेश मॉस्क का इस्तेमाल किया जाता है। साइबरनाइफ के द्वारा उपचार कराना बहुत महंगा भी नहीं है और इसमें लगभग दूसरी सर्जरियों जितना ही खर्च आता है।

उपचार के बाद के साइड इफेक्ट्स

अधिकतर मरीजों में कोई साइड इफेक्ट्स दिखाई नहीं देते हैं और वो उपचार के तुरंत बाद अपने दैनिक कार्य कर सकते हैं, कुछ सामान्य कार्यों को करने में थोड़ी समस्या आ सकती है। उपचार के पहले अपने न्युरोसर्जन से सभी संभावित साइड इफेक्ट्स के बारे में चर्चा करें, क्योंकि आपके मस्तिष्क या स्पाइन में ट्युमर की स्थिति और प्रकार के आधार पर ये अलग-अलग हो सकते हैं।

साइड इफेक्ट्स जो अस्थायी होते हैं, उनमें सम्मिलित हैः हल्का सिरदर्द, जी मचलाना आदि। सबसे महत्वपूर्ण है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपमें किस प्रकार के ट्युमर का डायग्नोज हुआ है, यह प्राइमरी ट्युमर है या कैंसरयुक्त है जो शरीर के दूसरे भाग से आपके मस्तिष्क में मेटास्टैसाइज्ड हो गया है। सबसे जरूरी है कि इसका जल्दी से जल्दी डायग्नोज किया जाए और सर्वश्रेष्ठ उपचार विकल्पों का पता लगाया जाए।

साइबर नाइफ ब्रेन कैंसर उपचार संक्षेप में

1- रोबोटिक आर्म की फ्लेक्सिबिलिटी के कारण रेडिएशन की कईं किरणें, कईं कोणों से सीधे कैंसरयुक्त कोशिकाओं पर आक्रमण करती हैं।

2- इसके कारण आसपास की कोशिकाओंध्उतकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।

3- साइबर नाइफ रेडियो सर्जिकल उपचारों को कम अंतराल में 3-5 सीटिंग में दिया जा सकता है।

4- इसमें आप उपचार के एक या दो घंटे में नियमित गतिविधियां कर सकते हैं।

5- यह आउट पेशेंट आधार (अस्पताल में रूकने की आवश्यकता नहीं) पर किया जाता है।

यह भी पढ़ें: लिवर में फैट जमने से आपको हो सकती हैं गंभीर बीमारियां, जानें कैसे करें बचाव

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