5 साल तक पढ़ाई से महरुम दिहाड़ी मजदूर की बेटी ने सिर्फ 15 वर्ष में लिया Ph.D में दाखिला

By Pooja Goel
November 30, 2015, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:19:23 GMT+0000
5 साल तक पढ़ाई से महरुम दिहाड़ी मजदूर की बेटी ने सिर्फ 15 वर्ष में लिया Ph.D में दाखिला
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सात वर्ष की उम्र में हाईस्कूल, 10 वर्ष की उम्र में इंटर, 13 में जीव विज्ञान और वनस्पति विज्ञान में स्नातक, 15 की उम्र में पर्यावरण सूक्ष्मजीवविज्ञान (Environmental Microbiology) जैसे विषय में परस्नातक। यह सब इस उम्र मे सफलतापूर्वक करना आपके और हमारे जैसे लोगों के लिये कोरी कल्पना ही हो सकता है लेकिन इसे सच कर दिखाया है लखनऊ की 15 वर्षीय सुषमा वर्मा ने। इसके अलावा 7 फरवरी 2000 को जन्मी 15 वर्षीय सुषमा ने इसी वर्ष लखनऊ के बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) से पीएचडी की प्रवेश परीक्षा पास कर अपने नाम एक और कीर्तिमान जोड़ने में सफलता प्राप्त की है।

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एक बेहद गरीब परिवार में जन्मी सुषमा अपने माता-पिता की तीन संतानों में से एक हैं और उनके बचपन में उनके पिता एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते थे। परिवार की माली हालत बेहद खराब थी जिसके चलते सुषमा 5 वर्ष की उम्र तक स्कूल नहीं जा सकीं। फोन पर लखनऊ से हुई बातचीत में सुषमा योर स्टोरी को बताती है, ‘‘चूंकि मेरे पिता एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते थे इसलिये हमारा परिवार बेहद गरीबी के दिन बिता रहा था। गरीबी के चलते मैं बचपन में स्कूल नहीं जा सकी और पांच वर्ष की उम्र में वर्ष 2005 में यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त सेंट मीरा इंटर काॅलेज में सीधे नवीं कक्षा में पंजीकरण करवाया।’’

सुषमा अपने परिवार में अकेली ऐसी सदस्य नहीं हैं जो पढ़ाई में बहुत अच्छी हैं। उनके बड़े भाई का शौक्षणिक रिकाॅर्ड भी बहुत बेहतरीन रहा है और उन्होंने भी 9 वर्ष की उम्र में दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के अलावा मात्र 14 वर्ष की आयु में बैचलर इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए) करने में सफलता पाई थी। सुषमा बताती हैं, ‘‘मेरे बड़े भाई शैलेंद्र मेरे प्रेरणा स्रोत, मार्गदर्शक, शिक्षक, इत्यादि सबकुछ रहे हैं। मैं अपने बड़े भाई की किताबों से ही पढ़ाई करती और वे पढ़ने में मेरा सहयोग करते। उस समय मुझे पता ही नहीं था कि मैं क्या कर रही हूँ। मुझे बस पढ़ाई करने में मजा आता था और मैं पढ़ने का आनंद लेती थी।’’ शैलेंद्र फिलहाल बैंगलोर में एक तकनीकी सलाहकार के रूप में काम करने के अलावा अपना एक स्टार्टअप शुरू करने के प्रयासों को अंजाम देने में लगे हुए हैं।

वर्ष 2007 में दसवीं कक्षा का नतीजा सुषमा और उनके परिवार के लिये बिल्कुल भी अप्रत्याशित नहीं था और सुषमा ने मात्र 7 वर्ष 3 महीने और 28 दिनों की उम्र में दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने में सफलता प्राप्त की। बाद में लिम्का बुक आॅफ रिकाॅर्डस ने उन्हें ‘सबसे कम उम्र में 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्र’ के रूप में मान्यता दी। सुषमा बताती हैं, ‘‘7 वर्ष की उम्र में हाईस्कूल पास करने के बाद मुझे एक डाॅक्युमेंट्री फिल्म की शूटिंग और एक आईक्यू टेस्ट के लिय जापान जाना पड़ा। इस वजह से मुझे कुछ समय के लिये पढ़ाई से दूर होना पड़ा, जिसके चलते मैं तीन वर्ष बाद 10 साल की उम्र में 12वीं की परीक्षा देने में सफल हुई और उसे उत्तीर्ण भी किया।’’

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सुषमा बचपन से ही डाॅक्टर बनना चाहती थीं और इसलिये उन्होंने इंटर पास करने के बाद मेडिकल की पढ़ाई के लिये आवश्यक यूपी-सीपीएमटी की परीक्षा दी लेकिन उनकी कम उम्र के चलते उनका नतीजा रोक दिया गया। हालातों से घबराए बिना सुषमा ने जीवविज्ञान और वनस्पतिविज्ञान से स्नातक यानि बीएससी करने का फैसला किया और तीन वर्ष बाद मात्र 13 वर्ष की आयु में स्नातक की डिग्री भी हासिल करने में कामयाब रहीं। सुषमा बताती हैं, ‘‘बीएससी करने के बाद मैंने एनवायमेंटल बायोलाॅजी में परस्नातक किया और मात्र 15 वर्ष की उम्र में एमएससी की डिग्री अपने नाम करने में सफल रही।’’

हालांकि स्नातक करने के बाद सुषमा अपने परिवार की आर्थिक स्थित को लेकर काफी चिंतित थीं क्योंकि उनके पिता तेज बहादुर उनकी पढ़ाई का खर्चा उठाने में सक्षम नहीं थे। ऐसे में सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक उनके लिये एक देवदूत की तरह आए। सुषमा बताती हैं, ‘‘आज मैं जिस मुकाम पर भी हूं और जो भी कर रही हूं उसके पीछे बिंदेश्वर जी का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने मेरे पिता को बीबीएयू में एक सफाई कर्मचारी के रूप में नौकरी दिलवाई और इसके अलावा उन्होंने कुछ आर्थिक सहायता की भी व्यवस्था करवाते हुए एक कंप्यूटर, कैमरा और मोबाइल फोन इत्यादि भी दिलवाया।’’ इसके बाद इसी वर्ष सुषमा ने एमएससी की परीक्षा भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की और उन्होंने पीएचडी में पंजीकरण करवाने के लिये परीक्षा दी।

इसी वर्ष मात्र 15 वर्ष की आयु में सुषमा ने लखनऊ के बीबीएयू में पीएचडी की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर ऐसा करने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय होने का गौरव प्राप्त किया है। फिलहाल सुषमा उम्र में खुद से कई वर्ष बड़े छात्रों के साथ पढ़ रही हैं और उन्हें उनसे एक सकारात्मक दिशा ही मिलती है। सुषमा बताती हैं, ‘‘एक प्रकार से देखा जाए तो मैं हमेशा से ही अपने से कई वर्ष बड़े छात्रों के साथ पढ़ती आ रही हूं और अब यह मेरे लिये एक सामान्य बात बन चुकी है। अगर मुझे पढ़ाई इत्यादि से संबंधित कोई समस्या आती है तो मैं इन लोगों से पूछने और मार्गदर्शन लेने में बिल्कुल भी शर्म नहीं करती हूं और मेरे साथी भी मेरा सहयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।’’ पीएचडी पूरी करने के बाद सुषमा का इरादा एक बार फिर मेडिकल की प्रवेश परीक्षा देने का है क्योंकि उस समय तक वे आवश्यक 17 वर्ष की उम्र को पा चुकी होंगी।

सुषमा और उनका पूरा परिवार उनकी इन उपलब्धियों पर बहुत खुश है और उनके पिता को इस बात की पूरी उम्मीद है कि एक दिन उनकी बेटी सीपीएमटी की परीक्षा पास करते हुए डाॅक्टर बनने में कामयाब होंगी। इसके अलावा कुछ समय पूर्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की है।


सुषमा से उनकी ईमेल sushma936@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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