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...क्योंकि, शौक बड़ी चीज़ है

ऐसे हुई I Wear My Style की शुरुआत

24th Jun 2015
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मणि अग्रवाल फाइनेंस क्षेत्र में दुनिया की जानी-मानी कंपनी डेलोएट एंड टच में एक अच्छी नौकरी कर रहीं थीं। वो इतना अच्छा काम कर रहीं थीं कि कंपनी ने उन्हें काम करने के साथ ही अमेरिका में अकाउंटिंग की आगे की पढ़ाई की इजाजत भी दे दी। लेकिन एक बार उनके दिमाग में अपना काम यानी उद्यमी बनने का कीड़ा क्या काटा, उनके लिए नौकरी, तनख्वाह, पदोन्नति जैसी बातों का कोई मायने ही नहीं रह गया। मणि के भरोसे के लिए उनके सामने हमेशा से उनके पिता का उदाहरण होता है, जिन्होंने बिलकुल शून्य से शुरू कर आज एक कामयाब डेकोरेशन एक्सपोर्ट का कारोबार खड़ा किया, जिसमें 250 कर्मचारी काम करते हैं। अपने पिता का यही प्रेरणादायी उदाहरण उसे अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रेरित करता रहा है। वो एक दिन अपनी ही बॉस बनना चाहती थी।

हालांकि, मणि ने अपनी पढ़ाई कॉमर्स में की थी, लेकिन वो हमेशा से फैशन की दीवानी रही हैं। खास बात ये है कि वो न सिर्फ फैशन में अपनी रुचि को लेकर स्पष्ट थी, बल्कि वो ये भी जानती थी कि उसे एक डिजाइनर नहीं बनना है, उसे फैशन का कारोबार ज्यादा आकर्षित करता है।

इस तरह मार्च, 2012 में ‘आई वीयर माई स्टाइल’ का जन्म हुआ। ये पश्चिमी पोशाकों का एक ऐसा ब्रांड है जो काफी वाजिब कीमत पर लोगों को डिजाइनर कपड़े मुहैया कराता है। कामकाजी महिलाओं और कॉलेज जाने वाली छात्राओं को टारगेट कर शुरू किए गए इस कारोबार का मकसद लोगों तक उच्च तबके के फैशन को उनके बेहद करीब लाना था।

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आपको बताते हैं मणि की पूरी कहानी जो हमने उनसे कई बार बातचीत करने के बाद जाना है।

योर स्टोरी: अपने बचपन और पढ़ाई के बारे में बताएं।

मणि अग्रवाल: मैं एक डिग्रीधारी पब्लिक अकाउंटेंट हूं और मैंने अमेरिका से डिग्री हासिल की है। मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी के जीसस एंड मैरी कॉलेज से कॉमर्स ग्रेजुएट हूं और मैंने अपने स्कूल की पढ़ाई दिल्ली के बाराखंबा स्थित मॉडर्न स्कूल से की है। मेरी पढ़ाई से मुझे मेरे काम में सीधे-सीधे कोई फायदा नहीं हुआ, क्योंकि मैंने अमेरिका के GAAP (जनरली एक्सेप्टेड अकाउंटिंग प्रिंसिपल्स) में पढ़ाई की है, जो भारत में कहीं लागू नहीं होता है। लेकिन मुझे मेरे कारोबार शुरू करने के करीब तीन-साढ़े-तीन साल के अनुभव से मुझे इतना फायदा हुआ जितना किसी किताब की पढ़ाई से नहीं होता। टीम वर्क, प्रोफेशनलिज्म और वक्त की कीमत जैसी बातों की अहमियत किताबों के पढ़ने से नहीं समझ आती है, ये तो अनुभव से आती है और इसी अनुभव के आधार पर मैं अपना कारोबार चला पा रही हूं।

योर स्टोरी: ‘आई वीयर माई स्टाइल’ के साथ सफर कैसा रहा है?

मणि अग्रवाल: मैंने शुरुआत से ही बिना किसी निवेश और फायदे की सोच के साथ इस काम को शुरू किया था। पहले महीने में 60,000 रुपये के कारोबार से शुरू कर आज हम औसतन हर महीने कई लाख का कारोबार कर रहे हैं। हमलोग हर महीने 700-800 ऑर्डर पूरा कर रहे हैं और अब तक हम 10,000 से ज्यादा ऑर्डर पूरे कर चुके हैं। इस पर मार्केटिंग के लिए हमने सिर्फ 20,000 रुपये खर्च किए होंगे। हमलोग लगातार ग्राहकों के बर्ताव, उनकी मांग और जरूरतों का ख्याल रखते हैं और उन्हें पूरा करने की कोशिश करते हैं। स्टाइलटैग.कॉम पर साल 2012 में हमारी वेबसाइट को बेस्ट सेलिंग ब्रांड का दर्जा मिल चुका है। इतना ही नहीं 2013 में एक दिन में सबसे ज्यादा कारोबार करने वाली 10 ई-कॉमर्स वेबसाइट्स में हमारी साइट अव्वल रही है।

योर स्टोरी: आपके ब्रांड की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

मणि अग्रवाल: हमारे ब्रांड के कपड़े दूसरे ब्रांड से इस मामले में अलग हैं कि पूरे कलेक्शन को अलग तरह से तैयार किया जाता है और इसे तैयार करने में हम हमारे नियमित ग्राहकों की राय भी लेते हैं। हमारे कलेक्शन विदेश में तैयार होते हैं और हम ऐसे डिजाइन तैयार करवाते हैं जो देश में मौजूद दूसरा कोई ब्रांड नहीं करवाता है। इसके साथ ही हमारे डिजाइन की कीमत वाजिब होती है (औसतन एक कपड़े की कीमत 1000-2500 रुपये तक है) जिसकी वजह से ये लोगों को ज्यादा आकर्षित करते हैं। दूसरी बात ये है कि हम क्वालिटी पर काफी ध्यान देते हैं, इसकी वजह से सिर्फ 2 फीसदी ग्राहक ही ऐसे हैं, जो हमारे प्रोडक्ट को खारिज करते हैं।

योर स्टोरी: आप अपने ब्रांड के कपड़ों और बाजार में बिक रहे कपड़ों में सामंजस्य कैसे बनाते हैं?

मणि अग्रवाल: ‘आई वीयर माई स्टाइल’ पहले दिन से ही एक ब्रांड है। हमने फेसबुक के जरिए कपड़े बेचने की शुरुआत की, लेकिन लोगों की जुबान से हमारी लोकप्रियता फैली और हमारी बिक्री बढ़ने लगी। इसके बाद हमने काम को आगे फैलाया और कारोबार शुरू करने के कुछ महीने बाद ही हमने बाजार में भी काम करना शुरू कर दिया। एक साल बाद जब हमारा ब्रांड कुछ लोकप्रिय हो गया, तब हमने अपनी वेबसाइट www.IWearMyStyle.in भी शुरू की। आज फेसबुक पर हमारे 31,000 से ज्यादा फॉलोवर्स हैं और इसके लिए हमने बहुत कम पैसे खर्च किए हैं। पहले हमने 20 से ज्यादा ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस के साथ काम शुरू किया था, लेकिन ज्यादातर ने बाजार में जबरदस्त प्रतियोगिता और फंड की कमी की वजह से काम बंद कर दिया। फिलहाल हम चार से पांच वेबसाइट्स के साथ काम कर रहे हैं, जो न सिर्फ अच्छा कारोबार कर रहे हैं बल्कि संचालन में भी काफी स्थायित्व है।

योर स्टोरी: भविष्य में आपकी क्या योजनाएं हैं?

मणि अग्रवाल: ई-कॉमर्स उद्योग में उतार-चढ़ाव के बावजूद हम इस साल अपने कारोबार को दोगुना करने की उम्मीद कर रहे हैं। हमलोगों की कोशिश है कि हम कुछ चुनिंदा मार्केटप्लेस के साथ ही जुड़कर अपने कारोबार को आगे बढ़ाएं। फ्लिपकार्ट और मिंत्रा के साथ जुड़कर हम ग्राहक केंद्रित रणनीति के साथ आगे बढ़ेंगे। हम लोग स्टॉक बढ़ाने के लिए एक बड़ा निवेश करने की भी योजना बना रहे हैं, क्योंकि अब प्रतियोगिता बढ़ने से डेलिवरी की समय सीमा 10-15 दिन से घटकर 24-48 घंटे हो गई है। आखिर में हम अब ऑफलाइन में हाथ आजमाना चाहते हैं। हमारी योजना देश भर में अलग-अलग स्टोर मालिकों से संपर्क कर उनके स्टोर पर अपने डिजाइनर कपड़े बेचने की है।

हमलोगों की कोशिश है कि हम निवेशकों तक तभी जाएं, जब हमें वाकई में इसकी जरूरत हो और तब तक हम अपने संस्थान को बेहद अनुशासित तरीके से चलाएं। निजी तौर पर मैं कहूं तो मैं अभी सिर्फ 26 साल की हूं, तो मैं आने वाले वर्षों में देश के किसी अच्छे बी-स्कूल से एक्जेक्यूटिव एजुकेशन पूरी करने की सोच रहीं हूं।

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