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गरीबों के लिए संजीवनी 'MCRC'

- गरीब बच्चों का मुफ्त में इलाज करता है एमसीआरसी- मस्क्यूलर डायस्ट्रोफी बच्चों में पाया जाने वाला डिसॉर्डर है।

9th Jul 2015
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ऐजुकेशन और हेल्थकेयर ये दो ऐसे क्षेत्र हैं जो किसी भी देश की दशा व दिशा को बताते हैं जिस देश के लोग पड़े लिखे होंगे और स्वस्थ होंगे वो देश काफी तरक्की करेगा इसलिए आज सरकारें भी इस दिशा में काफी काम कर रहीं हैं, साथ ही कई लोग भी इस क्षेत्र में काम करने के लिए आगे आए हैं ऐसी ही एक शख्सियत हैं डॉक्टर बी आर लक्ष्मी जो कि एम डी सी आर सी, की संस्थापक हैं और यह कोयंबटूर,तमिलनाडु में स्थित है।

एक प्रोफेशनल होकर अपने संस्थान को चलाना साथ ही गरीब लोगों की मदद भी करना एक बहुत बड़ा कार्य है। ज्यादातर देखा जाता है कि गरीब लोगों की मदद के लिए सरकारी या अन्य सहकारी संस्थाएं ही आगे आती हैं या फिर वे जिन्हें सरकार से ग्रांट मिल रहा हो, लेकिन एेसी बहुत कम संस्थाएं होती हैं जो कि एक बड़ा रिसर्च इंस्टीट्यूट चला रही हैं वे गरीबों के बारे में सोचे । एम डी सी आर सी उन चुनिंदा रिसर्च सेंटर में से ही एक है जो ऐसा कर रहा है।

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लक्ष्मी ने पीएचडी आईआईटी मद्रास से की उनका विषय बायोकैमिस्ट्री एंड जेनेटिक्स था, उन्होंने कोयंबटूर से अपनी मास्टर्स की पढ़ाई की । कॉलेज के दिनों से ही उनका कम्यूनिटी वर्क की तरफ काफी रुझान था । कॉलेज के दिनों में उनके एक अध्यापक ने कहा था कि विज्ञान आम लोगों तक पहुंचना चाहिए तभी वो सार्थक होता है अगर वो चंद लोगों तक ही रहा तो उसका कोई फायदा नहीं। इस बात को लक्ष्मी ने गांठ बांध के रख लिया और कोशिश की कि वे अपने माध्यम से विज्ञान को जरूरतमंदों और आम जन तक पहुंचाएंगी।


पब्लिक हेल्थ हमेशा से ही उनके दिमाग में थी कि उन्हें इसमे कुछ काम करना है। पीएचडी के बाद वे विदेश गईं। सिंगापुर, यूएस की कई मल्टीनेश्नल में काम किया। लेकिन जब उनका बेटा नवीं कक्षा में गया तब उन्होंने तय किया कि वे अब कम्यूनिटी के लिए काम करेंगी और फिर वर्ल्ड बैंक के एक प्रोजेक्ट से जुड गईं उन्होंने वहां ग्राउंड लेवल पर काम किया कार्यक्रम के दौरान कई गांवों को गोद लेना था इसी दौरान वे सुंदरा मैडिकल फाउन्डेशन के टच में आईं लेकिन उस दौरान सुनामी आई और सरकार ने कहा कि प्रोजेक्ट को थोडे समय के लिए रोक दिया जाए। उसके बाद उनके पास मस्क्यूलर डायस्ट्रोफी पर काम करने का एक प्रोजेक्ट आया । जिसके लिए उन्हें डच सरकार की तरफ से आर्थिक अनुदान भी मिल गया हालाकि लक्ष्मी को उस समय तक उस डिसऑडर के बारे में ज्यादा पता नहीं था और ना ही उन्हें ये पता था कि ये डिसऑडर कितना व्यापक है। इसलिए उन्होंने इसे समझने के लिए एक अमेरिकी डॉक्टर से संपर्क किया और उन्होंने लक्ष्मी को रिसर्च करने के लिए अपने लैब में बुलाया

लक्ष्मी बताती हैं कि हेल्थकेयर सेक्टर में अच्छा करते रहने के लिए जरूरी है कि आप रिसर्च करते रहें और खुद को अपडेट करते रहें आपको बीमारी की तह तक पहुंचना होता है तभी आप लोगों का सही उपचार कर सकते हैं। आपको ये कभी नहीं मानना कि आपको सब कुछ पता है । अपने रिसर्च क्लीनिक में लक्ष्मी मस्क्यूलर डायस्ट्रोफी से पीडित बच्चों का इलाज करती हैं बिना फीस लिए ।

म्यूटेसन के बारे में जानना बेहद जरूरी है और उसमें रिसर्च की बेहद जरूरत है इससे भविष्य में बच्चों के इलाज में काफी मदद मिलेगी। इस डिसऑडर से लड़के ज्यादा ग्रसित होते हैं । लक्ष्मी और उनकी टीम ने बेहतरीन काम किए और चार साल जब तक उन्हें ग्रांट मिल रहा था तब 500 मरीजों को ठीक किया लेकिन 4 साल बाद जब ग्रांट की अवधि पूरी हुई तो वे लोग इस कार्य को बंद नहीं करना चाहते थे। अब समस्या थी कि वे क्या करें कैसे फंड जुटाएं और लोगों की मदद करें तब सब एक्स्पर्टस को लक्ष्मी ने एक राह सुझाई कि क्यों न वे लोग एक युनिवर्सिटी खोलें और लोगों की मदद करें सब को आईडिया बहुत पसंद आया और लक्ष्मी को इसकी मंजूरी मिल गई ।

मस्क्यूलर डायस्ट्रोफी मुख्यतः बच्चों को असर करती है । 3 साल की उम्र तक बच्चा बिलकुल नार्मल होता है लेकिन उसके बाद थोडे-थोडे लक्षण दिखने लगते हैं । जैसे बच्चा अचानक नीचे गिर जाता है माता-पिता को लगता है कि यह कमजोरी के कारण हुआ है। और यही सोचकर वे इसको गंभीरता से नहीं लेते लेकिन जब बच्चा 5 साल का हो जाता है और ये चीजें होती रहती हैंं तब वे किसी डॉक्टर के पास जाते हैं । एम डी सी आर सी, के पास आज लगभग 3500 बच्चों का डाटा है जो इस डिसऑडर से ग्रसित हैं और एम डी सी आर सी, बच्चों का लगातार बढ़िया इलाज कर रहा है। 2011 में एम डी सी आर सी ने नेश्नल रूलर हेल्थ मिशन की शुरूआत की। तब लक्ष्मी को पता चला कि इस डिसऑडर से पीडित बच्चों की संख्या असल में काफी ज्यादा है । इंडियन कॉउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने लक्ष्मी और उनकी टीम को एडवांस रिसर्च के लिए एक सेंटर भी दिया है । इसके अलावा जब लक्ष्मी ने अपने काम के बारे में विभिन्न मंचों पर बताया तो विभिन्न लोग उन्हें मदद करने के लिए आगे आए।

लक्ष्मी ने सही मायने में विज्ञान को आम जन तक पहुंचाया और उसके जरिए गरीब लोगों की बिना कुछ लिए मदद की व लगातार कर रहीं हैं ।

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