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अपने-अपने टेंशन में सरकार और बाजार

19th Sep 2017
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अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती से चिंतित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मंगलवार को हालात का जायजा लेने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली सहित अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श करेंगे। केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था की टेढ़ी चाल से इस वक्त काफी चिंतित है। 

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर


पीएम की बैठक मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर के तीन साल के निम्न स्तर पर पहुंचने के कुछ दिनों के बाद हो रही है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर 5.7 फीसदी रही, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 7.9 फीसदी तथा जनवरी-मार्च तिमाही में 6.1 फीसदी थी।

किसी को वोट की चिंता, किसी को नोट की। दोनो एक दूसरे में गुंथे हुए। यद्यपि दोनों का आपस में चोली-दामन का संबंध है लेकिन अपना-अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए बाजार की अपनी चिंताएं हैं और सरकार की अपनी चिंताएं। बाजार बेचने में मस्त हैं तो सरकार की चिंताएं कुछ और। 

आइए, आज जरा दो तरह की चिंताओं से दो-चार हो लेते हैं। मुश्किलें सरकार से बाजार तक। किसी को वोट की चिंता, किसी को नोट की। दोनो एक दूसरे में गुंथे हुए। यद्यपि दोनों का आपस में चोली-दामन का संबंध है लेकिन अपना-अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए बाजार की अपनी चिंताएं हैं और सरकार की अपनी। बाजार बेचने में मस्त हैं तो सरकार को लोगों की माली हालत सलामत रखने की चिंताएं। उदघाटन के दिन ही गूगल का 'तेज' भले मंद पड़ गया हो, अब सबको बाजार की धुन है, तो है, क्या करिएगा। बाजार की तब और अब, की हलचलों से होली और दिवाली में एक बड़ा बुनियादी फर्क आ गया है। पकवानों का त्योहार होली खाने, गाने-बजाने, हुल-हपाड़ा करने में गुजर जाता है लेकिन दिवाली आने के महीनों पहले से बाजार के कान तान देती है। मीडिया की उंगली थामे जैसे दुनिया भर का बाजार भारत की धरती पर उतर आता है। और तो और, इस बेशुमार चमक-दमक वाली हलचलों में हमारी जिंदगी की रफ्तार से हर पल जुड़ी बैंक व्यवस्थाएं भी झपट्टेदार हस्तक्षेप करने में व्यस्त हो जाती हैं। 

जब से भारतीय बाजार में ई-कॉमर्स कंपनियों की जड़ें गहरी हुई हैं, त्योहारों के मौके पर उनके भी तरह तरह के ऑफर लोगों को ललचाने, दौड़ाने, घुमाने लगते हैं और दिवाली का दिन आते-आते बाजार का अरबों का सामान लदा-फदा पहुंच जाता है देश के लाखों-करोड़ों घरों में। इस कड़ी में आइए, आज जरा दो तरह की चिंताओं से दो-चार हो लेते हैं। मुश्किलें सरकार से बाजार तक। किसी को वोट की चिंता, किसी को नोट की। दोनो एक दूसरे में गुंथे हुए। यद्यपि दोनों का आपस में चोली-दामन का संबंध है लेकिन अपना-अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए बाजार की अपनी चिंताएं हैं और सरकार की अपनी चिंताएं। 

बाजार बेचने में मस्त हैं तो सरकार की चिंताएं कुछ और। अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती से चिंतित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मंगलवार को हालात का जायजा लेने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली सहित अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श करेंगे। केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था की टेढ़ी चाल से इस वक्त काफी चिंतित है। पीएम की बैठक मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर के तीन साल के निम्न स्तर पर पहुंचने के कुछ दिनों के बाद हो रही है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर 5.7 फीसदी रही, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 7.9 फीसदी तथा जनवरी-मार्च तिमाही में 6.1 फीसदी थी।

हमारे पुरखों ने कहा है कि चतुराई से चिंता घटे, दुख से घटे शरीर। अब आइए, कुछ ऐसी ही ताजा सुर्खियों से गुजरते हैं। एक तरफ देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक समेत कई बैंकों ने बचत खाते में जमा राशि पर मिलने वाली अपनी ब्याज दरें घटा दी हैं तो दूसरी तरफ एक एयरटेल बैंक ऐसा भी है जो बचत खाते पर 7.25 फीसदी का ब्याज दे रहा है, साथ में और भी ढेर सारी सुविधाएं। गौरतलब है कि देश भर में एयरटेल रिटेल आउटलेट अब एयरटेल बैंक की तरह काम करने जा रहे हैं। ग्राहक एयरटेल स्टोर पर अपना अकाउंट खोलने के साथ ही रुपये भी निकाल सकते हैं। इस बीच भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआर्इ) देश के लोगों को सावधान कर रहा है। वह कह रहा है कि यदि आप उसके अनुषंगी बैंकों के ग्राहक हैं, तो अभी से इन बैंकों के चेक बदलने शुरू कर दें वरना 30 सितंबर के बाद वे रिजेक्ट हो जाएंगे। 

एसबीआर्इ के वे अनुषंगी बैंक हैं - स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर (एसबीबीजे), स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (एसबीएच), स्टेट बैंक ऑफ मैसूर (एसबीएम), स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (एसबीपी), स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर (एसबीटी) और भारतीय महिला बैंक (बीएमबी), इन सबका एसबीआर्इ में विलय हो चुका है। बाजार में उछाल के नाना जतन ने आम आदमी की जिंदगी को चकरघिन्नी बनाकर रख दिया है। रोज नई-नई सुर्खियां, नए-नए पेंच। 

सुबह उठिए, अखबारों पर नजर डालिए या गई रात टीवी से आंखें चार हुई हों तो सुबह होते ही निकल पड़िए नए तरन्नुम में बाजार की खाक छानने। ई-कॉमर्स कंपनियों का फेस्टिवल सीजन शुरू हो चुका है। वे इसी सप्ताह से एक से बढ़कर एक ऑफर्स देने लगी हैं। फ्लिपकार्ट बिग बिलयन डे सेल में गैजट्स और बिग अप्लायंसेस पर इस बार भी भारी छूट देने जा रही है। ई कॉमर्स कंपनी आसुस, मोटोरोला, और एचटीसी के बजट स्मार्टफोन पर काफी बार्गेनिंग का वादा कर रही है। सैमसंग गैलेक्सी और रेडमी पर भारी छूट मिलने वाली है। लेनेवो और पैनासॉनिक के लिए भी जेब खोल लीजिए। फ्लिपकार्ट इसे 'बिग लूट' बता रहा है और टीवी, रिफ़्रिजरेटर्स, एसी और वॉशिंग मशीन पर सत्तर प्रतिशत तक छूट देने जा रहा है।

कहीं जियो-जियो हो रहा है, लियो-लियो, दियो-दियो। कोई लंबी-लंबी गाड़ियां खरीद ले आ रहा है तो कोई लंबे-लंबे मोबाइल। सड़क पर जगह हो, न हो, जेब में पैसे रहें, न रहें। यूजर्स के लिए बाजार में भांति-भांति के तमाशे, धमा-चौकड़ी मची हुई है। दस-पंद्रह साल मेहनत करने के बाद कंपनियों ने कार-मोबाइल को चूंकि हर आदमी की जरूरी जरूरतों में शुमार कर दिया है, इसलिए आज हालात ये हैं कि छोटे-बड़े कस्बे से महानगरों तक जिस भी बाजार में घुसिये, सबसे ज्यादा झक्कास उजालेदार शो रूम आपको इलेक्ट्रॉनिक सामानों, वाहनों और मोबाइल शॉप के दिख जाएंगे। चमक ऐसी की आंखें चौंधिया उठें। इसके बाद देखने वालों में बहुतेरे झप्प-झप्प पलक झपकाते हुए पहुंच जाते हैं शॉप में और शुरू हो जाती है जेब-जमा तलाशी। खुद ही दुकानदार की मुट्ठी में धर आते हैं, तलाशी भी कहां। और घर ले आते हैं लंबा सा मोबाइल, चिकिर-पिचिर शुरू। 

एक से एक फन्ने खां। महीने के अंत में जब राशन वाले, दूध वाले, सब्जी वाले, स्कूल वाले के साथ मालिक नुमा मकान वाले के तकादे घेरते हैं, आंख और बत्तीसी निकल कर बाहर आ जाती है। तो बाजार ने ये हाल बना रखा है आम आदमी का। रोके-टोके कौन। सरकार की अपनी चिंता, वोट लेकर आई है, बाजार की अपनी चिंता, नोट लेकर जाना है। इस बीच अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए टेलीकॉम सर्विस ऑपरेटर वोडाफोन एक धमाकेदार ऑफर के साथ आया है। वोडाफोन अपने ग्राहकों को 900 रुपए का कैशबैक दे रहा है। यह शानदार ऑफर कंपनी स्मार्टफोन निर्माता लावा के साथ लेकर आई है। सबसे मजेदार बात है कि यह कैशबैक गारंटी का है।

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