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भारतीय घरों में पहुंचाया विदेशी स्वाद

- स्वाद के शौकीनों के लिए फिजी फूड बनकर आया एक बेहतरीन विकल्प। - मेन्यू में शामिल हैं इटैलियन, मैक्सिकन, लेबनीज़, फ्रैंच और जापानी कुज़ीन की कई वरायटी।

1st Jun 2015
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भारतीय फूड बाजार पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से उभरकर सामने आया है। जहां इस दौरान खाने को लेकर टीवी पर लगातार लगभग हर चैनल फूड शोज दिखाए जा रहे हैं वहीं चौबीस घंटे का फूड चैनल भी हमारे सामने है। मजे की बात यह है कि इन शोज पर आने वाले यह मशहूर शेफ टीवी पर न केवल इंडियन खाने के बारे में बताते हैं बल्कि विदेशी खाना घर पर कैसे बने यह भी बताते हैं। और लोग भी बहुत दिलचस्पी से इन फूड शोज को देखते हैं और काफी कुछ सीखते भी हैं। इससे पता चलता है कि भारत में भोजन का महत्व अब केवल पेट भरने तक सीमित नहीं रहा।

इस बढ़ते फूड बाजार के बीच एक नई कंपनी फिजी फूड लैब ने भी कदम रखा और तेजी से अपना विस्तार किया। फिजी फूड लैब खाने के शौकीनों के लिए उनके मन का भोजन उपलब्ध करा रहा है। इनके मेन्यू में इटैलियन, मैक्सिकन, लेबनीज़, फ्रैंच और जापानी कुज़ीन की अच्छी वरायटी है। कंपनी का अपना अच्छा शेफ नेटवर्क है जो खाने की किट्स उपलब्ध करता है।

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पिछले एक साल में टीम ने सफलता के कई नए आयामों को छुआ और उम्मीद से पांच गुणा ज्यादा तरक्की की। विपुल की कंपनी एक महीने में लगभग पचास लाख रुपए कमा लेती है। टीम के बढऩे के साथ-साथ हर व्यक्ति की जिम्मेदारियों को बांट दिया गया है। जैसे विपुल अब पूरी तरह से कंपनी की सेल्स देखते हैं। वहीं वरुण झावर कंपनी की मार्किटिंग पॉलिसी तैयार करते हैं। मनीष त्रिधानी कंपनी का ऑपरेशन देखते हैं। यह तीनों लोग आईआईटी से हैं और कुछ नया करने के मकसद से एक साथ जुड़े। इस साल के अंत तक ये कुछ और प्रोडक्ट्स अपनी मेन्यू लिस्ट में जोडऩा चाहते हैं। अपनी मौजूदा किट्स के अलावा हाल ही में उन्होंने शेफ बास्किट को लॉच किया है जोकि सिंगल और कामकाजी लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की है। लॉच के साथ ही शेफ बास्किट इनका बहुत कम समय में सबसे ज्यादा बिकने वाला प्रोडक्ट बन चुका है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एमेजॉन में आने के मात्र दो सप्ताह में ही इस प्रोडक्ट के दस हजार पैक बिक चुके थे।

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फूड बिजनेस में खुद को स्थापित करना कोई आसान काम नहीं है। इस बिजनेस में यदि आप लंबे समय तक टिके रहना चाहते हैं और अपने बिजनेस को फैलाना चाहते हैं तो आपको समय-समय पर खुद को अपग्रेड करना होगा। प्रोडक्ट की क्वालिटी के साथ आप कोई समझौता नहीं कर सकते और साथ ही खाने की क्वालिटी पर आपको पैनी नज़र रखनी होगी। इसके अलावा ग्राहकों की पसंद और नापसंद का भी ख्याल रखना होगा। शेफ बास्किट तकनीक और नवीनिकरण पर खास जोर देती है। इसकी पैकिंग के लिए जो तकनीक इस्तेमाल होती है उसे सुधारते रहना इनका लक्ष्य है ताकि प्रोडक्ट लंबे समय तक खराब न हो। क्योंकि इनके खाने में प्रिज़रवेटिव का इस्तेमाल नहीं होता इसलिए पैकिंग और क्वालिटी पर इन्हें विशेष ध्यान देना पड़ता है। इसके अलावा बाजार में किस चीज़ की ज्यादा मांग है और क्या ज्यादा नया और बेहतर है उसके लिए मनीष विभिन्न सप्लायर से मिलते रहते हैं। इन्होंने माइक्रोचैम से अनुबंध कर रखा है। यह वह संस्था है जो क्वालिटी पर नज़र रखती है। इस प्रकार ग्राहकों को अच्छा प्रोडक्ट मिलता है। शेफ बास्किट के लॉच होने पर इन्हें बाजार में मौजूद कई बड़ी कंपनियों से चुनौती मिली। क्योंकि कुछ बड़ी कंपनियां पहले ही इस बाजार में सक्रीय थीं। जबकि इनके पास पैसा कम था, साथ ही अनुभव की भी कमी थी लेकिन इन्होंने इस प्रतियोगिता का सामाना करने के लिए पूरी प्लानिंग की। टीम ने प्रोडक्ट लॉच करने से एक साल पहले से बाजार का सर्वे करना शुरु कर दिया था। साथ ही मार्किंटिंग और ट्रायल भी एक साल पहले से शुरु कर दिया था। जब यह बाजार और अपने प्रोडक्ट को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हो गए तब जाकर इन्होंने बाजार में अपना कदम रखा।

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फिजी फूड अपने हर ग्राहक की प्रतिक्रिया को ध्यान से सुनता है और जहां सुधार की गुंजाइश होती है वहां यथासंभव सुधार भी करता है। जैसे एक बार टेस्टिंग शेशन के दौरान इनके किसी प्रोडक्ट को थोड़ा तीखा बताया गया तो इन्होंने तुरंत कम तीखा वर्जन लॉच कर दिया।

फिजी फूड अब अपने उत्पादों की रेंज को बढऩा चाहता है। इसके अलावा वह अपने यहां विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों की नियुक्ति भी कर रहा है ताकि अपने उत्पाद का विस्तार कर सके।

भारत की रेडी टू ईट फूड मार्किट का सन 2015 में 2900 करोड़ का आंकड़ा छूने का अनुमान है। और सन 2014 से 2019 तक लगभग 22 प्रतिशत की दर से इस इंडस्ट्री के विकास होने का भी अनुमान है।

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एक नई स्टार्टअप के लिए बड़ी कंपनियां ही चुनौती नहीं होती। बेशक इस क्षेत्र में यूनिलीवर, गोदरेज और आईटीसी जैसी बड़ी कंपनियां हैं। फिर भी इन्हें अपनी जैसी ही नई कंपनियों से भी प्रतिस्पर्धा मिलती है। आज बेशक फूड बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है लेकिन साथ ही इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी उतनी ही तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यह नई स्टार्टअप कंपनियों के ऊपर निर्भर करता है कि वे इन दोनों के बीच अपने लिए कैसे जगह बना पाती हैं।

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