संस्करणों
विविध

एनी दिव्या बनीं बोइंग 777 विमान उड़ाने वाली पहली यंगेस्ट महिला

3rd Aug 2017
Add to
Shares
4.1k
Comments
Share This
Add to
Shares
4.1k
Comments
Share

विजयवाणा की रहने वाली दिव्या को बचपन से ही हवाई जहाज उड़ाने का शौक था और वो एक पायलट बनना चाहती थी । 21 साल की उम्र में उन्होंने बोईंग 777 उड़ाना शुरू किया। दिव्या ये भी मानती हैं कि बिना अपने माता-पिता के सहयोग के वो यहां तक नहीं पहुंच पातीं।

image


एनी को मात्र 30 साल की उम्र में कमांडर का खिताब प्राप्त हुआ है। एनी दुनिया की यंगेस्ट महिला कमांडर हैं, जो बोइंग 777 विमान उड़ाती हैं। 

दिव्या जब भी पायलट बनने की बात करती थीं तो सारे दोस्त उनका मजाक उड़ाते थे लेकिन उनके पैरेंटस की सोच सपोर्टिव और प्रोग्रेसिव थी। इसका फायदा उन्हें अपने करियर में तब मिला जब सबकी परवाह किए बिना उन्होंने पारंपरिक करियर के मार्गों को छोड़ दिया और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी में अपना नामांकन कर दिया।

सपनें उन्हीं के पूरे होते हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखो से नही हौसलों से उड़ान होती है; इस कहावत को देश की एक बेटी ने सच कर दिखाया है। 30 साल की एनी दिव्या ने वो कीर्तिमान अपने नाम कर लिया जिसका सपना वो बचपन से देखा करती थीं। दिव्या दुनिया की यंगेस्ट महिला कमांडर हैं, जो बोइंग 777 विमान उड़ाती हैं । एनी दिव्या कहती हैं कि उन्होंने इस सपनें को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम किया तब जाकर उनको ये सफलता मिली । एनी दिव्या को मात्र 30 साल की उम्र में कमांडर का खिताब प्राप्त हुआ है।

विजयवाणा की रहने वाली दिव्या को बचपन से ही हवाई जहाज उड़ाने का शौक था और वो एक पायलट बनना चाहती थी । 21 साल की उम्र में उन्होंने बोईंग 777 उड़ाना शुरू किया। दिव्या ये भी मानती हैं कि बिना अपने माता-पिता के सहयोग के वो यहां तक नहीं पहुंच पातीं। वो ये भी कहती हैं कि सौभाग्य से मेरे माता-पिता बहुत सहयोगी रहे हैं और बिना किसी की बात की परवाह किए मुझे हमेशा सपोर्ट किया। हवाई गर्ल के पिता आर्मी में थे और रिटायरमेंट के बाद विजयवाणा बस गए। पारिवारिक हालत ठीक न होने के बावजूद दिव्या ने अपने सपने को साकार कर दिखाया।

image


दिव्या ने केन्द्रीय विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। उनके जितने दोस्त थे वो अपने माता-पिता की सलाह पर इंजीनियर या डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन दिव्या हमेशा एक अलग रास्ता लेना चाहते थी।

दिव्या जब भी पायलट बनने की बात करती थीं तो सारे दोस्त उनका मजाक उड़ाते थे लेकिन उनके पैरेंटस की सोच सपोर्टिव और प्रोग्रेसिव थी। इसका फायदा उन्हें अपने करियर में तब मिला जब सबकी परवाह किए बिना उन्होंने पारंपरिक करियर के मार्गों को छोड़ दिया और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी में अपना नामांकन कर दिया। जब वो 17 साल की थी तब उन्होंने कड़ी मेहनत करके खुद के लिए एक छात्रवृत्ति कमाई और 19 साल की आयु में अपना प्रशिक्षण पूरा किया।

दिव्या एयर इंडिया में कार्यरत थीं और लंदन में उन्नत प्रशिक्षण पूरा करने से पहले ही उनको स्पेन में बोईंग 737 में उड़ान भरने का मौका मिला था। उनके पास 737 पर कमांड लेने का विकल्प था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बोईंग 777 को उड़ाने की चाहत रखने की वजह से ही उनको इंतजार करना पड़ा और ये वो ही चाहत है जिसे वो किसी भी हालत में पूरा करना चाहती थी।

दिव्या ने केन्द्रीय विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। उनके जितने दोस्त थे वो अपने माता-पिता की सलाह पर इंजीनियर या डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन दिव्या हमेशा एक अलग रास्ता लेना चाहते थी। एयर इंडिया के साथ काम करते हुए, दिव्या ने बीएससी विमान में डिग्री हासिल की और शास्त्रीय कुंजीपटल में एक कोर्स किया। अपने परिवार के भाग्य को बदलने के लिए अपने वेतन का इस्तेमाल किया। अपने भाई और बहन दोनों को विदेशों में पढ़ाई के लिए भेजा और अपने माता-पिता के लिए एक घर भी खरीदा। दिव्या का यही संदेश है कि सभी महिलाओं को अपने सपनों का पीछा करना चाहिए और उसे पाने के लिए हर संभव प्रयास करते रहना चाहिए।

देखिए दिव्या की कहानी उन्हीं की जुबानी,


ये भी पढ़ें,

रॉयल इनफील्ड से अकेले पूरा देश घूमने वाली सिंगल मदर मोक्षा जेटली

Add to
Shares
4.1k
Comments
Share This
Add to
Shares
4.1k
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags

Latest Stories

हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें