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'कल्पवृक्ष' ने नारियल की खेती करने वालों को दिया तकनीक का तोहफ़ा, लगातार बढ़ रहा उत्पादन

posted on 25th October 2018
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मैरिको लि. नाम की कंपनी द्वारा 'कल्पवृक्ष' मुहिम चलाई जा रही है। फ़िलहाल यह कार्यक्रम तमिलनाडु और केरल में चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य है, नारियल की खेती करने वाले किसानों को बेहतर से बेहतर उत्पादन दिलाने में सहयोग करना।

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तमिलनाडु में पानी की काफ़ी किल्लत है, जिसका बुरा असर नारियल की पैदावार पर पड़ता है। इस क्षेत्र के लिए ड्रिप इरिगेशन के साथ-साथ फ़र्टी-इरिगेशन का सुझाव दिया गया।

‘कल्पवृक्ष’ एक ऐसी मुहिम है, जिसके माध्यम से नारियल के उत्पादन से जुड़े किसानों को खेती से जुड़े प्रबंधन के तरीक़ों के बारे में बताया जा रहा है। इसके अंतर्गत किसानों को खेती की ज़मीन के रख-रखाव, पोषक तत्वों, कीटाणुओं और बीमारियों से बचाव और पानी के प्रबंधन आदि के संबंध में जरूरी जानकारियां दी जा रही हैं और पैदावार बढ़ाने में किसानों का सहयोग किया जा रहा है। इस मुहिम का नाम 'कल्पवृक्ष' इसलिए रखा गया है क्योंकि नारियल के पेड़ को कल्पवृक्ष भी कहा जाता है।

मैरिको लि. नाम की कंपनी द्वारा 'कल्पवृक्ष' मुहिम चलाई जा रही है। फ़िलहाल यह कार्यक्रम तमिलनाडु और केरल में चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य है, नारियल की खेती करने वाले किसानों को बेहतर से बेहतर उत्पादन दिलाने में सहयोग करना। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए आधुनिक तकनीक और खेती के क्षेत्र में नए प्रयोगों का सहारा लिया जा रहा है।

मैरिको के वरिष्ठ अधिकारी उदयराज प्रभु ने जानकारी दी कि 'कल्पवृक्ष' कार्यक्रम की शुरुआत एक साल पहले ही हुई है। उनका कहना है कि नारियल की खेती करने वाले किसान उनकी कंपनी के बिज़नेस का सबसे अहम हिस्सा हैं और उनका ख़्याल रखना कंपनी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत कंपनी की फ़ैक्ट्री को सेवरी (मुंबई) से दक्षिण भारत में शिफ़्ट करने के साथ हुई। कंपनी ने नारियल की पैदावार के लिए मशहूर दक्षिण भारत के तीन प्रमुख राज्यों में अपने प्लान्ट स्थापित किए। इसके बाद ही कंपनी ने विचार करना शुरू किया कि किस तरह से नारियल की खेती करने वाले किसानों की ज़िंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है।

प्रभु ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर कई विश्वविद्यालयों का दौरा किया और खेती के तरीक़ों पर रिसर्च की। इसके बाद टीम ने कई खेतों पर ये नुस्ख़े आज़माए और सुनिश्चित किया कि क्या इन तरकीबों के माध्यम से उत्पादन और गुणवत्ता में बड़ा अंतर पैदा किया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंतर्गत 6 कृषि विशेषज्ञों की टीम बनाई गई और इस टीम ने 125 किसानों के साथ मिलकर सिंचाई, बीच और पानी के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करना शुरू किया। एक ही साल में, विशेषज्ञों ने पाया कि उत्पादन में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इस शुरुआती सफलता के बाद तय किया गया कि कल्पवृक्ष को अब और किसानों और खेतों तक पहुंचाया जाएगा।

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प्रभु बताते हैं कि तमिलनाडु में पानी की काफ़ी किल्लत है, जिसका बुरा असर नारियल की पैदावार पर पड़ता है। इस क्षेत्र के लिए ड्रिप इरिगेशन के साथ-साथ फ़र्टी-इरिगेशन का सुझाव दिया गया। आपको बता दें कि ड्रिप इरिगेशन सिस्टम में पानी पर्याप्त मात्रा में धीरे-धीरे फ़सल की जड़ों तक पहुंचता है और इस सिस्टम की मदद से पानी के संरक्षण में काफ़ी मदद मिलती है। वहीं फ़र्टी-इरिगेशन सिस्टम के अंतर्गत पानी में घोलकर पोषक तत्वों को फ़सल तक पहुंचाया जाता है। प्रभु का मानना है कि आमतौर पर किसान इन तरीक़ों के बजाय सिंचाई के परंपरागत तरीक़े ही अपनाते हैं क्योंकि इनकी लागत अधिक होती है, लेकिन दूसरा पक्ष यह भी है कि इनसे पैदावार काफ़ी बेहतर होती है।

फ़िलहाल, कल्पवृक्ष कार्यक्रम से लगभग 100 गांवों के 3,500 किसान जुड़े हुए हैं। यह कार्यक्रम डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से भी किसानों को जोड़ रहा है और अभी तक इसने 1.3 लाख किसानों तक अपनी पहुंच बना ली है। शुरुआती चरण में ही उत्पादन में 18 प्रतिशत तक का इज़ाफ़ा दर्ज किया गया है।

किसानों तक कैसे पहुंच रहा है 'कल्पवृक्ष'?

प्रभु ने जानकारी दी कि किसानों तक बिना किसी रुकावट के जानकारी और सहयोग पहुंचता रहे, इसलिए कंपनी ने कल्पवृक्ष आईवीआर (इंटरैक्टिव वॉइस रेस्पॉन्स लाइन) की व्यवस्था की है और यह एक टोल-फ़्री सेवा है, जहां पर किसान विशेषज्ञों से अपनी किसी भी समस्या का हल पूछ सकते हैं। दूसरा प्रभावी माध्यम है, 'कल्पवृक्ष' का ऐप। इस ऐप पर किसान रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं और अपने इसके लिए उन्हें सिर्फ़ अपना नाम, खेत का पता और टेलिफ़ोन नंबर उपलब्ध कराना होता है। रजिस्ट्रेशन के बाद किसान अपने मतलब की जानकारी इस ऐप पर पा सकते हैं।

इतना ही नहीं मैरिको की टीम खेतों का दौरा भी करती है और किसानों को इकट्ठा कर उनके बातचीत भी करती है। विज़ुअल ऐड और फ़िल्मों के माध्यम से किसानों को पेस्ट कंट्रोल और न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट आदि की जानकारी दी जाती है।

प्रभु ने बताया कि फ़िलहाल उनका लक्ष्य सिर्फ़ किसानों को मुफ़्त में उपयोगी जानकारियां उपलब्ध कराना है। कल्पवृक्ष अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की योजना पर भी काम कर रहा है। मैरिको की योजना है कि एक विश्वविद्यालय की शुरुआत की जाए, जहां पर नारियल की खेती करने वाले किसानों को प्रशिक्षण दिया जाए और उन्हें अपने क्षेत्र में रिसर्च करने का भी पूरा मौक़ा और संसाधन मिल सकें।

यह भी पढ़ें: अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने 67 वर्षीय किसान निकला 100 दिन के सफर पर

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