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भारतीय ऐप 'मेडकार्ड्स' दुनिया के टॉप-10 स्टार्टअप्स में हुआ शामिल

मेडकार्ड्स भारत का पहला ऐसा ऐप है, जहां डॉक्टर, मरीज, लैब व मेडिकल स्टोर एक साथ मिलेंगे। ये ऐप आपकी दवाओं के परचे और रिपोर्ट्स को भी रखेगा सुरक्षित। 

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9th May 2017
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आपके घर में किसी प्रियजन या खुद आपका मेडिकल ट्रीटमेंट चल रहा हो और आपको पोथा भर के रिपोर्ट्स, प्रिस्क्रिप्शंस संभाल कर रखने हों तो कितनी ज्यादा मुश्किलें आती हैं। बाकायदा एक फोल्डर बनाना पड़ता है और हर एक कागज को एहतियात से रखना पड़ता है। अगर इन कागजों से में से एक भी गुम हो जाए तो उससे इलाज में कितनी दिक्कतें आती हैं, इससे आप वाकिफ ही होंगे। लेकिन अब आपको एक-एक कागज का फोल्डर बनाने की जरूरत नहीं है। दवाओं का प्रिस्क्रिप्शन और रिपोर्ट का रिकॉर्ड रखने के लिए एक ऐसा ऐप बनाया गया है, जिसका नाम है- मेडकार्ड्स ऐप, जहां आपके सभी डॉक्टरी कागज़ात रहेंगे सुरक्षित...

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मेडकार्ड्स ऐप को दुनिया के टॉप-10 स्टार्टअप में शामिल किया गया है। अमेरिका के न्यू ऑरलियंस में आयोजित फास्टेस्ट ग्रोइंग टीच कांफ्रेंस में इसका चयन हुआ है।

अमेरिका के न्यू ऑरलियंस में आयोजित फास्टेस्ट ग्रोइंग टीच कांफ्रेंस में विभिन्न देशों से करीब एक लाख स्टार्टअप्स के आवेदन आए थे और चुना सिर्फ 10 ही जाना था। उन 10 चुनिंदा स्टार्टअप्स में भारत का मेडकार्ड्स ऐप भी है। मेडकार्ड्स भारत का पहला ऐसा ऐप है, जहां डॉक्टर, मरीज, लैब व मेडिकल स्टोर एक साथ मिलेंगे। इसे कोटा के 4 युवाओं श्रेयांश मेहता, निखिल बाहेती तथा उनके दोस्त सायदा धनावथमुदित जैन ने बनाया है। डॉक्टर, मरीज, लैब व मेडिकल स्टोर को एक साथ लाने वाला भारत का ये पहला ऐप है, जिसकी शुरुआत कोटा की भीमगंजमंडी डिस्पेंसरी से होगी और इसे 5 साल में 5 करोड़ मरीजों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

मेडकार्ड्स ऐप के माध्यम से चिकित्सकों द्वारा दिए जाने वाला प्रिसक्रिप्शन, रिपोर्ट व दवाईयां एक ही स्थान पर आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। ऐप तैयार करने वाले श्रेयांश मेहता का कहना है, कि 'पांच वर्ष में पांच करोड़ मरीजों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।' ऐप तैयार करने की सोच उस समय उनके दिमाग में आई जब एक बार वे अपने पिता के साथ भवानी मंडी चिकित्सालय स्वास्थ्य परीक्षण कराने गए। साथ में पुरानी पर्ची न ले जाने से चिकित्सक ने उन्हें पूरा रिकॉर्ड लाने के लिए कहा। काफी मुश्किल के बाद पिता का इलाज शुरू हो सका। इसके बाद ही उन्होंने मेडकार्ड्स ऐप बनाने का निर्णय लिया।

क्या खास होगा मेडकार्ड्स ऐप में

मेडकार्ड्स ऐप में 2 तरह की व्यवस्था है। एक शहरी मरीजों के लिए जो स्मार्टफोन यूज करते हैं और दूसरा ग्रामीण मरीजों के लिए जो साधारण मोबाइल यूज करते हैं। ऐप पर रजिस्ट्रेशन के बाद पर्चे की फोटो खींचकर डालनी होगी। रजिस्ट्रेशन मोबाइल नंबर के आधार पर होगा।

इस ऐप की मदद से अस्पताल में डॉक्टर्स द्वारा मरीजों को दिया जाने वाला प्रिसक्रिप्शन, रिपोर्ट्स, जांच लैब्स, मेडिकल स्टोर एक साथ एक ही जगह आसानी से उपलब्ध होगी। इस ऐप के जरिए मरीज का मेडिकल रिकॉर्ड हमेशा सुरक्षित रहेगा। अनुमान लगाया गया है, कि देशभर के लगभग 10 लाख मेडिकल स्टोर्स को इस ऐप के जरिए जोड़ा जायेगा वहीं इस ऐप के जरिए 5 साल के भीतर 5 करोड़ मरीजों को भी जोड़े जाने का लक्ष्य है। इस ऐप में 2 तरह की व्यवस्था है। एक शहरी मरीजों के लिए जो स्मार्टफोन यूज करते हैं और दूसरा ग्रामीण मरीजों के लिए जो साधारण मोबाइल यूज करते हैं। ऐप पर रजिस्ट्रेशन के बाद पर्चे की फोटो खींचकर डालना होगा। रजिस्ट्रेशन मोबाइल नंबर के आधार पर होगा। इसमें उस डॉक्टर का नाम भी जोड़ा जाएगा, जिसका इलाज चल रहा है। जरूरत पड़ने पर मरीज और डॉक्टर रिपोर्ट देख सकते हैं। यदि मरीज का मोबाइल साधारण है, तो केवल डॉक्टर के मोबाइल पर ही डिटेल दिखेगी।

ऐप में मरीज का मोबाइल नंबर डालते ही डॉक्टर के मोबाइल पर उसकी पूरी हिस्ट्री आ जाएगी। डिस्पेंसरी पर बाकायदा टेक्निकल एक्सपर्ट बैठेंगे, जो लोगों को ऐप के बारे में जानकारी देंगे। इस ऐप पर पर्चों और रिपोर्ट्स की फोटो डालने से रिकॉर्ड हमेशा के लिए सुरक्षित हो जायेगा। इसमें प्राइवेसी का भी ध्यान रखा गया है। मेडिकल रिपोर्ट केवल इलाज करने वाले डाक्टर या मरीज के ही मोबाइल पर खुलेगी।

इस ऐप को तैयार करने के पीछे श्रेयांश मेहता, निखिल बाहेती तथा उनके दोस्त सायदा धनावथ व मुदित जैन को कोटा के भीमगंज मंडी से प्रेरणा मिली है। 9 मई के बाद कोटो की भीमगंज डिस्पेंसरी भारत की पहली ऑनलाइन रिकार्ड वाली डिस्पेंसरी बन जायेगी।

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