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मुश्किल को मात देकर 'अदिति' ने भरी सपनों की उड़ान, बनाया ‘EngineerBabu’

‘EngineerBabu’ की सह-संस्थापक हैं अदिति...IT से जुड़ी है ‘EngineerBabu’...‘EngineerBabu’ के दुनिया भर में 500 ग्राहक ...

Harish Bisht
21st Aug 2015
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जब कोई अदिति चौरसिया से ये कहता है कि वो लड़की हैं इसलिए वो ये काम नहीं सकती तब अदिति उस काम को करना तब तक नहीं छोड़ती जब तक की उसे वो पूरा ना कर ले। अदिति चौरसिया सह-संस्थापक हैं ‘EngineerBabu’ की। ये एक आईटी से जुड़ी कंपनी है जो डिजाइन से लेकर उसके रखरखाव का सारा काम करती है। ये कंपनी एनरॉयड और आईओएस ऐप के विकास, वेब डिजाइन का काम करती है। अदिति का जन्म खुजराहो के एक छोटे से गांव गढ़ी मलेहरा में हुआ था जहां पर महिलाओं की कोई खास पहचान नहीं है। लेकिन अदिति के सपने तो आसमान से भी ऊंचे थे इसके लिए उनकी दादी ने उनको प्रोत्साहित किया। अंग्रेजी स्कूल में पढ़ने के लिए वो हर रोज अपने घर से 18 किलोमीटर दूर जाती थी। वो अपने स्कूल स्थानीय बस से ही आती जाती थी। अंग्रेजी स्कूल में पढ़ने के कारण धीरे धीरे उनके आसपास के लोग उनके चरित्र पर ही ऊंगली उठाने लग गये थे।

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स्कूल के शुरूआती दिनों में ही अदिति की दुनिया बदल गई थी। जब वो पांचवी क्लास में थी उनकी पहली डिवीजन आई थी जबकि उनके एक दोस्त का पहला रैंक आया था। तब अदिति इन दोनों चीजों में अंतर करना नहीं जानती थी। तो वो अपने उस दोस्त के पास गई और पहले उसको मुबारकबाद दी और उसके बाद उससे कहा कि वो भी पहली डिवीजन से पास हुई हैं तब उनके दोस्त ने उनसे कहा कि तुम सिर्फ पहली डिवीजन से पास हुई हो जिसका कोई मतलब नहीं है। बस यहीं से अदिति की जिंदगी बदल गई। अदिति को विश्वास हो गया कि अगर कोई फैसला कर ले कि उसे कोई काम करना है और उस काम को लेकर उसका जुनून सच्चा है तो वो काम होकर ही रहेगा।

अदिति का कहना है कि हर इंसान के दिमाग की क्षमता एकसमान होती है बस जरूरत होती है उसके इस्तेमाल और जुनून में बदलने की। उन्होने कड़ी मेहनत शुरू कर दी और पढ़ाई के साथ साथ दूसरी गतिविधियों में अपना ध्यान लगाना शुरू कर दिया। वो ऐसा कुछ करना चाहती थी जिसे दूसरे ना कर सकें। इसके लिए उन्होने कविताएं लिखना शुरू कर दिया। जब लोगों ने उनसे कहा कि वो पीएमटी की परीक्षाएं पास नहीं कर सकती क्योंकि वो गणित और भौतिकशास्त्र में कमजोर हैं तो उन्होने इन विषयों में इतनी मेहनत की कि उन्होने सबसे ज्यादा अंक हासिल किये। अदिति पॉयलट बनाना चाहती थीं लेकिन परिवार की वित्तीय दिक्कतों के कारण उनका ये अरमान पूरा नहीं हो सका। लेकिन उन्होने अपने सपनों को मरने नहीं दिया बल्कि उनको एक नई दिशा दी। जब वो छठी कक्षा में थी तो उनके छोटे भाई ने जन्म लिया। वो थोड़ा मानसिक रूप से बीमार था और डॉक्टर उसका ठीक से इलाज नहीं कर पाए और जब अदिति 10वीं क्लास में थी तो उनके भाई का निधन हो गया।

भाई की मौत से अदिति को गहरा सदमा लगा। तब उन्होने फैसला लिया कि वो दूसरे बच्चों को बचाने के लिए न्यूरो सर्जन बनेंगी और स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होने लगातार तीन साल डॉक्टर बनने के लिए कोशिश की लेकिन उनको कहीं प्रवेश नहीं मिला। इससे वो काफी निराश हुई तब कविताएं ही उनका एकमात्र सहारा बनी, जिन्होने उनको हिम्मत दी। साल 2009 में कैट की तैयारियों के दौरान उनकी मुलाकात मयंक से हुई जो बाद में उनका बहुत अच्छा दोस्त भी बना। मयंक ने अदिति के दुखों को समझा और उनको उस हालात से बाहर निकालने की कोशिश की। अदिति ने महसूस किया कि उनके और भी सपने हैं तो क्यों ना उनको पूरा करने के लिए आगे बढ़ा जाए। साल 2013 में एमबीए करने के दौरान उन्होने तितलियां क्रिएशन के तहत हैंडमेड कार्ड बनाने शुरू किए और इस काम में उनको मुनाफा भी हुआ तब उन्होने सोचा की एमबीए की पढ़ाई के बाद वो इस काम को और बढ़ाएंगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका क्योंकि एमबीए करने के बाद अदिति के परिवार वाले उन पर नौकरी करने या घर लौटने का दबाव डालने लगे। तब अदिति के पास नौकरी ढूंढने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।

‘EngineerBabu’ की शुरूआत पिछले साल दो लोगों ने मिलकर की थी। तब अदिति इंदौर के एक मैनेजमेंट संस्थान में पढ़ाने का काम कर रही थीं। ताकि वो परिवार वालों के शादी और नौकरी के दबाव को झेल सके। अदिति ने अपने इस काम की जानकारी किसी को नहीं दी और वो चुपचाप अपने काम को अंजाम तक पहुंचाने में लगी रहीं। उनकी मेहनत रंग लाई और दो लोगों से शुरू हुई उनकी कंपनी में साल भर के भीतर 50 लोग काम करने लगे। शुरूआत में अदिति ने पढ़ाई का काम जारी रखा लेकिन जब उनकी कंपनी दुनिया भर में 500 ग्राहकों के साथ काम करने वाली बन गई तो उनको नौकरी छोड़नी पड़ी। ‘EngineerBabu’ के दूसरे सह-संस्थापक मयंक हैं। अदिति का मानना है कि अगर कर्मचारी खुश हों, ग्राहक खुश हो और कठिन मेहनत की जाए तो लक्ष्य पाना मुश्किल नहीं होता। आज अदिति इस बात को लेकर खुश है कि वो इस काबिल बन सकीं है कि वो दूसरों को नौकरी दे सकें।

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अदिति का कहना है कि शुरूआत में कई रातें उन्होने रो-रो कर गुजारी हैं लेकिन धीरे धीरे उम्मीदों के सहारे वो उस मुश्किल समय से बाहर आ सकीं। अदिति अपनी दादी को सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत मानती हैं। उनके अलावा वो क्रिस्टोफर कोलंबस और अब्दुल कलाम की किताब ‘विंग्स ऑफ फायर’ से प्रेरणा लेती हैं। अदिति का मानना है कि इन किताबों के पढ़ने से उनको चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है।

एक महिला होने के नाते अदिति का मानना है कि जिस दिन दुनिया का महिलाओं को लेकर नजरिया बदलेगा वो उनकी जिंदगी का सबसे अच्छा दिन होगा। अदिति को डांस खासतौर से वेस्टर्न और हिप हॉप और नये लोगों से मिलना काफी पसंद है। भविष्य में उनकी योजना दुनिया घुमने की है। अदिति अपने गृह-नगर में महिलाओं को आगे लाने के लिए काफी कुछ करना चाहती हैं वो चाहती हैं कि वहां भी महिलाओं को पढ़ाई और काम करने के पुरूषों के बराबर मौके मिले। अपने भविष्य से बारे में वो एक कविता के जरिये अपने भाव प्रकट करती हैं।

तारों की चमक फीकी पड़ जाये, उस नूर की तलाश है, वक्त भी मेरे पीछे आए, उस गुरूर की तलाश है, इरादों की चमक रोशन है, मगर वो मंजिल मेरे लिये पलकें बिछाए बस, उस एक दिन की तलाश है।

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