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बच्चों की ‘वानर सेना’ ने इंदौर में सीटी बजाकर रोकी खुले में शौच की प्रवृत्ति, 4 गांव को किया खुले में शौच से मुक्त

23rd Jan 2016
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इंदौर के चार गांव को बच्चों की वानर सेना ने में खुले में शौच से मुक्त कर दिया...

पांच से बारह साल के बच्चों ने इस काम में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका...

पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन ने इस कदम के लिए प्रेरित किया...


प्रधानमंत्री नरेंद्र ने जो स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया है उसको देशवासी अलग-अलग तरीके से अमल में ला रहे हैं और दूसरों को स्वच्छ रहने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। हर किसी को स्वच्छ रहना है और हर किसी को अपने आस पास में इसके लिए जागरूकता फैलानी है। ज़ाहिर है यह एक मिशन है इसलिए उम्र आड़े नहीं आती। ‘रामायण’ में वानर सेना के कारनामे खूब मशहूर हैं। लेकिन मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में करीब 10,000 बच्चों की वानर सेना के मायने अलग हैं और इन नौनिहालों ने गांवों में खुले में शौच की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक लगाने के मुहिम में अनोखी भूमिका निभायी है।

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इंदौर के जिलाधिकारी पी. नरहरि ने देपालपुर क्षेत्र में खुले में शौच से मुक्त हुए चार गांवों के निरीक्षण के बाद योर स्टोरी को बताया,

‘खुले में शौच से मुक्ति के अभियान में पांच से लेकर 12 वर्ष की उम्र के करीब 10,000 बच्चों की टोलियों का अहम योगदान रहा है। हमने इन टोलियों में शामिल बच्चों की नटखट हरकतों के चलते इन्हें 'वानर सेना' का नाम दिया है। इन बच्चों ने जिले के हर गांव में 20 से 30 बच्चों की टोलियां बनाकर इन्हें ‘वानर सेना’ से जोड़ा। फिर गांवों में उन स्थानों की पहचान की, जहां लोग खुले में शौच के लिये जाते थे। इन स्थानों की ओर जाने वाले रास्तों पर बच्चों की टोलियों को तैनात हो गईं। जब इन बच्चों ने खुले में शौच के लिये जा रहे लोगों के सामने बार-बार सीटी बजायी, तो इन लोगों ने शर्मिंदगी महसूस की और पक्के शौचालयों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। 

जिलाधिकारी पी. नरहरि ने बताया, ‘वानर सेना में शामिल कुछ नटखट बच्चे ऐसे भी थे, जो खुले में शौच के लिये जा रहे लोगों के हाथ से मग या डिब्बे छीनकर इनका पानी नीचे गिरा देते थे। इससे इन लोगों को उल्टे पैर घर लौटना पड़ता था।’ उन्होंने बताया कि जिले की 312 ग्राम पंचायतों के 610 गांवों के लगभग सभी घरों में पक्के शौचालयों का इस्तेमाल शुरू हो चुका है।

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पहले तो खुले में शौच करने वाले लोगों को वानर सेना की हरकतें अजीब लगती थीं। लेकिन जब उन्हें समझ में आया कि दरअसल ये बच्चे लोगों के स्वास्थ्य के लिए ही ऐसा कर रहे हैं, तब उन्हें समझ में आने लगा कि ऐसा करना गलत है। धीरे-धीरे खुले में शौच करने वाले लोगों ने इसे चलन में लाना शुरू किया। और आज आलम यह है कि जल्द ही पूरे इंदौर को खुले में शौच की प्रवृत्ति पर अंकुश लगने लगा है और जल्द ही इसे पूरी तरह मुक्त जिला घोषित किया जायेगा।

खुले में शौच के लिए जब लोगों को वानर सेना ने सीटी बजाकर रोकने का काम किया तो लोगों ने इनसे एक सवाल किया कि आखिर वो शौच के लिए कहां जाएं? घर में शौचालय तो है नहीं। इस मौके पर ज़िला प्रशासन सामने आता और उन परिवारों को अनुदान देने का काम करता। लोगों को अनुदान मिलने लगा और ज़िला प्रशासन के साथ मिलकर चलाए जा रहे वानर सेना की मुहिम रंग लाने लगी। देखते ही देखते पिछले चार महीने में ज़िले में 25000 से अधिक शौचालय बनवाए गए हैं जबकि 15000 शौचालय अन्य संसाधनों से बनवाये गए हैं। 

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कहते हैं देर-सबेर लोगों को समझ में चीज़ें आती हैं पर उसके लिए ज़रूरी है उन्हें उनके हिसाब से समझाना, रोकना और उसके साथ ही एक विकल्प भी देना। इंदौर में वानर सेना की सीटी जब खुले में शौच करने वालों को रोक सकती है तो तय मानिए देश में भी स्वच्छता अभियान के लिए उठाए जा रहे कदम कारगर साबित होंगे। और स्वच्छ भारत का सपना जरूर पूरा होगा।

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