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खाना बाहर का और स्वाद घर का, 'Curry in a Hurry'

गुडगाँव की Curry in a Hurry सेवा करती है घर जैसे पौष्टिक भोजन का वादा

Ratn Nautiyal
9th Jul 2015
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घर से बाहर रहते हुए अच्छा, स्वच्छ और वाजिब खाना खोज पाना एक विशाल कार्य है। जब काम के बोझ से सर पर ढेर सारा तनाव लदा होता है तो ऐसे में अच्छा खाना खा पाने का मामला और भी मुश्किल हो जाता है। झट-पट खाने की खोज में होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए, मैं पिछले कुछ महीनों से भूमिगत रास्तों पर सैंडविचेज खा रहा हूँ।

Curry in a Hurry की सह संस्थापक मीरा झाला भोजन को ईंधन मानते हुए कहती है “खाना मानव शरीर का ईंधन है, यह देख के निराशा होती है कि हमारे आस-पास स्वास्थ्य के लिए खराब खाना बड़ी मात्रा में मिल रहा है।”

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Curry in a Hurry क्या है??

Curry in a Hurry गुडगाँव से चालित भारतीय थाली को घर तक पहुंचाने वाली विक्रेता सेवा है। यह सेवा इंस्टिट्यूट ऑफ़ होटल मैनेजमेंट औरंगाबाद से स्तानक हुई दो दोस्त मीरा और मेघना जसवाल ने शुरू की। दोनों के पास बीस साल का अंतर्राष्ट्रीय अनुभव है। Curry in a Hurry दोनों का साथ में दूसरा उद्यम है। द अर्बन किचन के नाम से दोनों, बड़े कॉर्पोरेट ऑफिसों में ताजा भोजन उपलब्ध कराती हैं।

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निष्ठा??

Curry in a Hurry की शुरुआत छोटे दफ्तरों और लोगों की व्यतिगत मांग पर हुई। दो साल में उन्होंने ग्राहक और लोकप्रियता में बढ़त दर्ज की है। मीरा बताती है “हम खाने की गुणवत्ता और ग्राहक की संतुष्टि पर दिल से मेहनत करते हैं। उच्च गुणवत्ता की सामग्री और पौष्टिक भोजन हमारी सफलता की कुंजी है।” भोजन री-हीटेबल और स्पील-प्रूफ पैकेजिंग में आता है और खाने का मेनू स्थानीय मौसम को देखकर तय किया जाता है।

प्रक्रिया??

इन दोनों की जोड़ी अभी हर दिन 250 से ज्यादा ऑर्डर संभालती हैं। अभी इन्होंने गुडगाँव के छोटे से क्षेत्र से शुरू किया है लेकिन जल्द ही ये एनसीआर में विस्तार करने की योजना बना रही हैं। मीरा कहती है “Curry in a Hurry के पीछे लक्ष्य कम दाम में अच्छा पौष्टिक लंच लोगों तक पहुँचाना था। हमने व्यवस्थित और सही प्रक्रिया को आगे बढाने की सोच रखी है। अपनी पेशकश पर खरा साबित होना और गुणवत्ता में निरंतरता बनाए रखना, ग्राहकों को बनाये रखने का राज है। Curry in a Hurry इलाके के झट-पट सेवा देने वाले रेस्तरां से प्रतियोगिता कर रहा है। जबकि उनके भोजन की विभिन्नता और ताजगी को लेकर किये जाने वादे पर संदेह बना रहता है।

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सीएसार

मीरा कहती है “हम ‘गिविंग बैक टू दि कम्युनिटी प्रोग्राम’ से जुड़े हुए हैं। जिसके तहत हम बच गए खाने को आस पास के जरूरतमंदों को दे देते हैं।” मीरा दावा करती है “हमने निरंतर अच्छी सेवा दी है, जिसने स्वाभाविक रूप से मुंहजुबानी हमारा प्रचार किया है। हमें गर्व है कि हमारा सौ प्रतिशत रिपीट बिजनेस है।

चुनौतियां

मीरा के अनुसार उनकी सबसे बड़ी चुनौती कुशल और योग्य कर्मचारियों का मिलना है। मानव संसाधन का मैनेजमेंट इस इंडस्ट्री में बहुत महत्वपूर्ण है। मीरा यह बात जोडती है कि हमने सम्मान और अनुशासन का माहौल बनाकर इस मुद्दे को संभाला है। यह युवा संस्था जल्दी ही ऑर्डर के लिए ऑनलाइन एप्प लाने वाली है। जोड़ी अपना हर फैसला भौगोलिक और आंकड़ों को बढाने पर लेती है।


मीरा अंत में हमें बताती हैं “कुछ प्राइवेट संस्थाओं ने हमारे कार्य में रूचि दिखाई है और उन्होंने हमसे सम्पर्क भी किया है।”

कृपया अपना कमेन्ट नीचे दें।

यह कहानी “F&bB Entrepreneures” की एक कड़ी है, जिसके प्रस्तुतकर्ता हैं ‘Chilli Paneer- A DBS Production.’

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