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यात्रियों को स्वादिष्ट भोजन कराएगा 'ट्रेवल जायका'

- खराब भोजन ने दिया एक नया आइडिया। - ट्रेवल जायका यात्रियों को पहुंचा रहा है पौष्टिक व स्वादिष्ट भोजन। - अब विस्तार की योजना पर काम कर रहा है ट्रेवल जायका।

1st Jun 2015
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यात्राओं का इंसान के जीवन में बहुत महत्व होता है। यात्राओं से इंसान कई बार कुछ ऐसी बातें भी सीखता है जो वह अन्य किसी माध्यम से नहीं सीख पाता। ऐसी ही एक यात्रा ने पंकज चंदोला को एक ऐसा विचार दिया जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था।

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पंकज चंदोला एक बार गोआ से जयपुर तक का रास्ता ट्रेन से तय कर रहे थे। यात्रा के दौरान जब उन्होंने अपने लिए खाना ऑडर किया तो खाने के स्वाद और उसकी गुणवत्ता बहुत खराब थी। जब उन्होंने यह बात अपने साथ सफर कर रहे अपने दोस्त को कही तो उसने भी कहा कि हां सच में खाना खाने लायक नहीं है। बेशक यह रेल के सफर के दौरान घटने वाली आम बात हो गई है चूंकि ट्रेन में किस प्रकार का खाना परोसा जाता है इससे हम सभी अच्छी तरह वाकिफ हैं लेकिन इस घटना ने पंकज को एक छोटी सी रिसर्च करने के लिए प्रोत्साहित किया। अब पंकज यह जानना चाहते थे कि ट्रेन के खाने की क्वालिटी और लोगों की इस खाने के बारे में क्या राय है। उन्होंने पाया कि काफी यात्री खाने की क्वालिटी से संतुष्ट नहीं हैं। साथ ही जो डिलीवरी स्टाफ ट्रेन में होता है आमतौर पर उसका व्यवहार भी यात्रियों के साथ ठीक नहीं होता। ऐसे में यात्रियों के पास कुछ खास विकल्प नहीं होते जिससे वे सफर में कुछ अच्छा खा सकें।

बस, फिर क्या था उनके दिमाग में ट्रेन में यात्रा करने वाले मुसाफिरों को अच्छा खाना उपलब्ध कराने का विचार कौंधने लगा। और इस विचार से जन्म हुआ ट्रैवल जायका का। ट्रैवल यानी यात्रा और जायका मतलब स्वाद। अर्थात यात्रा कर रहे यात्रियों को स्वादिष्ट व अच्छा खाना उपलब्ध कराना। इसके बाद पंकज चंदोला, करण और रजत गोयल इन तीनों दोस्तों ने मिलकर ट्रैवल जायका नाम से एक वेबसाइट खोली जिसके माध्यम से यात्रियों के लिए अच्छे भोजन की व्यवस्था की जाती है।

करण

करण


पंकज चंदोला एक मैनेजमेंट ग्रेजुएट हैं जिन्हें मार्किंटिंग और सेल्स में महारथ हासिल है और साथ ही उन्हें आईटी क्षेत्र में सात साल से अधिक काम करने का अनुभव भी है। टीम के दूसरे सदस्य करण, ट्रैवल जायका के सहसंस्थापक हैं। उनके पास पांच साल का ट्रेडिंग का अनुभव है। डॉ. रजत गोयल कंपनी के तीसरे सहसंस्थापक होने के साथ-साथ कंपनी के सीओओ भी हैं। इन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा ली और इन्हें ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट और कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट के क्षेत्र में काफी अनुभव है।

ट्रैवल जायका की नीव अक्तूबर 2014 में रखी गई। जयपुर में इनकी आठ लोगों की टीम है। इसके अलावा गाजियाबाद में इनकी मार्किटिंग टीम काम करती है। कंपनी ने शुरुआत में उन स्टेशन को काम के लिए चुना जहां लोगों की भीड़ काफी ज्यादा रहती है। कंपनी स्टेशन से दस से पंद्रह किलोमीटर दूर के वेंडर्स के पास गई और उनके खाने की क्वालिटी चेक की। साथ ही मेन्यू लिस्ट भी देखी और इस तरह कंपनी ने वेंडर्स का चुनाव किया। आज कंपनी के पास पचास वेंडर हैं जोकि प्रतिदिन के हिसाब से पचास से साठ ऑडर ले रहे हैं। कंपनी को सबसे ज्यादा ऑडर मथुरा, अलीगढ़, नई दिल्ली, जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, रतलाम, भोपाल, सूरत, बडोदरा, अहमदाबाद, पुणे और नासिक से मिल रहे हैं।

पंकज चंदोला

पंकज चंदोला


इस सेवा को अनुभव लेने के लिए एक कस्टमर को सबसे पहले ट्रेवल जायका की वेबसाइट पर जाना होता है। ट्रेन का पीएनआर नम्बर या फिर ट्रेन नम्बर लिखना होता है। साथ ही कुछ अन्य जानकारी देनी होती हैं। उसके बाद एक मेन्यू लिस्ट सामने आती है जिसमें हर छोटी बड़ी डिटेल दी गई होती है। आपको वहां अपने लिए भोजन चुनने के बाद ऑनलाइन पेमेंट करनी होती है या फिर अगर आप कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प चुनना चाहते हैं तो वह भी चुन सकते हैं। उसके बाद यात्री द्वारा निश्चित किए गए समय पर उसके पास भोजन पहुंच जाता है।

अपने छोटे से सफर में अभी तक ट्रैवल जायका को बेशक कोई बड़ा मुनाफा मिलना अभी शुरु नहीं हुआ। कंपनी ने इस काम में जितना पैसा लगाया है वह अभी उतना ही कमा रही है लेकिन इतने कम समय में ही ट्रेवल जायका को काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने लगी हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि कुल बुकिंग में से इस समय लगभग 15 प्रतिशत ऑडर इन्हें उन यात्रियों से मिल रहे हैं जो इनकी सर्विसेज को पहले भी चुन चुके हैं। यानी अब तक जो लोग इनके पास आए वे इनकी सेवाओं से संतुष्ट रहे हैं। यह इनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

कंपनी चाहती है कि अब और छोटे इंवेस्टर भी उनके इस काम में पैसा लगाएं। शुरुआती दिनों में इन लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। जिसमें सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही थी वेंडरों से तालमेल बनाने में। लोगों को ट्रैवल जायके के बारे में बताना भी आसान नहीं था। वेंडरों के साथ पैसों को लेकर तालमेल बिठाना भी आसान नहीं था लेकिन इन सब कामों से उन्होंने बहुत कुछ सीखा। ट्रैवल जायका आने वाले समय में अपना विस्तार करना चाहता है। अब यह लोग केवल ट्रेन ही नहीं बल्कि बस यात्रियों के लिए भी खाना उपलब्ध करना चाहते हैं। साथ ही भारत के हर कोने में अपनी पहुंच बनाना चाहते हैं। जिस मेहनत, लगन और ईमानदारी से यह लोग काम कर रहे हैं उससे उम्मीद है कि जल्दी ही टीम अपना यह लक्ष्य भी पूरा कर लेगी।

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