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रॉयल इनफील्ड से अकेले पूरा देश घूमने वाली सिंगल मदर मोक्षा जेटली

1st Aug 2017
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55 साल की मोक्ष जेटली अांत्रेप्रेन्योर बनने की अपनी यात्रा के जरिए समाज के तमाम स्टीरियोटाइप्स को तोड़ रही हैं। उन्होंने BacknBeyond नाम से एक वेंचर की स्थापना की है जो पूरे देश में बाइक टूर को ऑर्गेनाइज करता है। इसके साथ ही वह कई सारे सामाजिक मुद्दों पर भी दखल देती रहती हैं। मोक्षा सिंगल मदर हैं और वह रॉयल इनफील्ड की सवारी करती हैं। उनका नाम 'लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में भी दर्ज है।

मोक्षा जेटली अांत्रेप्रेन्योर बनने की अपनी यात्रा के जरिए तोड़ रही हैं समाज के तमाम स्टीरियोटाइप्स।

मोक्षा जेटली अांत्रेप्रेन्योर बनने की अपनी यात्रा के जरिए तोड़ रही हैं समाज के तमाम स्टीरियोटाइप्स।


अकेले रॉयल इनफील्ड से पूरा देश घूमती हैं 55 साल की सिंगल मदर मोक्षा जेटली।

मोक्षा जब काफी कम उम्र की थीं तभी उनकी शादी हो गई थी। शादी के एक साल बाद ही उनकी बेटी भी हो गई। मां बनने के साथ ही उन्हें हर रोज एक नया चैलेंज फेस करना पड़ता था। एक तरफ इतनी कम कम उम्र में मां बन जाना और उसके बाद बेटी पैदा हो जाने के की वजह से उनके घरवालों के ताने। उनके लिए ज़िंदगी उतनी भी आसान नहीं थी, जितनी की हुआ करती है।

55 साल की मोक्षा जेटली अांत्रेप्रेन्योर बनने की अपनी यात्रा के जरिए समाज के तमाम स्टीरियोटाइप्स को तोड़ रही हैं। उन्होंने BacknBeyond नाम से एक वेंचर की स्थापना की है जो पूरे देश में बाइक टूर को ऑर्गेनाइज करता है। इसके साथ ही वह कई सारे सामाजिक मुद्दों पर भी दखल देती रहती हैं। मोक्षा सिंगल मदर हैं और वह रॉयल इनफील्ड की सवारी करती हैं। उन्होंने रिकॉर्ड टाइम में लेह से मनाली पहुंचकर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया है। वह समाज में महिलाओं के सशक्तिकरण और बेटी बचाओ जैसे अभियान से काफी जुड़ाव महसूस करती हैं।

मोक्षा पंजाब के होशियारपुर की रहने वाली हैं। जब वह काफी कम उम्र की थीं तभी उनकी शादी हो गई थी। 1984 में शादी करने के एक साल बाद ही उनकी बेटी भी हो गई। मां बनने के साथ ही उन्हें हर रोज एक नया चैलेंज फेस करना पड़ रहा था। एक तरफ इतनी कम कम उम्र में मां बन जाना और उसके बाद बेटी पैदा हो जाने के की वजह से उन्हें ससुराल वालों की तरफ से ताने सुनने पड़ रहे थे। उनकी सास दरअसल बेटे की चाहत रखती थीं और बेटी होने की वजह से वे काफी नाखुश थीं और इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा । एक रात तो मोक्षा और उनकी छोटी मासूम बेटी को प्रताड़ना का भी शिकार होना पड़ा। इससे तंग आकर मोक्षा ने अपने घर वापस जाने का निर्णय कर लिया। उन्होंने देखा कि उनके पति भी उनकी मदद करने की बजाय अपनी मां का साथ दे रहे हैं।

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अकेले दम पर अपनी जिंदगी चलाने और बेटी की परवरिश करने को लेकर मोक्षा खुद को काफी गौरान्वित महसूस करती थीं। जब वह अपनी कहानी लोगों को बताती हैं तो उनका मकसद सहानुभूति बटोरना नहीं होता बल्कि वह चाहती हैं कि जैसे उन्होंने अपनी बेटी की परवरिश की है वैसे ही कोई भी औरत चाहे तो अपने दम पर एक मुकाम हासिल कर सकती है।

शादी और बेटी होने के बाद अपने माता-पिता के घर में जाकर रहना भी ठीक नहीं लग रहा था इसलिए वह चंडीगढ़ आ गईं और यहां एक परिवार में ड्राइवर की नौकरी कर ली। इसके बाद वह होटल में भी काम करने लगीं। यह आज की दौर की बात नहीं थी। 80 और 90 का दशक महिलाओं के काम करने को लेकर इतना सहज नहीं था इसलिए मोक्षा को काफी दिक्कतें आ रहीं थी। वह कहती हैं, 'एक सिंगल मदर जब अकेले काम करके अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश करती है तो लोग इसे स्वीकार ही नहीं करते, लेकिन उस वक्त मेरे लिए कोई और विकल्प भी नहीं था।'

मोक्षा ने 1989 में अपने पति से तलाक ले लिया। 1999 के बाद वह अपनी बेटी के स्कूल में वॉर्डन के तौर पर काम करने लगीं। उनका मुख्य उद्देश्य यही था कि कैसे वह अपनी बेटी प्राची की पढ़ाई अच्छे से करवा सकें। प्राची की स्कूल की पढ़ाई 2004 में खत्म हो गई। इसके बाद मोक्षा एक जिम्मेदारी से थोड़ा मुक्त हो गईं। उसी साल वह काठमांडू आ गईं और वहां माउंटेनियरिंग का कोर्स पूरा किया। अपने परिवार को छोड़ना मोक्षा को काफी तकलीफ देता था, लेकिन वह अकेले दम पर अपनी जिंदगी चलाने और बेटी की परवरिश करने को लेकर गौरान्वित भी महसूस करती थीं। जब वह अपनी कहानी लोगों को बताती हैं तो उनका मकसद सहानुभूति बटोरना नहीं होता, बल्कि वह चाहती हैं कि जैसे उन्होंने अपनी बेटी की परवरिश की है वैसे ही कोई भी औरत चाहे तो अपने दम पर एक मुकाम हासिल कर सकती है।

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मोक्षा 2007 में मनाली आ गईं यहां उनके पिता सेब की खेती करते थे। लेकिन उन्होंने अपने पिता के काम में हाथ बंटाने की बजाय अपनी खुद की एक ट्रैवल एजेंसी खोली। उस वक्त वह अमेरिकी ट्रैवलर कोनी से मिलीं जो कि रॉयल इनफील्ड पर पूरा भारत भ्रमण कर रही थीं। कोनी से प्रभावित होकर मोक्षा ने भी खुद से ट्रिप पर जाने का प्लान बनाया।

मोक्षा का मानना है कि समाज के रवैये में बदलाव आना चाहिए और खासकर बेटियों को मामले में तो समाज को काफी बदलने की जरूरत है। अगर बेटी और बेटा का फर्क खत्म होगा तभी समाज में असल बदलाव आ सकेगा। आखिर बेटे भी तो महिलाओं के कोख से ही जन्म लेते हैं। वह कहती हैं कि आज महिलाएं आईएएस से लेकर साइंटिस्ट, अंतकिक्ष यात्री पायलट और यहां तक मंत्री जैसे रोल निभा रही हैं। बेटियां भी अपने मां-बाप की उतनी ही मदद कर सकती हैं जितनी की बेटे

एक दोस्त की सलाह पर मोक्षा 2007 में मनाली आ गईं यहां उनके पिता सेब की खेती करते थे। लेकिन उन्होंने अपने पिता के काम में हाथ बंटाने की बजाय अपनी खुद की एक ट्रैवल एजेंसी खोली। उस वक्त वह अमेरिकी ट्रैवलर कोनी से मिलीं जो कि रॉयल इनफील्ड पर पूरा भारत भ्रमण कर रही थीं। कोनी से प्रभावित होकर मोक्षा ने भी खुद से ट्रिप पर जाने का प्लान बनाया। उन्होंने अकेले ही मनाली से लेह तक रॉयल इनफील्ड से सफर किया। उन्होंने लेह से वापस मनाली तक का सफर रिकॉर्ड 20 घंटे और 20 मिनट में पूरा किया। 2009 में उन्होंने BacknBeyond की स्थापना की जो कि पूरे देश में बाइक टूर ऑर्गनाइज कराता है।

अब मोनिका 55 साल की हो गई हैं, लेकिन इस उम्र में भी उनका जज्बा कम नहीं हुआ है। इसी साल 2 अक्टूबर से वह अकेले पूरे भारत भ्रमण पर निकलने वाली हैं, वो भी अपनी रॉयल इनफील्ड बाइक से।

वीडियो में देखें, मोक्षा की कहानी उन्हीं ज़ुबानी...


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ये स्टोरी को इंग्लिश में पढ़ें।

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