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'रैकेट की रानी' के नए खिताब से सानिया मिर्ज़ा को नवाज़ा बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख़ खान ने

खुशनुमा समारोह में शाहरुख़ ने किया सानिया की आत्म-कथा का विमोचन और कहा कि लोगों को सानिया के जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा और उनकी कहानी कईयों को प्रेरणा देगी 

14th Jul 2016
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ये चाँद-सा रोशन चेहरा

जुल्फ़ों का रंग सुनहरा

ये झील-सी नीली या पीली आँखें .....

और फोर हैण्ड है इतना गहरा 

तारीफ़ करूँ क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया

बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख़ खान ने कुछ इस तरह से मशहूर गीत 'ये चाँद-सा रोशन चेहरा' में अपने कुछ शब्द जोड़कर 'सुपरस्टार' टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा की जमकर तारीफ़ की।  हैदराबाद के ऐतिहासिक ताज फ़लकनुमा पैलेस में शाहरुख़ खान ने 13 जुलाई की ख़ूबसूरत शाम में सानिया मिर्जा की आत्मकथा ‘ऐस अगेन्स्ट ऑड्स’ का विमोचन किया। इसी ख़ास मौके पर शाहरुख़ खान ने सानिया मिर्ज़ा, खेल, फिल्म और अपने शौक के बारे में पत्रकारों से दिल खोलकर बातचीत की।

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शाहरुख़ ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हम अपनी लड़कियों के प्रति जितना अधिक प्यार दिखाएँगे, अपनी महिलाओं के प्रति जितना सम्मान दिखाएँगे, हमें सानिया जैसी कई उपलब्धियाँ देखने को मिलेंगी। इस दुनिया में महिलाओं की तुलना में किसी ने भी बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की है। ’’

शाहरुख़ ने सानिया की तारीफ में खूब क़सीदे पढ़े। उन्होंने कहा, ‘‘वह रैकेट की रानी हैं । सानिया ने हमारे देश को गौरवान्वित किया है। हम पीटी उषा, मेरीकोम और सानिया मिर्ज़ा जैसे लोगों को याद करते हैं। इनसे प्रेरणा लेकर कई लड़कों और लड़कियों ने खेलों को पेशेवर करियर के तौर पर अपनाया और हमारे देश का मान बढ़ाया। इन लोगों ने अपने पदचिन्ह छोड़े हैं। अपनी राह बनायी है।’

'किंग खान' ने कहा कि वे सानिया की आत्म-कथा के लोकार्पण में भाग लेने पर काफी फ़क्र महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "बड़े गर्व की बात है कि मैं यहाँ हूँ। मेरी ज़िंदगी को बनाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मेरी माँ से लेकर अब तक जिन महिलाओं के साथ मैंने काम किया है, सभी ने मेरी ज़िंदगी को संवारने में बड़ी भूमिका निभाई है महिला का साथ काफी प्रेरणादायक होता है। चाहे वह खेल में हो या घरेलू काम काज में, गायन में हो कि अभिनय में, जब वे प्रेरित करती है, तो केवल महिलाओं को ही नहीं, बल्कि युवाओं और बच्चों, सभी को भी उनसे प्रेरणा मिलती है। महिला में उत्तम गुण होते हैं कि वे दूसरों को प्रेरित करें।"
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शाहरुख़ खान ने कहा कि सानिया ने छोटी-सी उम्र में बहुत कुछ हासिल किया है, जिसकी मिसाल नहीं मिलती। उन्होंने ने ये भी कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने कुछ खेलों को छोड़ कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है, लेकिन कुछ महिला खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से देश और दुनिया को प्रभावित किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सानिया मिर्ज़ा की कामयाबियों से प्रेरणा लेकर कई लोग आने वाले दिनों में खेल की दुनिया में भी भारत का नाम और भी रोशन करेंगे। बॉलीवुड में अपना अद्वितीय स्थान रखने वाले शाहरुख़ यह कहने से से बिल्कुल पीछे नहीं हटे कि वे सालों से सानिया को जानते हैं और उन्होंने हमेशा सानिया के खेल को फॉलो किया है। उन्होंने कहा,

''मैं हमेशा सानिया के कैरियर को फॉलो करता रहा हूँ। ऐसा मैंने सिर्फ खेलों के प्रशंसक के रूप में नहीं किया। सानिया ने अपने खेल से स्पोर्ट्स लवर्स के लिए सम्मान, ताज़गी और ख़ूबसूरती लाई है।"
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एक और प्रश्न के उत्तर में शाहरुख़ ने अपनी फिल्म यात्रा के बारे में कहा, '' मैं बहुत खुश किस्मत रहा हूँ। मैं जब दिल्ली से मुंबई आया, कड़ी मेहनत करता रहा और मुझे कामयाबी मिलती गयी। कड़ी मेहनत के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है, कामयाबी का। अगर मैं सफल हूँ तो सफलता को बनाये रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी और अगर मैं असफल हूँ तो सफल बनने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।'' उन्होंने सानिया मिर्ज़ा के बारे मे कहा, ''सानिया विश्व से बातें करती रही हैं। मैं उन्हें खेलते हुए देखता रहा हूँ। खेल से प्रेम करती हैं, सानिया का परिवार उनके साथ रहा है। वह जब सिंगल में बहुत ज्यादा नहीं कर पायी, तो डबल में नंबर 1 बन गयीं।''

शाहरुख़ खेलों के प्रति अपनी दिलचस्पी के बारे में भी बोले,

''मुझे बहुत अच्छा लगता है। मैंने 'चक दे इंडिया' की थी। खेलों पर बनीं लगान, मेरीकॉम, जैसी फिल्में भी काफी अच्छी थीं। मिलखा सिंह, बहुत इंस्प्रेशनल फिल्म रही। अब धोनी पर भी फिल्म बन रही है। सानिया पर भी जब भी कोई फिल्म बनेगी, काफी प्रेरणादायी होगी।''
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सानिया मिर्जा पर फिल्म के बारे में किंग खान ने कहा, ‘‘जब भी सानिया पर फिल्म बनेगी, मुझे लगता है कि वह बहुत प्रेरक और लाजवाब होगी।’’ हल्के-फुल्के अंदाज में शाहरुख ने कहा, ‘‘और.. मैं नहीं जानता.. आप उन्हीं से पूछें कि क्या वह मुझे उनके प्रेमी की भूमिका अदा करने की इजाजत देंगी, लेकिन, निश्चित तौर पर मैं इस फिल्म का निर्माण करूंगा।’’

किंग खान ने कहा कि सिनेमा मानवीय भावनाओं से प्रेरित होता है। खेल भी इसी भावना से खेला जाता है। भारतीय खिलाड़ी अपने देश के लिए खेलते हैं। यात्राएँ करते हुए भी वे अपने देश के बारे में सोचते हैं।

''मैं जब युवा था तो मैं भी खिलाड़ी बनना चाहता था। मैं देश का प्रतिनिधित्व करना चाहता था। हॉकी खेलने का शौक था। मेरे पिता हॉकी खेलते थे। एथलिट के रूप में दौड़ भी लगायी। पिताजी अक्सर खिलाड़ियों की कहानियाँ सुनाते थे। उन्होंने मिलखा सिंह की कहानी सुनायी थी। ज्ञानचंद की कहानी भी सुनायी थी। लेकिन 'बैक पैन' की वजह से मुझे अपना खेल छोड़ना पड़ा था''

शाहरुख़ का मानना है कि विश्वास के साथ कोई अच्छी बात करें तो बात करने में कोई बुराई नहीं है। अपने दिल और दिमाग़ में क्या है, इस बात को कहना उन्हें भी काफी पसंद है। उन्होंने कहा कि यह केवल पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि अद्भुत सानिया से नंबर 1 बने रहने के बारे में सुनने का बहुत अच्छा अवसर भी है। उन्होंने कहा, ''मैं स्टार या दोस्त के रूप में नहीं आया हूँ। मैं उन महिलाओं की सम्मान के लिए आया हूँ, जिन्होंने विश्वस्तर पर इस तरह की उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। ऐसी महिलाएँ बहुत कम हैं, जिन्होंने विश्वस्तर पर नाम कमाया है।''

किंग खान ने एक सवाल के जवाब में कहा, ''अच्छे लम्हे एक 'भाव' होते हैं, कलेक्शन या अवार्ड नहीं हो सकते। अगर कुछ अच्छा हुआ है, बहुत ही खुशी देने वाला है, जो कुछ मैंने अपनी फिल्म के लिए किया है और अधिक से अधिक लोगों ने उसे पसंद किया है, तो वह जिंदगी के कुछ उम्दा लम्हे कहे जा सकते हैं। इसी तरह कई गहरे तनावग्रस्त लम्हे भी रहे हैं। बहुत सारे लोग मिलकर मेहनत करते हैं और अगर मैं मनोरंजन के लिए लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया, जोकि मेरी जिम्मेदारी है, तो तनावग्रस्त रहा हूँ। मेरा काम तो लोगों के चेहरों पर मुस्कुराहट बिखेरना है, मैं ऐसा करने में नाकाम रहता हूँ, तो दुख होता है, लेकिन कामयाब होता हूँ तो आराम से सो नहीं जाता और नाकामी को ओढ के बैठ नहीं जाता। इसके बारे में एक दो घंटो बैठकर विचार करता हूँ, मैं नाकाम फिल्म के साथ और अधिक नहीं रह सकता और फिर कड़ी से कड़ी मेहनत करने के लिए अगले सोमवार को काम के लिए निकल पड़ता हूँ। दोनों सूरतों में मुझे आगे कुछ करना है। इंशाअल्लाह बड़ी सफलता लिए काम करता रहूँगा।''

लोग किताब में मेरे बारे में जान पाएँगे कि मैं कितनी जज़्बाती हूँ : सानिया मिर्ज़ा

बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख़ खान से 'रैकेट की रानी' का ख़िताब पाने वाली टेनिस की नंबर 1 खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा ने आज अपनी आत्मकथा के अपने शहर में लोकार्पण के बाद कहा कि लोग उनकी इस किताब को पढ़कर उनके बारे ये जान पायेंगे कि वे कितनी जज़्बाती हैं। उन्होंने कहा, '' यह मेरे लिए काफी स्पेशल मौका है। आम तौर पर ऐसा नहीं होता कि इस उम्र में आत्मकथा लिखें। ख़ुदा के करम से मैने लंबा कैरियर जिया है। यह सफर काफी मनोरंजनपूर्ण रहा है। 20 साल के इस कैरियर में मैं अपनी कहानी को लोगों सामने पेश कर पायी हूँ।''

सानिया ने कहा, ‘‘मैंने केवल उनसे (शाहरुख़ से) कहा कि क्या आप मेरी जिंदगी के अहम हिस्से का विमोचन कर सकते हो। और वो यहाँ आ गये। खुदा के करम से मेरा करियर लंबा रहा। कोर्ट के अंदर और बाहर मनोरंजक करियर रहा। मुझे खुशी है कि मैं इसे पेश करने में सफल रही। ’’

इस किताब में सानिया की महिला युगल में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनने की यात्रा तथा अपना सपना साकार करने के लिए उन्होंने जिन चुनौतियों का सामना किया उनका वर्णन है। हार्पर कालिन्स किताब के प्रकाशक हैं।

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सानिया ने कहा कि उन्होंने अपने निजी जीवन की बातें काफी कम किसी को बतायी हैं, लेकिन इस आत्मकथा में अपनी शादी के बारे में भी लिखा है। जीवन में मुश्किल दौर के बारे में उन्होंने कहा कि सब की जर्नी डिफिकल्ट होती है, कई कठिन लम्हे आते हैं, लेकिन उनका सामना करने के अलग-अलग तरीके होते हैं। उन्होंने अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर के बारे में बताते हुए कहा,

'' मैंने तीन सर्जरियों का सामना किया। जब तीसरी सर्जरी हुई तो वो काफी कठिन दौर था। मैं खेल नहीं पा रही थी। उस खेल से दूर थी, जिससे मैं बहुत प्यार करती थी। मैं दो महीने तक मैं काफी उदास रही । दो-तीन सप्ताह मैं अपने कमरे में अकेले ही रही। खाना, सोना वहीं था, मैं बहुत ख़राब हालात से भी गुज़री हूँ। मैंने इस किताब में यह बताने की कोशिश की है कि मैं कौन हूँ और कैसी हूँ। खुशी, प्रेम, बहुत सारे जज़्बों से भरी है यह किताब।''
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सानिया ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह किताब पसंद की जाएगी। इसमें उनके 'कलरफुल कैरियर' की बातें हैं। सानिया ने इस मंच पर काफी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ''मैं नंबर 1 रूप में बने रहने के लिए संघर्ष करती रहूँगी और मैं नंबर 1 के रूप में ही अपना कैरियर फिनिश करूँगी। जब आपका प्रदर्शन स्तर गिरता रहता है और आप अपना खेलना बंद कर देते हैं तो यह आसान है, लेकिन नंबर 1 के रूप में ही अपने कैरियर को पूर्ण विराम देना काफी मुश्किल काम है।''

उल्लेखनीय है कि किताब में सानिया के जीवन के तमाम अहम घटनाक्रमों और उनकी उपलब्धियों का जिक्र है। किताब को पूरा करने में उन्हें पाँच साल लगे और अब तक उनके जीवन के घटनाक्रमों का इसमें जिक्र है। 

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सानिया मिर्जा ने एक सवाल जवाब में कहा, ''मेरे जीवन में कई उतार-चढ़ाव रहे हैं। मैं अपने कई सपनों को साकार कर सकी। मैंने उम्मीदों से अधिक पाया है। मैं और मेरे परिवार के लिए सबसे ज्यादा खुशी की बात विश्व में नंबर 1 होना है। नंबर 1 बनने के लिए मेहनत तो करनी पड़ती है, लेकिन उसका आनंद अनोखा है, उससे बढ़कर खुशी की बात यह है कि आप अपने देश को रिप्रेज़ेंट कर रहे हैं।''

सानिया मिर्जा ने कहा, ''मेरा बचपन से ही सपना रहा कि मैं ओलंपिक और विंबलडन में खेलूँ। और ऐसे बड़े मंच पर जब मैं ये सुनती हूँ कि 'भारत की सानिया मिर्जा' तो मुझे बड़ी खुशी होती है। यह सोचकर बहुत खुशी होती है कि भारत देश मेरे साथ है और मैं विश्व में नंबर 1 हूँ। यही सबसे बड़ा एचिवमेंट है।''

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