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‘गरीब की रोटी’ लड़ती है भूख से

आकाश शुक्ला
20th Jan 2017
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"सुला दिया माँ ने भूखे बच्चे को ये कहकर, 

परियां आयेंगी सपनों में रोटियां लेकर..."

'गरीब की रोटी' संगठन उन्हीं भूखे बच्चों की रोटियों का इंतज़ाम कर रहा है, जिनके सपनों में कुछ समय पहले तक परियां रोटी लेकर आती थीं, लेकिन ये संगठन सिर्फ भूखे बच्चों का ही पेट नहीं भर रहा, बल्कि उस हर उम्र की भूख का ख़याल रख रहा है, जो कभी खाली पेट सोने पर मजबूर हुआ करते थे।

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"सामाजिक आइनें में झाँक कर ढूंढ निकाली उत्तर प्रदेश, हरदोई जिले के युवाओं ने इंसानियत से लबरेज़ एक सोच। सोच उस भूख के खिलाफ, जहां लड़ते हुए हमारे समाज का एक खास तबका अपने पेट को भरने की जद्दोजहद से जूझ रहा है।"

भारत का एक राज्य है उत्तर प्रदेश, जिसकी राजधानी है लखनऊ। लखनऊ के पास ही एक जिला है हरदोई। वैसे तो हरदोई अपने आप में जाना-पहचाना जिला है, लेकिन एक युवा संगठन आजकल इस जिले की पहचान बना हुआ है और ये संगठन है 'गरीब की रोटी'। यह संगठन भूखे पेटों को भरने के साथ-साथ उनके तन पर कपड़ों की व्यवस्था भी करता है, साथ ही ठण्ड में ठिठुरते जिस्म को गर्म आवरण से ढंकने का भी काम करता है।

'गरीब की रोटी' संगठन कुछ युवाओं ने मिलकर शहर में सामाजिक तौर पर गरीबों की मदद करने के लिए बनाया है। इस संगठन के कार्यकर्त्ता जिले के घरों से रोटियां इकट्ठी करते हैं। जिस घर से जितनी रोटी मिल जाये। हर घर अपनी श्रद्धा और अपनी सहजता के हिसाब से रोटी दान करता है। दिन भर में जमा की गई रोटी शाम होते ही गरीबी की मार झेल रहे भूखे लोगों में बांट दी जाती है। वैसे ये सच है, कि अधिकतर लोग नेम और फेम के लिए इस तरह के सामाजिक कार्यों को करते हैं, लेकिन जब योरस्टोरी टीम ने 'गरीब की रोटी' संगठन से बात की, तो यहां के वॉलेनटियर्स ने अपना नाम बताने से मना कर दिया। उन्होंने ने कहा, कि हम नाम के लिए इस संगठन को नहीं चला रहे और न ही हमारा संगठन किसी एक व्यक्ति का है। जो हमसे मिलता है, वो हमसे जुड़ता जाता है। हम एक टीम की तरह काम करते हैं। यहां कोई 'मैं' नहीं बल्कि हमसब 'हम' हैं।

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'गरीब की रोटी' संगठन के युवा वॉलेनटियर्स सप्ताह में बृहस्पतिवार व रविवार को घरों से दो अथवा सामर्थ्य अनुसार रोटी की मांग रखते हैं, और साँझ होते ही जायज़ खुराक लेकर शहर के जिला अस्पताल व बस स्टॉप जैसी जगहों पर मौजूद जरूरतमंदों तक पहुँचते हैं। ख़ास बात इस संगठन की यह देखने को मिली की संगठन का कोई भी व्यक्ति सामाजिक तौर पर कोई आर्थिक मदद या सहयोग लेना पसंद नहीं करता। संगठन के अनुसार इनसे जुड़ने वाला व्यक्ति यदि वास्तविक तौर पर समाज के प्रति अपनी संवेदना रखता है, तो वे स्वयं अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीब की ज़रूरत को पूरा करने अथवा सहयोग करने के विषय में जागरुक हो सकता है।

साथ ही यह संगठन बीते कुछ समय से शांतिपूर्ण ढंग से रात्रि 11 बजे से ठण्ड के प्रकोप से कंपकपाने वाले गरीबों के लिए गरम कंबल इत्यादि का प्रबन्ध भी करता है। ये कंबल उन लोगों में बांटे जाते हैं, जो खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। अपने इरादों को और मजबूती देते हुए संगठन ने यह भी बतया, कि 'भविष्य में हम सभी पूर्ण रूप से गरीब व असहाय लोगों को सताने वालों के खिलाफ भी हुंकार भरेंगे।'

वॉलेनटिर्स के अनुसार 'गरीब की रोटी' संगठन सप्ताह में दो दिन नहीं, बल्कि आगामी दिनों में पूर्ण सप्ताह भोजन प्रबंध व सिर्फ भोजन प्रबंध तक सीमित न रहकर गरीब के हक़ के लिए भी आवाज़ बुलंद करेगा। समाज के लिए प्रेरणा बन रहे इन युवाओं को लगातार समाज का सहयोग भी मिल रहा है और इंसानियत की सोच को पंख भी।

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