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गांव से लेकर शहर की लड़कियां स्टार्टअप शुरू कर बन रहीं आत्मनिर्भर

6th Aug 2018
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नौकरियां छोड़कर कारोबारी बन रही हैं महिलाएं। एक महिला ने तो गाय के गोबर से फैशनेबल कपड़े बनाने का स्टार्टअप शुरू किया है। कोई महिला वैकल्पिक चिकित्सा का स्टार्टअप, कोई ग्रॉफिक डिजाइनिंग, कोई ई-कैब स्टार्टअप तो कोई ई-कॉमर्स बिजनेस चलाने लगी है। एक महिला ने तो किराए पर कमरे, पेइंग गेस्ट आदि की ऑनलाइन सेवा शुरू की है।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर


उत्तर प्रदेश में महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए सरकार स्किल डिवेलपमेंट सेंटर में ट्रेनिंग दे रही है। एक साल में चार लाख युवाओं को ट्रेनिंग दी गई है। इनमें से ढाई लाख का प्लेसमेंट भी हो चुका है।

वुमन इंटरप्रेन्योर सिटीज इंडेक्स की दृष्टि से डेल कंपनी का सर्वे भले ही अमेरिका-जर्मनी को छोड़ बाकी देशों को पिछड़ा माने, लेकिन रोजाना सामने आ रहे स्टार्टअप इस बात का साफ संकेत हैं कि भारत समेत पूरी दुनिया की महिलाएं बड़ी संख्या में बिजनेस रिस्क लेने में अब कत्तई न पीछे रहना चाहती हैं, न नाकामयाब। वे भी नौकरियां छोड़कर कारोबारी बन रही हैं। खासतौर से भारत में स्टार्टअप के लिए महिलाओं को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। भारतीय महिलाओं में मल्लिका केजरीवाल, पंखुरी श्रीवास्‍तव, फाल्‍गुनी नायर, अंकिता वशिष्‍ठ, स्वाति भार्गव आदि ऐसी कामयाबी का इतिहास बना रही हैं।

आजकल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, बिहार आदि ऐसा कोई भी राज्य नहीं, जो स्टार्टअप को प्रोत्साहित नहीं कर रहा हो। उत्तर प्रदेश में महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए सरकार स्किल डिवेलपमेंट सेंटर में ट्रेनिंग दे रही है। एक साल में चार लाख युवाओं को ट्रेनिंग दी गई है। इनमें से ढाई लाख का प्लेसमेंट भी हो चुका है। छत्तीसगढ़ में नये आइडिया के स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने स्टार्टअप यात्रा शुरू की है। सरकार को मिले स्टार्ट अप के अड़तीस सौ से अधिक आइडिया में से 125 को सर्वश्रेष्ठ मानते हुए स्टार्ट अप इंडिया में पंजीकृत कर लिया गया है। मध्य प्रदेश के इंदौर से तो एक अद्भुत स्टार्टअप आइडिया मिला है।

पुस्तकें पढ़ने में असमर्थ नेत्रहीनों, बुजुर्गों, असमर्थ लोगों के लिए बुक्स की वॉयस लाइब्रेरी तैयार करने का अवसर सामने आया है। यह ब्रेनलिपि के सहारे पढ़ने वालों की जिंदगी का बहुत बड़ा तोहफा हो सकता है। अभी दो दिन पहले ही स्टार्टअप के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक नया रास्ता खोल दिया है- 'डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज'। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल अप्रैल में इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आइडेक्स) का एलान किया था। मंत्रालय ऐसे स्टार्टअप्स के लिए बाजार दिलाने में भी मदद करेगा। फिलहाल, हम बात कर रहे हैं नीदरलैंड की एक महिला जलिला एसाइदी के 'बायोआर्ट लैब' स्टार्टअप की। जलिला गाय गोबर से फैशनेबल ड्रेस बना रही हैं। इसके लिए उनको एक करोड़ चालीस लाख रुपए का अवॉर्ड मिला है।

जलिला का बायोआर्ट लैब गाय के गोबर से सेलुलोस अलग कर फैशनेबल ड्रेस बना रहा है। उल्लेखनीय है कि पौधों की कोशिका भित्तियाँ सेलुलोस की ही बनी होती हैं। कपास के रेशों का नब्बे प्रतिशत हिस्सा सेलुलोस होता है। जलिला सेलुलोस से जो फैब्रिक प्रोडक्शन करा रही हैं, उसे ‘मेस्टिक’ नाम दिया है। इससे शर्ट और टॉप तैयार किए जा रहे हैं। बॉयोआर्ट लैब स्टार्टअप को गोबर के सेलुलोस से बायो-डीग्रेडेबल प्लास्टिक और पेपर बनाने में भी सफलता मिली है। जलिला बताती हैं कि सेलुलोस बनाने की प्रक्रिया कैमिकल और मैकेनिकल है। हमें जो गोबर और गोमूत्र मिलता है, उसमें अस्सी प्रतिशत पानी होता है। फैब्रिक प्रोडक्शन के दौरान गीले और सूखे हिस्से को अलग-अलग कर दिया जाता है।

गीले हिस्से के सॉल्वेंट से सेलुलोस बनाने के लिए फर्मेंटेशन किया जाता है। इसमें ज्यादातर हिस्सा गायों के आहार घास आदि चारे का होता है। सामान्य कपड़ा उद्योग से ये प्रक्रिया बेहतर मानी जा रही है। गाय के पेट से ही फाइबर के नरम बनने की शुरुआत हो जाती है। यह ऊर्जा की बचत करने वाला तरीका भी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रक्रिया से मिला सेलुलोस उच्च तकनीक और गुणवत्ता वाला होता है। यह फ्यूचर फैब्रिक है। लोग गोबर को वेस्ट मटेरियल समझते हैं लेकिन फैब्रिक बनाने में शुरुआती स्तर पर जो तेल इस्तेमाल होता है, वह भी बहुत अच्छा नहीं होता है। जलिला गोबर के सेलुलोस में छिपी सुंदरता दुनिया को दिखाना चाहती हैं। फिलहाल वह पंद्रह किसानों के साथ प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। वे इसी साल सेलुलोस से कपड़े बनाने की एक बड़ी यूनिट भी लगाने जा रही हैं। इसके लिए उनको दो लाख डॉलर का अवॉर्ड भी मिला है। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। अब पारंपरिक संसाधनों के अलावा हमे निर्भरता की अन्य सोर्स भी तलाशने हैं। सेलुलोस से कपड़े बनाना उसी तरह की ताजा खोज है। दुनिया के अनेक कपड़ा निर्माता उद्यमियों ने भी जलिला एसाइदी को आश्वस्त किया है कि वे भी इस प्रोसेस को अपनाएंगे।

जलिला का तो खैर पूरा स्टार्टअप ही एक खास तरह की खोज पर निर्भर है, हमारे देश में बिजनेस की नई-नई संभावनाओं पर महिलाएं बड़ी संख्या में काम कर रही हैं। सीएस और सीडब्ल्यूएस में ऑल इंडिया टॉप करने वाली चार्टर्ड एकाउंटेंट गरिमा अपने स्टार्टअप में आयुर्वेद, एक्युप्रेशर, यूनानी, नैचुरोपैथी, हर्बल होम्योपैथी और पंचकर्म जैसी वैकल्पिक चिकित्सा उपलब्ध करा रही हैं। हर्षिता ने कैंसर पेशेंट और अनाथ महिलाओं-बच्चों द्वारा तैयार किए जा रहे ऑर्गेनिक हैंडमेड क्राफ्ट आइटम्स पोट्रेट, जूलरी, साड़ी, पेंटिंग्स, ऑर्गेनिक फूड व कॉस्मेटिक आदि को अपने स्टोर 'गंगसूत्र' से सेल करने का बिजनेस शुरू किया है। विद्या ने ह्यूमन बॉडी, वॉटर साइकिल, हृदय संरचना और मेप्स जैसे 116 टॉपिक्स को 3-डी इमेज में कन्वर्ट कर एक कार्ड बोर्ड डिवाइस बनाने का स्टार्टअप शुरू किया है। इस स्टार्टअप को भारत के श्रेष्ठ बीस स्टार्टअप्स में सेलेक्ट किया गया है।

मुंबई के सोफिया कॉलेज से पढ़ीं ग्रॉफिक डिजाइनिंग की शौकीन मल्लिका केजरीवाल ने 'द डिजाइन बे स्टूडियो' नाम से अपनी कंपनी बनाई है और जो बड़े ग्राहकों के लिए डिजाइनिंग कराती है। इसकी शुरुआत उन्होंने अपनी पेंटिंग्स से मिले पैसों से की। सबसे पहले उनकी चिकित्सक मां ने एक ग्राहक के रूप में इसकी शुरुआत कराई। फिर उनके यहां पहुंच एक मरीज ने अपनी कंपनी के लिए ब्रोशर्स और कार्ड्स डिजाइन कराए। और इसके साथ ही उनका स्टार्टअप चल निकला। छह माह में ही उन्हें इतने पैसे मिले कि उन्होंने अपना खुद का ऑफिस ले लिया। आज उनके यहां पंद्रह कर्मचारी इस स्टार्टअप को चला रहे हैं।

महिलाओं के स्टार्टअप को कई और तरह से प्रोत्साहन मिल रहा है। जैसेकि चंडीगढ़ में महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फ्यूचर फियाक्रे प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रजत लूथरा ने पूरी तरह से महिलाओं द्वारा चलाया जा रहा ई-कैब स्टार्टअप शुरू किया है। इसके तहत चंडीगढ़, पंचकूला समेत तीन शहरों में सिर्फ महिला चालक, महिला यात्रियों को सेवाएं देने जा रही हैं। फ्यूचर कैब ऐसी पहली कंपनी है, इस तरह की सेवाएं उपलब्ध करा रही है। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के युवाओं ने कामकाजी महिलाओं और गृहिणियों को खुद का काम शुरू करने का 'ई-फर्स्ट डायल डॉट कॉम ग्रुप' स्टार्टअप शुरू किया है। यह स्टार्टअप महिलाओं को कोचिंग क्लासेस, होम सर्विसेस, ब्यूटी पॉर्लर, होम ट्यूटर, फिजियोथैरेपी, हाउस कीपिंग, क्लीनिंग और रिपेयरिंग संबंधी काम शुरू करने में मदद करने के साथ ही दस हजार रुपए तक की आर्थिक मदद और संसाधन भी मुहैया करा रहा है।

अब तक वे दो हजार लोगों की मदद कर चुके हैं। भारतीय महिलाओं में नौकरी छोड़कर अपना कारोबार शुरू करने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। मुंबई में फाल्‍गुनी नायर नौकरी छोड़कर अपनी 'नायका डॉट कॉम' ई-कॉमर्स कंपनी चला रही हैं। वह ब्यूटी और लग्‍जरी प्रोडक्‍ट्स को नायका डॉट कॉम के जरिए ऑनलाइन बेच रही हैं। उनकी कंपनी में हाल ही में टीवीएस कैपिटल ने 25 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

एक दौर था, जब ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए साज-सज्जा का मतलब सिर्फ बिंदी, काजल और चूड़ियां होती थीं लेकिन अब इसमें ‘थ्रेडिंग’, स्क्रबिंग और फेस मसाज भी शामिल हो गया है। एक सर्वे से पता चला है कि न सिर्फ ग्रामीण भारत में खूबसूरती को लेकर जागरूकता बढ़ी है बल्कि ब्यूटी पार्लर एक बेहतर कारोबार के तौर पर उभरा है, जिसमें महिलाओं के स्टार्टअप तेजी से कामयाब हो रहे हैं। शादी-ब्याह के सीजन में वे हजारों रुपए आराम से कमा ले रही हैं। बाजार भी अब महिलाओं को सामंती चौहद्दी से बाहर निेकाल रहा है। उनके यहां बेरोजगार लड़कियों की जॉब भी मिल रहे हैं। उनके यहां ज्यादातर महिलाएं थ्रेडिंग करवाती हैं।

इधर दुलहन का मेकअप, पैडीक्योर, मैनीक्योर, वैक्सिंग आदि का भी चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक हैं अंकिता वशिष्‍ठ। उन्होने नौकरी छोड़कर पहला वेंचर कैपिटल फंड स्टार्टअप 'साहा फंड' नाम से शुरू किया है। अंकिता सेठ ने बजट होटलों के लिए ऑनलाइन एग्रीगेटर के रूप में 'विस्टा रूम्स कंपनी' का स्टार्टअप तो स्वाति भार्गव ने देश की करीब आठ सौ रिटेल कंपनियों के साथ मिलकर कैशबैक और कूपन उपलब्ध कराने के लिए 'कैशकरो डॉट कॉम' की शुरुआत की है। इसी तरह बेंगलुरु में कल्‍लारी कैपिटल और सिक्योइया कैपिटल से 16.65 करोड़ रुपए जुटा चुकीं पंखुरी श्रीवास्‍तव अपनी ब्रोकर फ्री वेबसाइट 'ग्रैबहाउस' स्टार्टअप के माध्यम से अपार्टमेंट्स में किराए पर कमरे, पेइंग गेस्ट आदि की सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। पंखुरी की इस स्टार्टअप वेबसाइट पर प्रतिदिन की विजिटर्स संख्या डेढ़ लाख से ऊपर पहुंच चुकी है। ब्यूटी पार्लर का स्टार्टअप तो पूरे देश में लगातार बढ़ता जा रहा है।

यह भी पढ़ें: ड्राइवर भी महिला और गार्ड भी: बिहार की बेटियों ने मालगाड़ी चलाकर रचा इतिहास

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