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टेंशन को करो बाय-बाय, ePsyclinic बताएगा इसको भगाने के उपाय

पहला सत्र मुफ्त, बाद में चुकाने होते हैं 600-1500 रुपयेएक सत्र करीब 20 से 60 मिनट तक का टीम में 15 मनोवैज्ञानिक और 4 मनोचिकित्सक

2nd Nov 2016
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परेशानियां किसके जीवन में नहीं आती, लेकिन परेशानियों से भाग जाना किसी चीज का हल नहीं होता। ऑस्ट्रेलिया में एमबीए करने के दौरान शिप्रा डावर को घर की बहुत याद आ रही थी। इस बात से वो काफी परेशान रहती। जिसके बाद उनके प्रोफेसर ने किसी पेशेवर व्यक्ति की मदद लेने को कहा। शिप्रा की पहली प्रतिक्रिया काफी कड़वी थी क्योंकि उनको लगा कि प्रोफेसर सोच रहे हैं कि मैंने सब कुछ खो दिया। लेकिन दो थेरपी के बाद उनको पता चल गया कि ये सिर्फ एक बैचेनी और थकान थी उससे ज्यादा कुछ नहीं।

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विदेशों में मानसिक बीमारी एक छोटी सी बात होती है लेकिन भारत में ये किसी कलंक से कम नहीं। इसी बात को जानते और समझते हुए चार साल बाद शिप्रा ने ePsyclinic की स्थापना की। गुडगांव की रहने वाली शिप्रा ने आस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी से व्यापार के क्षेत्र में अपनी ग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी की। जिसके बाद उन्होने बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप से सलाह ली और ये उद्यम खड़ा करने के लिए उनका पहला कदम था। ऑस्ट्रेलिया में थेरपी में अपने अनुभव के बाद जब वो भारत लौटी तो उन्होने यहां और वहां के स्तर में काफी बदलाव देखा। दो बातें उनको परेशान करने वाली लगी। पहली ये की यहां मानसिक दिक्कत को कलंक मान कर दूर करने काम किया जा रहा है। और दूसरी मनोचिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों की अनुपलब्धता।

शिप्रा डावर का एक दोस्त जो आईआईटी और आईआईएम की पढ़ाई कर चुका था उसकी जिंदगी भी कुछ वक्त के लिए बदल गई थी जब वो काफी उदास रहने लगा था। तब शिप्रा ने उसे परामर्श की सलाह दी जिसका उसने विरोध किया। उल्टा उसने शिप्रा से कहा कि क्या वो चाहती है कि वो अपनी नौकरी छोड़ पूरे दिन मनोरोग वार्ड में बैठा रहे डॉक्टर के इंतजार में। इस बातचीत ने शिप्रा को सोचने पर मजबूर किया कि क्या इसका कोई आसान रास्ता नहीं हो सकता और जल्द ही उनको इसका जवाब भी मिल गया। इसका आसान रास्ता था कि ये सब ऑनलाइन भी संभव हो सकता है।

कुछ महिनों तक काफी दिमाग लगाने के बाद उन्होने एक प्रभावी प्लेटफॉर्म ePsyclinic.com बनाने का फैसला लिया और उसे शुरू कर दिया। यहां पर कोई भी मदद के लिए लिखित, बातचीत के जरिये या वीडियो के माध्यम से मनोचिकित्सकों या मनोवैज्ञानिकों की मदद ले सकता है। मनोचिकित्सकों या मनोवैज्ञानिकों की ऑनलाइन सलाह की सुविधा विदेशों में खूब प्रचलित है। भारत में सलाहकारों की कमी नहीं है। कोई भी ऑनलाइन परामर्श सत्र करीब 20 से 60 मिनट तक का होता है ये निर्भर करता है मामले की जटिलता पर। हालांकि पहला सत्र मुफ्त में होता है लेकिन इसके बाद हर सत्र के लिए 600 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक चुकाने होते हैं।

गुडगांव से चल रहे इस उद्यम में फिलहाल 15 मनोवैज्ञानिकों, 4 मनोचिकित्सकों और एक स्त्री रोग विशेषज्ञ जबकि 20 और सदस्य अभी प्रशिक्षण के दौर से गुजर रहे हैं। पिछले 2 महिने के दौरान ePsyclinic करीब 1100 सत्र आयोजित कर चुका है। ePsyclinic.com में मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों 6 हफ्ते की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वो बातचीत के विभिन्न माध्यमों के बारे में अच्छी तरह समझ जाएं साथ ही सही तरीके से लोगों का इलाज कर सकें। ट्रेनिंग के दौरान दूसरे कई विषयों के बारे में भी बताया जाता है जिसमें आपसी रिश्ते, काम का दबाव, देखभाल, गर्भावस्था, व्यसन, परवरिश, बुजुर्ग और गंभीर मनोवैज्ञानिक मुद्दों को शामिल किया जाता है।

शिप्रा के मुताबिक उनके इस काम के लिए उनको अब तक किसी निवेश की जरूरत महसूस नहीं हुई है लेकिन भविष्य में ऐसी किसी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। ePsyclinic.com लोगों को उनकी शादीशुदा जिंदगी में आई समस्यों पर, काम से जुड़े तनाव पर और असुरक्षा के मुद्दे पर सलाह देता है। इस पोर्टल ने कुछ नये ट्रेंड पर काम करना शुरू किया है इसमें कामुकता से संबंधित मुद्दे भी शामिल हैं। शिप्रा के मुताबिक उनके पास एक ऐसा आदमी आया जो काफी तनाव में था और जिसका अपना इस दुनिया को छोड़ चला गया था। जिसका वो शौक भी नहीं मना पाया था। जब उसने खुलकर बात की तो वो रोया और अपनी यादों के बारे में बातचीत की।

रिपोर्ट बताती हैं कि देश की 6.5 फीसदी लोग गंभीर मानसिक विकारों से पीड़ित हैं। ऐसे में अब ज्यादा से ज्यादा लोग इस चौकाने वाली संख्या को गंभीरता से ले रहे हैं। दिमागी स्वास्थ्य अब आम उद्यम का रूप ले रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए शिप्रा की योजना जल्द ही एक वर्चुअल क्लिनिक खोलने की है।

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