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देश में विकास के लिए ज़रूरी है ज्ञान, जन-जागरण की अनोखी पहल आर. डी. रावल की

14th Oct 2015
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आज हमारे देश तरक्की कर रहा है हम काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नई-नई कंपनियों का उदय हो रहा है। भारतीय युवा दुनिया भर में अपनी काबलियत का डंका बजा रहे हैं लेकिन इतना सब सकारात्मक होने के बाद एक सत्य यह भी है कि भारत में अपराध का ग्राफ भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। क्या तरक्की और अपराध एक साथ होने पर हम काफी समय तक इसी तेजी से आगे जा पाएंगे ? ...यकीनन नहीं हमको देश को आगे ले जाने के लिए यहां पर हो रहे अपराधों में भी लगाम लगानी होगी। वर्ना कुछ समय बाद तरक्की की ये रफ्तार जो हमने आज पकड़ी है वो मंद पड़ने लगेगी।

आर डी रावल

आर डी रावल


अब सवाल यह उठता है क्या कानून ही अपराध को रोकने का सबसे कारगर हथियार है ? क्या कड़े कानून बनाकर हम आस पास हो रहे अत्याचारों और गलत कामों पर रोक लगा सकते हैं ? क्या कड़ी सजा के डर से ही अपराधी अपराध करना छोड़ देगें ? ये काफी पेचिदा सवाल है क्योंकि अगर मात्र कड़े कानून ही अपराध में विराम लगाने के लिए काफी होते तो अब तक अपराध पर काफी हद तक विराम लग चुका होता। लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि अपराध का स्तर कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहा है। शहर हो या गांव हर जगर अपराध बढ़ा ही है। अपराध रोकने या कम करने का किसी के पास कोई सटीक नुस्खा नहीं है लेकिन हरियाणा के आर.डी रावल का मानना है कि कानून अपनी जगह है और कड़ा कानून देश की जरूरत भी है लेकिन हमें अगर अपराध में कमी लानी है तो हमे लोगों को अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करना होगा उनके ज्ञान के भंड़ार को बढ़ाना होगा उन्हें सरल भाषा में सच से अवगत करवाना होगा और उनके अंदर चेतना का सृजन करना होगा। अगर व्यक्ति सजग होगा उसे सही और गलत की पहचान होगी तो वो खुद अपराध करने से बचेगा। आर.डी रावल मानते हैं कि अगर हम ऐसा कर पाने में सफल रहे तो देश चौमुखी तरक्की करेगा उसका विकास स्थायी होगा और हमारा देश विश्व के लिए एक मिसाल पेश करेगा। अपने इसी प्रयास को पिछले कई वर्षों से पूरा करने की कोशिश में लगे हैं आर.डी रावल जो कि भगवत गीता के माध्यम से लोगों को सच के मार्ग पर लाने का प्रयास कर रहे हैं।

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किसी भी देश के लिए भी यह बहुत जरूरी है कि वहां के नागरिक के अंदर नैतिक मूल्य हों वे हर धर्म, हर जाति हर व्यक्ति को सम्मान दें आजकल दंगे, फसाद आम बात हैं लोग धर्म-जाति के नाम पर एक दूसरे को मार रहे हैं। अगर ऐसे में कोई देश तरक्की कर भी ले तो वो ज्यादा समय तक तरक्की के उस मुकाम पर टिका नहीं रह सकता। लोगों के प्रतिस्पर्धा की भावना तो हो लेकिन वो आपसी जलन और द्वेष की भावना न ले ले। भारत आज विश्व में एक बहुत बड़ी शक्ति बनकर उभर रहा है। कई विदेशी कंपनियां यहां पर आ रही हैं और युवा अपनी कंपनियां खोल रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि युवाओं के अंदर नैतिक मूल्य भी कायम रहें।

रावल मानते हैं कि सारे धर्म महान हैं और हर धर्म सत्य और अच्छे कर्म करने की ही शिक्षा देता है। लेकिन इंसान उन धर्म ग्रंथों में लिखी हुई बातों का सही पालन नहीं करता और सत्य और नैतिक्ता के मार्ग से भटक जाता है। कुछ वर्षों पहले आर.डी रावल ने सोचा कि क्यों न वे गीता को आज की पीड़ी तक सरल शब्दों में पहुंचाएं जिससे समाज का फायदा हो सके। आर.डी रावल कोई धर्मगुरू नहीं हैं वे बस गीता में लिखे हुए संदेशों को सरल शब्दों में लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं। वह बताते हैं कि आज युवाओं के पास समय की कमी है और सभी को संस्कृत का ज्ञान भी नहीं है। ऐसे में गीता को आम लोगों तक पहुंचाने का सबसे अच्छा माध्यम है उसे अत्यंत सरल शब्दों में और संक्षेप में बताया जाए साथ ही इस बात का ख्याल रखा जाए की उसका भाव स्पष्ट निकल कर आ जाए। इसी कड़ी में सन 2009 में रावल जी ने गीता भजनावली और फिर 2014 में मानसी गीता लिखी। इन दोनों किताबों से वे पैसा नहीं कमाते बल्कि उन्हें मुफ्त में लोगों को देते हैं। आर.डी रावल जी ने अर्थशास्त्र में एम.ए किया है इसलिए देश के आर्थिक हालात को वे भली भांति जानते हैं। बतौर चीफ मैनेजर उन्होंने एस बी आई में काम किया और सन 2005 में वे रिटायर हुए, नौकरी के दौरान उनकी कई जगह पोस्टिंग हुई और उन्होंने कई राज्यों में रह रहे लोगों के बारे में जाना । बचपन में उन्हें किसी ने भगवत गीता दी थी जिसे पढ़कर वे बहुत प्रभावित हुए थे उन्होंने तब ही ठान लिया था कि वे गीता के प्रचार प्रसार के लिए काम करेंगे और गीता के संदेश को देश हित के कार्य में लगाएंगे ।

आर.डी रावल बताते हैं कि गीता में श्री कृष्ण ने काफी व्यवहारिक बाते कही हैं जो हर युग में उतनी ही प्रासंगिक है बस उनको समझने की जरूरत है गीता अपने आप में ही संपूर्ण है और यदि उसे कोई समझ ले तो वो एक अच्छा इंसान बन सकता है और खुद का ही नहीं देश को भी फायदा पहुंचा सकता है और आर.डी रावल यही काम कर रहे हैं। बाकी लेखको ने भी गीता की व्याख्या की है लेकिन रावल जी ने उसे काफी कम शब्दों के प्रयोग करके लिखा है और काफी सरल कर दिया है ताकि कोई भी युवा कभी भी उसे पढ़ सके और सीख ले सके।

धर्म अनेक हैं लेकिन सबका संदेश एक ही है। हर धर्म में अंत में जीत सत्य और मानवता की ही बताई गई है। हर धर्म शांति का संदेश देता है और हर धर्मं में आपसी भाईचारे को ही प्रमुखता दी गई है। आप किसी भी धर्मं के अनुयायी हों अगर आप उसका सही अनुकरण करेंगे तो आप एक बेहतर इंसान बन सकते हैं।

आर.डी रावल चूंकि इकोनॉमिक्स के छात्र रहे हुए हैं इसलिए वे जानते हैं कि देश की तरक्की में किन-किन चीजों का अत्यंत महत्व होता है। उनका मानना है कि देश की तरक्की में सरकार द्वारा बनाई गई अच्छी नीतियों का तो महत्व होता ही है लेकिन लोगों को भी देश की तरक्की के लिए अपनी तरफ से आगे आने होगा। व्यक्ति को हर धर्म की इज्जत करनी होगी अफवाहों से दूर रहना होगा और सत्य के मार्ग पर चलना होगा।

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