पति-पत्नी ने 25 हजार से शुरू किया शहद का बिजनेस, मुर्मू आदिवासियों का मिला साथ, अब 5 लाख रुपये है मंथली टर्नओवर

मुंबई में रहने वाले धीरांकुर ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर शहद का बिजनेस कोरोना काल में शुरू किया था. अब वह खुद तो पैसे कमा ही रहे हैं, मुर्मू आदिवासियों की भी खूब मदद हो रही है.
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इस बार भारत को पहली मुर्मू आदिवासी राष्ट्रपति मिली हैं. द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनते ही मुर्मू आदिवासियों की चर्चा ने खूब जोर पकड़ा. वैसे तो तमाम राज्यों की सरकारें आदिवासियों के भले के लिए कुछ ना कुछ करती हैं, लेकिन एक स्टार्टअप भी है जो आदिवासियों के साथ मिलकर काम कर रहा है. इस स्टार्टअप का नाम है 'द बेस्ट इंडिया कंपनी', जो शहद का बिजनेस करता है. यह शहद बिल्कुल शुद्ध होता है, जिसे मुर्मू आदिवासी जंगलों से निकालते हैं. मुंबई में रहने वाले धीरांकुर ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर ये बिजनेस कोरोना काल में शुरू किया था. इससे वह अपना बिजनेस तो चला ही रहे हैं, साथ ही मुर्मू आदिवासियों की बड़ी मदद भी कर रहे हैं.

महज 25 हजार रुपये से शुरू किया था बिजनस

मीडिया और एवर्टाइजिंग कंपनियों में करीब 20 साल तक काम कर चुके धीरांकुर उपासक ने कोरोना काल में शहद का बिजनेस करने का मन बनाया. उन्होंने सेना में अपनी सेवाएं दे चुकीं उनकी पत्नी लेफ्टिनेंट अमृता शर्मा के साथ मिलकर शहद का ये बिजनेस शुरू किया. कोरोना काल में जब बहुत सारे लोग अपनी आजीविका चलाने के रास्ते ढूंढ रहे थे, उस वक्त दिसंबर 2020 में दोनों ने महज 25 हजार रुपये के साथ ये बिजनेस शुरू किया. आज उनके बिजनेस का हर महीने करीब 5 लाख रुपये का औसत टर्नओवर है.

मुर्मू आदिवासियों का मिला साथ

बिहार के बोधगया में पैदा हुए धीरांकुर की द बेस्ट इंडिया कंपनी आज जिस मुकाम पर खड़ी है, यह वहां कभी नहीं होती अगर इसे मुर्मू आदिवासियों का साथ नहीं मिलता. वहीं दूसरी ओर, कूच बिहार के मुर्मू आदिवासियों को भी वह मदद नहीं मिलती जो द बेस्ट इंडिया कंपनी से मिली है. मुर्मू आदिवासी सालों से जंगलों से शहद निकालकर बेच रहे थे, लेकिन उन्हें इसके लिए कोई प्लेटफॉर्म नहीं मिल पा रहा था. इस स्टार्टअप ने मुर्मू आदिवासियों को उनका निकाला गया शहद बेचने के लिए एक शानदार प्लेटफॉर्म मुहैया कराया. आज दोनों एक दूसरे की मदद से फल-फूल रहे हैं और द बेस्ट इंडिया कंपनी जंगलों से मिला शुद्ध शहद देश के कोने-कोने में पहुंचा रही है.

कहां से आया शहद का बिजनस करने का आइडिया?

कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान हर कोई अपने चाहने वालों से वीडियो कॉल पर बात किया करता था. उन दिनों धीरांकुर भी अपनी छोटी बहन और जीजा से वीडियो कॉल पर बात कर रहे थे. तभी उन्हें किचन की शेल्फ पर एक शहद का जार दिखा, जो उन्होंने हासिमारा के जंगल में रहने वाले मुर्मू आदिवासियों से खरीदा था. उसे देखकर धीरांकुर ने अपने लिए भी कुछ शहद मंगवाया. जब उन्होंने शहद खाया तो उसकी क्वालिटी से बहुत खुश हुए. वहीं से उन्हें शहद का बिजनेस करने की सूझी. पहले तो उन्होंने कुछ शहद मंगवाकर दोस्तों-रिश्तेदारों से टेस्ट करवाया और फिर जब सभी ने तारीफें कीं तो दिसंबर 2020 में अपना खुद का शहद का बिजनेस शुरू कर दिया.

पिता से मिली कुछ अलग करने की प्रेरणा

जब धीरांकुर 11-12 साल के थे, तब उनके पिता भारत में एजुकेशन के लिए काम कर रहे एक एनजीओ से जुड़े हुए थे. वह बिहार के धोंगेस्वरी इलाके में एक स्कूल बनाने को लेकर काम कर रहे थे. कई बार वह धोंगेस्वरी में ही रुक जाते थे तो धीरांकुर को करीब 20 किलोमीटर दूर उनके लिए खाना लेकर जाना पड़ता था. उस वक्त ये दूरी तय करने में बस के धक्के भी खाने पड़ते थे और 6-7 किलोमीटर चलना भी होता था. वहीं बिहार के गया में गर्मियों में तापमान 46-47 डिग्री तक पहुंच जाता है. ऐसे में एक दिन धीरांकुर ने पिता से पूछा कि आखिर घर से इतना दूर पहाड़ी इलाके में ये सब करने की क्या जरूरत है? पिता ने जवाब दिया कि जब हम ये जान जाएंगे कि अब जिंदगी के बस कुछ पल ही बचे हैं जो हमारे पास कुछ होना जरूरी है जिस पर हम फख्र कर सकें. पिता के जवाब ने भी धीरांकुर को मुर्मू आदिवासियों के साथ मिलकर शहद का बिजनेस करने के लिए प्रेरित किया.

आम से लेकर सरसों तक के स्वाद वाला शहद

द बेस्ट इंडिया कंपनी आम से लेकर सरसों समेत कई तरह के फ्लेवर वाले शहद बेचती है. यह फ्लेवर शहद में मिलाए नहीं जाते हैं, बल्कि नेचुरल तरीके से इन फ्लेवर के शहद मिलते हैं. दरअसल, शहद का फ्लेवर इस बात पर निर्भर करता है कि मधुमक्खियों ने उन्हें किन फूलों से इकट्ठा किया है. इसी तरह आम के फूल, सरसों के फूल या अन्य किसी तरह के फूलों से जमा किया गया शहद उन्हीं जैसा स्वाद देता है. अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग तरह के फूल होते हैं, जिनसे मिले शहद का स्वाद अलग-अलग होता है. द बेस्ट इंडिया कंपनी अपने इस नेचुरल फ्लेवर वाले शहद को ई-कॉमर्स वेबसाइट Amazon और अपनी खुद की वेबसाइट (tbic.in) के जरिए पूरे भारत में सप्लाई करती है.

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