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बिहार की राजनीति: नजर लागी राजा तोरे बंगले पर

17th Sep 2017
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दुष्यंत कुमार की एक लाइन है, 'एक जगह हो तो कहें, दर्द इधर होता है। जब सियासत ने गंठिया वात लगा दिया हो, सांसत में फंसी जान, किस-किस पोर का इलाज कराए। कुछ वैसी ही मुश्किलों से गुजर रहे हैं लालू यादव के राजकुमार तेजस्वी यादव।'

लालू और नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

लालू और नीतीश कुमार (फाइल फोटो)


इस वक्त बिहार की नीतीश सरकार मुख्यमंत्री आवास से सटे बंगले से तेजस्वी यादव को विदा करना चाहती है। जब बंगला खाली न करने की दलीलें दी गईं तो सरकार ने खारिज कर दिया। 

जब बंगला खाली न करने की दलीलें दी गईं तो सरकार ने खारिज कर दिया। तेजस्वी यादव कहते हैं कि जब वह उप मुख्यमंत्री थे, इस बिल्डिंग के रेनोवेशन पर काफी पैसा खर्च किया है।

मंत्री हों या विधायक, जब तक सरकार में, सरकार के साथ, तब तक नाथों के नाथ नुमा रोब-रुतबा चहुंओर, कुर्सी का पाया खिसकते ही कौड़ी के तीन। सरकारी बंगलों पर कब्जे वाली नई-पुरानी मैराथन से पहले एक फिल्मी गाने का मुखड़ा बरबस कानों में बरसता है- नजर लागी राजा तोरे बंगले पर। बहरहाल, आजकल बिहारी बंगले पर घमासान छिड़ा हुआ है। लालू-पुत्र तेजस्वी अब वह नहीं रहे, जो थे, सो जो होना चाहिए, वो हो रहा है। कुर्सी और बंगला की तो छोड़िए, उनकी विधायकी पर भी तरह-तरह के अंदेशे तैर रहे हैं।

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी कहती हैं, कुछ लोगों को लालू परिवार की राजनीति पच नहीं रही है। वे चाहते हैं, हमारा परिवार खत्म हो जाए। उनके टारगेट में मेरा छोटा बेटा तेजस्वी है। अगर वे हमें गोली भी मार दें, नहीं झुकेंगे। उनके पति एवं पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव कहते हैं, बेटे तेजस्वी को उस सरकारी बंगले से कोई मोह नहीं है। तो, आइए जानते हैं, कुर्सी बदर बंगले का ताजा वाकया क्या है। इस वक्त बिहार की नीतीश सरकार मुख्यमंत्री आवास से सटे बंगले से तेजस्वी यादव को विदा करना चाहती है। जब बंगला खाली न करने की दलीलें दी गईं तो सरकार ने खारिज कर दिया। तेजस्वी यादव कहते हैं कि जब वह उप मुख्यमंत्री थे, इस बिल्डिंग के रेनोवेशन पर काफी पैसा खर्च किया है।

चाहे जो किया हो, सवाल लाख टके का चर्चाओं में है कि नीतीश बाबू से रार ठानी तो ये सब भुगतना ही होगा। वही बात कि बंगला खाली करो कि सीएम आते हैं। सो, आजकल विपक्ष की कुर्सी पर तो बैठ ही रहे हैं, रहने का ठिकाना भी दांव पर है। इसी तरह एक विवादित दौर में लालू यादव ने भी वर्ष 2005 में बंगला खाली करने में पांच महीने खींच लिए थे। यह भी गौरतलब है कि तेजस्वी यादव के माता-पिता राबड़ी-लालू वहीं सामने रहते हैं, जहां तेजस्वी का बंगला रहा है। नीतीश बाबू की सरकार चाहती है कि तेजस्वी यादव वहां से कुछ किलो मीटर दूर जाकर '1, पोलो रोड, पटना' वाला बंगला ले लें। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुनिए। वह कहते हैं - 'किसी को व्यक्तिगत तौर पर सरकारी सुविधाओं का लगाव नहीं रखना चाहिए। आज मैं जिस जगह पर हूं, यह कोई हमेशा के लिए नहीं है।' यह बंगला वर्ष 2005 में सबसे पहले सुशील मोदी को आवंटित किया गया था, जब वह पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे।

दुष्यंत कुमार की एक लाइन है- एक जगह हो तो कहें, दर्द इधर होता है। जब सियासत ने गंठिया वात लगा दिया हो, सांसत में फंसी जान, किस-किस पोर का इलाज कराए। कुछ वैसी ही मुश्किलों से गुजर रहे हैं लालू यादव के राजकुमार तेजस्वी यादव। आयकर विभाग ने भी उन पर तीर-कमान तान लिया है। विभाग ने पहले तो उनकी बेनामी अर्जित करोड़ों की संपत्ति को जब्त कर लिया, अब उपमुख्यमंत्री रहते हुए एबी एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड में लाभ का पद संभालने के कारण उनकी विधानसभा की सदस्यता भी दांव पर लग गई है। विभाग के अन्वेषण निदेशालय की आठ सितंबर 2017 की करीब 80 पन्नों की जांच रिपोर्ट में लालू प्रसाद के रेलमंत्री रहने के दौरान बड़े-बड़े ठेके हासिल करने के खेल में शामिल देश की नामी गिरामी रियल इस्टेट कंपनी के साथ ही दर्जनों छोटी बड़ी कंपनियों की गड़बड़ियों का ब्योरा उजागर हुआ है।

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि एबी एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के 98 प्रतिशत शेयर हासिल करने वाले तेजस्वी यादव ने विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले 9 नवंबर 2015 को कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दिया था। एबी एक्सपोर्ट के 98 प्रतिशत शेयर के मालिक होने के नाते वे 10 जनवरी 2011 से ही इसके डायरेक्टर थे। उस दौरान वह बतौर कंपनी निदेशक चेक जारी करते रहे। लालू यादव के करीबी सांसद प्रेम गुप्ता के एक कर्मचारी विजयपाल त्रिपाठी के आवास पर हुई छापेमारी में तेजस्वी के हस्ताक्षर से नौ फरवरी 2016 को मेसर्स ओलिव ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स नक्षत्र बिजनेस लिमिटेड और मेसर्स यश वी ज्वेल लिमिटेड को दिए गए चेक बरामद हुए हैं।

तेजस्वी यादव ने 29 अगस्त 2017 को पटना के आयकर भवन में पूछताछ के दौरान गलत जानकारी दी थी कि एबी एक्सपोर्ट की लेखा बही कंपनी के दिल्ली के रजिस्टर्ड ऑफिस में रहती है जबकि वह छापेमारी में गायब मिली। जदयू नेता नीरज कुमार ने तेजस्वी पर तंज कसते हुए कहा है कि इस समय उन्हें बंगले को छोड़कर अपने ऊपर चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इस बीच तेजस्वी यादव ने 1 पोलो रोड वाले बंगले में शिफ्ट होने से इनकार कर दिया है और वह अब 10, सर्कुलर रोड स्थित अपने माता-पिता के घर में रहेंगे।

उप-मुख्यमंत्री बनने से पहले वह उसी घर में पिछले कई वर्षों से रहते आ रहे थे। बिहार ही नहीं, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जब जगह की एक जैसी कथा-कहानियां हैं। नेता हों या ब्यूरोक्रेट, जांच-परख में पूरी की पूरी दाल ही काली नजर आती है। कौन कह सकता है कि कब्ज छोड़ दो, बिहार की तो बात ही कुछ अलख निरंजन है। कोई व्यक्ति, जिसके लिए नेता बनता है, वही करतब दिखाना बंद कर दे तो फिर सियासत करने का भला क्या फायदा!

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