लंदन की एक स्टूडेंट की मदद से यूपी के सुदूर गांव के 1,000 लोगों को मिली बिजली

एक विदेशी छात्रा ने उत्तर प्रदेश के गाँवों को दी रोशनी... 

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सवा सौ करोड़ की आबादी वाले मुल्क यानी भारत में हर पांचवे में से एक व्यक्ति बिजली की पहुंच से दूर है। भारत के ग्रामीण इलाकों में अधिकांश आबादी बिजली की सुविधा से वंचित है या उन्हें पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती, जिससे उन्हें सामाजिक और आर्थिक विकास के अवसर नहीं मिल पाते और वे विकास की रेस में काफी पीछे छूट जाते हैं। इस स्थिति में उत्तर प्रदेश के सर्वांतर गांव में लगभग 100 घरों में आज बिजली की रौशनी चमचमा रही है। इसका पूरा श्रेय इंग्लैंड की एस्टीम्ड इम्पीरियल कॉलेज की स्टूडेंट क्लेमेंटाइन चैम्बन को देना चाहिए। जिनकी पहल से यह संभव हो पाया।

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इंग्लैंड की क्लेमेंटाइन चैम्बन ने उत्तर प्रदेश में मिनी सोलर ग्रिड स्थापित करके लगभग 1,000 लोगों को बिजली मुहैया कराई।

एक आकलन के अनुसार अगले तीन साल में देश में सौर ऊर्जा का उत्पादन बढ़ कर 20 हजार मेगावॉट होने की संभावना है और इसी के चलते अब विदेशी कंपनियों की निगाहें भी भारत पर लगी हुई हैं। क्योंकि बीते तीन साल में भारत में सौर ऊर्जा का उत्पादन स्थापित क्षमता से चार गुना बढ़कर 10 हजार मेगावॉट पार कर गया है, जो देश की बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता का 16 प्रतिशत है।

सवा सौ करोड़ की आबादी वाले मुल्क यानी भारत में हर पांचवे में से एक व्यक्ति बिजली की पहुंच से दूर है। भारत के ग्रामीण इलाकों में अधिकांश आबादी बिजली की सुविधा से वंचित है या उन्हें पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती, जिससे उन्हें सामाजिक और आर्थिक विकास के अवसर नहीं मिल पाते और वे विकास की रेस में काफी पीछे छूट जाते हैं। इस स्थिति में उत्तर प्रदेश के सर्वांतर गांव में लगभग 100 घरों में आज बिजली की रोशनी चमचमा रही है, जिसका पूरा श्रेय इंग्लैंड की एस्टीम्ड इम्पीरियल कॉलेज की स्टूडेंट क्लेमेंटाइन चैम्बन को देना चाहिए। जिनकी पहल से यह संभव हो पाया।

क्लेमेंटाइन केमिकल इंजिनियरिंग डिपार्टमेंट में पीएचडी फाइनल ईयर की छात्रा हैं। वह सोशल उद्यम स्टार्टअप कंपनी ऊर्जा के साथ मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने मिनी सोलर ग्रिड स्थापित करके लगभग 1,000 लोगों को बिजली मुहैया कराई। उन्हें अब बल्ब जलाने, फोन चार्जिंग और पंखे चलाने के लिए बिजली आने का इंतजार नही करना पड़ता है।

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आज देश में पारंपरिक ही नहीं गैर-पारंपरिक ऊर्जा का भी भरपूर उत्पादन हो रहा है और यह सौर ऊर्जा के बहुत बड़े बाजार के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। एक आकलन के अनुसार अगले तीन साल में देश में सौर ऊर्जा का उत्पादन बढ़ कर 20 हजार मेगावॉट होने की संभावना है और इसी के चलते अब विदेशी कंपनियों की निगाहें भी भारत पर लगी हुई हैं। क्योंकि बीते तीन साल में भारत में सौर ऊर्जा का उत्पादन स्थापित क्षमता से चार गुना बढ़कर 10 हजार मेगावॉट पार कर गया है, जो देश की बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता का 16 प्रतिशत है। 

ऊर्जा के क्षेत्र में ऐसा ही एक सोशल स्टार्टअप शुरू कर उत्तर प्रदेश के एक गांव को रोशन कर रही हैं।

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ऊर्जा सोशल स्टार्टअप की स्थापना 2015 में क्लेमेंटाइन और उनके सहयोगी भारतीय उद्यमी अमित रस्तोगी ने मिलकर की थी। इस स्टार्टअप का उद्देश्य उन लोगों तक बिजली की सुविधा उपलब्ध कराना था जिनके गांव में लाइट नहीं पहुंच सकी है। इसके साथ ही वे स्थायी आर्थिक विकास के लिए भी सोच रहे थे। 

 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' से बात करते हुए क्लेमेंटाइन ने अपना प्रॉजेक्ट सफल होने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, 'हम अपने खुश ग्राहकों के चेहरे पर खुशी देखकर काफी अच्छा फील कर रहे हैं। उनके बच्चों को पढ़ने के लिए अब बिजली मिल जा रही है। अब उम्मीद है कि स्कूल में एक कंप्यूटर सेंटर भी खुल जाएगा तब इस गांव के बच्चे कंप्यूटर सीख सकेंगे।'

इस गांव के अधिकतर लोग खेती-किसानी और पशुपालन जैसे काम करते हैं। बिजली की सुविधा आ जाने के बाद उन्हें काफी सहूलियत होगी और मोबाइल चार्ज करने के लिए 5 किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ेगा। क्लेमेंटाइन बताती हैं कि सोलर पावर प्लांट लग जाने से किसानों को सिंचाई के लिए डीजल पंप पर भी निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। अब सिंचाई की उनकी सारी जरूरतें सोलर पंप से ही पूरी हो जाएंगी। सोलर सिस्टम के आने के बाद गांव में सिंचाई के लिए ऐसे पंप की मांग काफी बढ़ गई है।

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क्लेमेंटाइन कहती हैं, कि आने वाले समय में डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी ही होगी इसलिए सोलर पैनल के जरिए बिजली उत्पादित करना काफी सस्ता और वैकल्पिक होगा। क्लेमेंटाइन आने वाले समय में ऐसे ही कुछ और गांवों में सोलर पावर प्लांट स्थापित करेंगी। इस प्रॉजेक्ट के तहत सोलर प्लांट लगाने के बाद हर घर में स्मार्ट मीटर लगाए जाते हैं और रियल टाइम बिजली की खपत मापी जाती है। इस डेटा को 'ऊर्जा' कंपनी अपनी सर्विस को और बेहतर करने के काम में लाएगी।

इम्पीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के मुताबिक इस प्रॉजेक्ट के अगले चरण के तहत सोलर एनर्जी और बायोमास से बिजली के उत्पादन के लिए हाइब्रिड मिनी ग्रिड स्थापित किए जाएंगे। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक इससे बड़े पैमाने पर बिजली की सप्लाई सुलभ हो सकेगी और आटा चक्की, सिलाई, वॉटर सप्लाई जैसे छोटे-छोटे उपक्रमों को लाभ हो सकेगा।

क्लेमेंटाइन ने अपने चीफ टेक्नॉलजी ऑफिसर प्लांट को डिजाइन किया। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि गांव के हर व्यक्ति को आसानी के साथ बिजली की सेवाएं मुहैया कराई जा सकें। उन्हें कम खर्च में टेक्नॉलजी को इस्तेमाल करने में महारत हासिल हो गई है। क्लेमेंटाइन ने प्रतिष्ठित कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से बायोमास पावर में मास्टर डिग्री भी हासिल की है।

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क्लेमेंटाइन नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर काम कर पिछड़े समाज में सोशियोइकोनॉमिक और पर्यावरण से जुड़ा बड़ा बदलाव ला रही हैं। ऊर्जा टीम 2018 तक और मिनी ग्रिड स्थापित करने के लिए फंड जुटा रही है।

भारत में ऊर्जा की खपत को पूरा करना आसान नहीं है। इस लिहाज से सोलर पावर प्लांट की बड़े पैमाने पर जरूरत होगी। हाल ही में नीति आयोग ने एक ड्राफ्ट में कहा है कि देश में छत पर सौर प्रणाली लगाना 2040 एक सामान्य चलन बन जाएगा। हालांकि इसी के साथ यह भी कहा गया है कि बिजली का हिस्सा बढ़ जाने और सभी को बिजली पहुंचाने की कवायद में घरों की छतों पर सौर प्रणाली का दोहन करना शायद व्यावहारिक न हो।

-इस स्टोरी की सभी तस्वीरें क्लेमेंटाइन चैम्बन के इंस्ताग्राम प्रोफाईल और लिंक्डइन से ली गई हैं।

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