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समाज में महिला लीडर्स की संख्या में निरंतर गिरावट आ रही हैः अंबिगा धीरज

कई मामलों में महिलाएं कुछ व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के चलते करियर को पीछे धकेल देती हैंमहिलाओं पर करियर में अच्छा करने का सामाजिक दबाव कम होने की बात कहती हैं अंबिगाअपनी कंपनी ‘मू सिगमा’ को एक बड़ी विज्ञान कंपनी के रूप में स्थापित करने का है सपना

Pooja Goel
25th Jun 2015
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नीचे दिखाये गए वीडियो में ‘मू सिगमा’ की अंबिगा धीरज बता रही हैं कि कैसे सामाजिक अपेक्षाओं के चलते महिलाओं और उनकी महात्वाकांक्षाओं के बीच की खाई चैड़ी होती जा रही है और ऐसे में महिला अगुवाओं की संख्या में लगातार कमी आती जा रही है। इसके अलावा वे मू सिगमा के माध्यम से पूरे किये जाने वाले अपने उद्देश्यों के बारे में भी बता रही हैं। पाठकों के लिये इस वीडियो की प्रतिलिपि भी नीचे उपलब्ध है।


महिला इंजीनियर

क्या वरिष्ठ पदों को संभालने के लिये महिला इंजीनियरों को तैयार करना आसान काम है? वर्तमान परिदृश्य पर नजर डालें तो हम यह पाते हैं कि प्रारंभिक स्तर के पदों को भरने के लिये महिला इंजीनियरों और साख्यिकिविदों को तलाशना कोई मुश्किल काम नहीं है लेकिन कई बार हम यह पाते हैं कि ये महिलाएं कुछ व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के चलते अपने कदम पीछे खींच लेती हैं। हमारा प्रयास महिलाओं के लिये एक ऐसा माहौल तैयार करना है जो उन्हें उनका काम जारी रखने के लिये प्रेरित करे। हम लगातार इस प्रयास में हैं कि कैसे लोगों को उनके काम और जीवन के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद की जा सके। लेकिन जैसे-जैसे आप ऊपर की तरफ जाते हैं वैसे-वैसे ही महिलाओं की संख्या में कमी देखने को मिलने लगती है।

हो सकता है कि कुछ मामलों में व्यक्तिगत प्राथमिकताएं इन महिलाओं के जीवन पर हावी हो जाती हों या फिर करियर के नजरिये से कुछ महिलाएं अधिक महत्वाकांक्षी न होती हों। समाज आपपर बहुत अधिक दबाव नहीं डालता है। जब कोई पुरुष अपने करियर में सफल नहीं हो पाता है तो उसके चारों तरफ बहुत अधिक सामाजिक दबाव होता है लेकिन अगर किसी महिला के करियर के साथ ऐसा होता है तो उनपर कुछ खास दबाव नहीं होता है।

क्या ऐसा होना वास्तव में बुरा है? मुझे नहीं मालूम। लेकिप अपने परिवार की देखभाल करने में मिलने वाला संतोष भी कुछ कम नहीं होता है। मुझे नहीं लगता है कि अपने करियर में सुल होने के साथ ही सबकुछ समाप्त हो जाता है बल्कि अगली पीढ़ी को सामाजिक मूल्यों के साथ बढ़ते हुए देखना भी अपने आप में एक बेहद सुखद अनुभव होता है। लेकिन अगर कोई महिला अपने करियर को लेकर संजीदा और जुनूनी हो तो फिर उसके रास्ते में कोई भी रुकावट नहीं आ सकती है।


‘मू सिगमा’ को लेकर महत्वाकांक्षा

हम अपने आपको सबसे बड़ी निर्णायक विज्ञान कंपनी के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि हमारा प्रत्येक उपभोक्ता ‘मू सिगमा’ को अपने अंदर महसूस करे और भारत से कुछ नया पाने में सफल हो।


एक पति और पत्नी की टीम होने के मायने

मेरे लिये व्यवहार से कोई फर्क नहीं पड़ता बल्कि आशय मायने रखता है। हम दोनों कई विषयों पर तर्क-वितर्क करते हुए लड़ते हैं लेकिन हम दोनों को यकीन है कि हम एक ही कश्ती के सवार हैं और हमारा अंतिम लक्ष्य एकसमान है।


सलाह

मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगी कि अगी जीवन आपके हाथ में नींबू दे तो आपको उससे नींबूपानी तैयार करना चाहिये यानि कि आपको अपने सामने आने वाले मौकों को हाथ आगे बढ़ाकर लपक लेना चाहिये। जब भी मेरे सामने कोई परेशानी आती है तो मैं उसे एक अवसर के रूप में देखने के लिये खुद को तैयार करती हूँ।

अपने अंदर की ज्वाला को जलाए रखें। मुझे नही ंलगता है कि हमें हमेशा इस सोच में पड़े रहना चाहिये कि चूंकि हम महिला हैं इसलिये हम अल्पमत में हैं। अपनी सकारात्मकता को जीवित रखें।


आने वाले पांच वर्ष

हम अधिक उपभोक्ताओं को देख पा रहे हैं, दिलचस्प उत्पादों को बाजार में लाने के प्रयास में हैं और इस बात के प्रयास कर रहे हैं कि हम सिर्फ अमरीका में ही सामित न रहें बल्कि दुनिया के दूसरे महाद्वीपों पर भी हमारी उपस्थिति महसूस की जा सके और हमें अपने उद्देश्य में कुछ हद तक सफलता मिलती भी दिखाई दे रही है। हम अपने उपभोक्ता आधार में कई नए बदलाव होते हुए देख रहे हैं।


आईपीओ

यह हमारी भविष्य की योजनाओं में है। लेकिन फिलहाल हमारा ध्यान इस ओर न होकर दूसरी अन्य चीजों में लगा हुआ है। फिलहाल हम अपना सारा ध्यान सिर्फ अच्छा काम करने में लगा रहे हैं। और मेरे लिये यही एक चीज है जो सबसे अधिक मायन रखती है।

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