‘‘हमने एक रुपये किलो की दर से प्याज बेचकर क्या सीखा?’’ एक स्टार्टअप के विकास की कहानी

(यह लेख मूलतः अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है और इसके लेखक निन्जाकार्ट टीम के एक सदस्य हैं)

‘‘हमने एक रुपये किलो की दर से प्याज बेचकर क्या सीखा?’’ एक स्टार्टअप के विकास की कहानी

Saturday September 26, 2015,

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प्याज एक ऐसी खाद्य वस्तु है जो हम भारतीयों को वास्तव में बहुत पसंद है फिर वाहे वह करी में प्रयोग की जाए या फिर कच्चे रूप में। अमूमन ऐसा होता है कि इनकी कीमतें आसमान छूने लगती हैं जिससे लगभग हर घर की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं। चूंकि निंजाकार्ट एक ऐसी कंपनी है जो अपने उपभोक्तों के हितों का ध्यान रखना जानती है इसलिये हमारा प्रयास रहता है कि हम उस समय उनकी अधिक से अधिक सेवा करें जब उन्हें हमारी सबसे अधिक जरूरत होती है। और हम ऐसा करने में तब सफल रहे जब हम मात्र 1 रुपये किलो की दर पर प्याज बेचने के अभियान को सफल बनाने में कामयाब रहे। हमारा इरादा इस प्रस्ताव के माध्यम से प्याज की कीमतों में हुई अप्रत्याशित वृद्धि के चलते उपभोक्ताओं के सामने आई असुविधा को दूर करने का था। आईये आज हम आपको बताते हैं कि हमनें ऐसा कैसे किया और इस पूरी प्रक्रिया में हमनें क्या-क्या सीखाः

बड़ी बिक्री से पहले की तैयारियां

यह हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अभियान था और मार्केटिंग से लेकर संचालन के काम तक में लगा प्रत्येक व्यक्ति यह सुनिश्चित करने के लिये दिन-रात एक किये हुए था कि यह अभियान बेहतरीन तरीके से संचालित हो सके। इस पहल को पूर्णता प्रदान करने के क्रम में हमारी टीम के कई सदस्यों ने कमरतोड़ मेहनत की और वे कई रातों तक बिना सोए काम करते रहे। डेवलपर्स को अलग कर दें तो हर कोई संचालन अथवा उपभोक्ता समर्थन के काम में लगा हुआ था।

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आखिरकार हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन आ ही गया और हमने उसके लिये पहले से ही पुणे के बड़े वितरक से ए ग्रेड (उच्च श्रेणी) की करीब 10 टन प्याज की खरीद कर ली थी। एक कंपनी के रूप में हमारा विश्वास हाथ से चुना हुआ किराने का सामान उपभोक्ता तक पहुंचाने में है। यही वजह रही कि प्याज खरीदने के बाद हमारे काफी अच्छा-खासा समय और मेहनत सिर्फ यह सुनिश्चित करने में ही लगा कि हमारे उपभोक्ताओं तक बेहतरीन गुणवत्ता वाली प्याज ही पहुंचे। हमने इस प्याज को एक-एक किलो के विशेष ईको-फ्रेंडली निन्जाकार्ट थैलों में पैक किया और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने से पहले उनमें एक धन्यवाद का संदेश भी नत्थी कर दिया। इस पूरी कवायद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह था कि प्याज के इन थैलों को उन किराना दुकानों तक पहुंचाया गया जिनके साथ हमने करार किया था। यह किराना दुकानें हमारे व्यापार के माॅडल का एक अभिन्न और महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हमारा व्यापार माॅडल इस क्षेत्र के अन्य खिलाडि़यों से बिल्कुल जुदा है और हम किराना दुकानदारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। इसके अलावा हम उनका आॅफलाइन व्यापार आॅनलाइन ले जाने में भी उनकी मदद करते हैं।

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प्रारंभिक दौर

हमने अपने इस अभियान को शुक्रवार के दिन 4 सितंबर को शाम को 5 बजे प्रारंभ किया और यह अभियान अगले 48 घंटे तक चला। इस दौरान हम 20 हजार से भी अधिक उपभोक्ताओं को अपने साथ जोड़ने में सफल रहे और हमने प्रतिदिन 2800 से भी अधिक आॅर्डर सफलतापूर्वक निबटाए।

इस अभियान के चलते हमें काफी सारा आॅनलाइन व्यापार करने में सफलता मिली और नतीजतन हम कई एप्प स्टोर्स और सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर ट्रेंड करने लगे। हमारी सेवाओं से प्रसन्न कई उपभोक्ताओं ने अपने अच्छे अनुभव के बारे में ट्वीट किया और इसके अलावा हमारा उल्लेख बैंगलोर के कुछ प्रमुख स्टार्टअप्स के रूप में भी किया गया। कुल मिलाकर हमारा यह अभियान काफी सफल रहा और हमें अपनी उम्मीदों से कहीं बेहतर नतीजे प्राप्त हुए। सबसे अच्छी बात यह रही कि हम अपने अधिकतर उपभोक्ताओं के सेवा करने के अलावा उन्हें संतुष्ट करने में कामयाब रहे थे।

हमने इस अभियान से क्या सीखा

सबसे पहले हम अपनी इस मार्केटिंग रणनीति की तुलना शहरभर में प्रमुख स्थानों पर होर्डिंग लगाने जैसी किसी अन्य बड़ी गतिविधि के साथ करते हैं। शहर के प्रमुख स्थानों पर एक सप्ताह के लिये होर्डिंग लगाने का खर्चा करीब 40 लाख रुपये आता है और यह सिर्फ एक अनुमानित कीमत है क्योंकि कई प्रमुख स्थानों पर निश्चित ही खर्च कहीं अधिक होता है। हालांकि इस रणनीति का प्रयोग करके हम लोगों की नजरों में आने में तो सफल हो जाते लेकिन हम कभी भी इतने मशहूर नहीं हो पाते और इसके अलावा यह बहुत कम समय के लिये होता। इसका प्रभाव कम होता है क्योंकि आज के मार्केटिंग के दौर में लोग सीधे अपनी जरूरत के बारे में बात न करते हुए इस बारे में अधिक चर्चा करते हैं कि उसका उत्पाद क्या कर सकता है।

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इसकी तुलना में हमने मात्र एक रुपये किलो की कीमत पर प्याज बेचने के एक अधिक सरल अभियान का चुनाव किया। इस अभियान के नतीजे बहुत ही चैंकाने वाले रहे क्योंकि इसके माध्यम से हम लोगों की बुनियादी आवश्यकता को सीधे संबोधित कर रहे थे जिसके परिणामस्वरूप काफी बड़ी संख्या में लोग हमारे साथ जुड़े और हमारा यह अभियान वायरल हो गया।

-सिर्फ 20 दिनों में हम 20 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को अपने साथ जोड़ने मेें सफल रहे

-उस सप्ताह हमारी प्लेस्टोर कार्बनिक सर्च में 13 गुना की वृद्धि देखने को मिली

-हमारी प्लेस्टोर की रैंकिंग में अभूतपूर्व सुधार हुआ

-हम एप्प स्टोर के अलाव प्ले स्टोर पर भी ट्रेंड कर रहे थे

-हमारा सीएसी 100 रुपये से भी कम था

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हमें बहुत अच्छी तरह मालूम था कि इस अभियान की सफलता के लिये डिलीवरी का काम सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण रहेगा और इससे पार पाने के लिये हमनें डिलीवरी के काम से जुड़े तीसरे पक्ष के कई खिलाडि़यों के साथ हाथ मिलाया। हमने एक डिलीवरी ग्रिड सिस्टम को तैयार किया जिसे हम आपसी बोलचाल में ‘ब्लैक बाॅक्स’ कहते हैं। इस ग्रिड की मदद से हम क्षणभर में उपलब्ध डिलीवरी नेटवर्क के सर्वोत्तम विकल्प खोजने में समर्थ हो गए। इसकी सहायता से हम अपने अधिकतर आॅर्डर की डिलीवरी मात्र 2 घंटों के भीतर करने में सफल रहे।

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यह सुनिश्चित करने के लिये हम मिलने वाले सभी आॅर्डर समय पर पूरे कर पा रहे हैं हमने एक ऐसी प्रणाली तैयार की जो हमारे डिलीवरी स्लाॅट को स्वचालित करती थी। जब भी आॅर्डर हमारी अधिकतम क्षमता को पार करने लगते थे तो अपने आप ही आर्डर लेने बंद हो जाते थे। हमें ऐसा इसलिये करना पड़ा ताकि हम पहले से लिये हुए आॅर्डर की डिलीवरी तयशुदा समय से कर सकें।

इसके अलावा यह हमारा पहला बड़ा अभियान था और एक बहुत ही दिलचस्प तथ्य सामने आया कि इसकी वजह से दूसरों को अपनी कार्यप्रणाली में बहुत सुधार करना पड़ा था। इस अभियान से पहले हमने कई बीटीएल गतिविधियों का आयोजन किया लेकिन हमेशा ही एक ठंडी और धीमी प्रतिक्रिया देखने को मिली। आज कई लोग रुककर हमसे पूछते हैं, ‘‘क्या आप वही हैं जो 1 रुपये किलो की दर से प्याज बेचते हैं?’’

लोगों से मिलने वाली इस प्रकार की प्रतिक्रिया को देखकर लगता है कि हमारा यह अभियान लोगों तक अपनी पहुंच बनाने में सफल रहा है।


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(विशेषः इस लेख में व्यक्त दर्शन और विचार पूर्णतः लेखक के हैं और ये याॅरस्टोरी के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।)