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लाखों की नौकरी और अपना देश छोड़ भारत में छोटे बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने वाली जुलेहा

एक ऐसी तुर्की महिला जिन्होंने भारत आकर अक्षम बच्चों की ज़िंदगी संवारने के लिए छोड़ दिया अपना देश...

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21st Jun 2017
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जुलेहा अपने देश में अंकारा में अच्छे खासे पैकेज पर नौकरी करती थीं। उनके पिता बड़े बिल्डर हैं और भाई कनाडा में इंजीनियर है। इतनी खुशहाल जिंदगी जीने के बावजूद सेवा का ऐसा जज्बा कि वह घर से हजारों मील दूर देश भारत में मानसिक रूप से कमजोर बच्चों की व्यथा सुन कर दौड़ी चली आईं।

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हमें अपना घर छोड़कर दूसरे शहर पढ़ने या कमाने जाने पर भी दुख होता है और जब हमें अपने भविष्य के बारे में ख्याल आते हैं तो हम चाहते न चाहते हुए भी घर छोड़ देते हैं। लेकिन दूसरों की जिंदगियों में खुशियां भरने की बात हो तो यह थोड़ा अटपटा सा लगता है। इस अटपटी बात पर आप तब आसानी से यकीन कर पायेंगे जब तुर्की की जुलेहा के बारे में जानेंगे।

तुर्की की रहने वाली जुलेहा पिछले दो साल से भारत में रहती हैं और यहां अक्षम बच्चों की मदद करती हैं और उन्हें पढ़ाती हैं। खास बात यह है कि इसके लिए वह कोई पैसा नहीं लेती हैं। करीब दो साल से तुर्की की जुलेहा कोटा में मानसिक रूप से कमजोर बच्चों की देखभाल कर रही हैं। जुलेहा अपने देश में अंकारा में अच्छे खासे पैकेज पर नौकरी करती थीं। उनके पिता बड़े बिल्डर हैं और भाई कनाडा में इंजीनियर है। इतनी खुशहाल जिंदगी जीने के बावजूद सेवा का ऐसा जज्बा कि वह घर से हजारों मील दूर देश भारत में मानसिक रूप से कमजोर बच्चों की व्यथा सुन कर दौड़ी चली आईं।

जुलेहा की भारत आने की कहानी थोड़ी दिलचस्प भी है। सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर जुलेहा की दोस्ती इंडिया के सर्वेश से हो गई थी। सर्वेश यहां राजस्थान के कोटा में मानसिक रूप से अक्षम और कमजोर बच्चों के लिए काम कर रहे थे। वहीं जुलेहा अपने देश में भी इसी फील्ड से जुड़े काम में लगी थीं।

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जुलेहा व सर्वेश में इसी बात से दोस्ती की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे बातचीत भी शुरू हो गई। चैटिंग के दौरान ही सर्वेश ने जुलेहा को यहां के मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के बारे में बताया। यह सिलसिला लंबे समय तक चला और सर्वेश ने जुलेहा को भारत आने का आमंत्रण दे दिया। जुलेहा तुर्की में एक रिहैबिलिटेशन सेंटर में काम करती थीं। कोटा में सर्वेश भी मानसिक रूप से कमजोर बच्चों पर काम कर रहे थे। यहां बच्चों के गाइडेंस का कोई खास इंतजाम नहीं था। सर्वेश ने जब ये बात जुलेहा को बताई तो वह भारत आ गईं। यह 2015 की बात है।

भारत आकर जुलेहा को सर्वेश से प्रेम हुआ और दोनों ने हिन्दू-विवाह रीति से शादी भी कर ली। अब दोनों दंपती जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की देखभाल कर उनकी जिंदगी में खुशियां बांट रहे हैं। कोटा में सर्वेश और जुलेहा के सेंटर में करीब 800 मानसिक रूप से कमजोर बच्चे हैं। उनके पुनर्वास का कोई इंतजाम नहीं है। दोनों इनकी भलाई के लिए काम पर लगे हुए हैं। जुलेहा कहती हैं, कि कोटा अच्छा शहर है। यहां आकर उन्हें काफी खुशी महसूस हुई। जुलेहा का सब्जेक्ट भी यही था। वह कहती हैं, कि 'ऐसे बच्चे मेरे लिए आत्मा के समान है। मैं इंडिया में रहकर नि:स्वार्थ भाव से सेवा करना चाहती हूं।'

जुलेहा के लिए पैसा उतना इम्पॉर्टेंट नहीं है, जितना कि उनका अपना काम। उनके पास पैसों की कमी वैसे ही नहीं है। पिता बिल्डर हैं और इकलौती बेटी होने की वजह से उन्हें पैसों की कोई कमी नहीं। इसके अलावा वह खुद महीनें में लाखों रुपये कमा रही थीं, लेकिन सेवा का जुनून उन्हें भारत खींच लाया। अब वह अपने जुनून और प्रेम के साथ खुशी से जीवनयापन कर रही हैं।

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