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दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में 14 शहर भारत केः डब्लूएचओ रिपोर्ट

कानपुर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर...

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3rd May 2018
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस रिपोर्ट को तैयार करने में सिर्फ 32 भारतीय शहरों के आंकड़ें को शामिल किया है। इसमें उत्तर प्रदेश के सिर्फ चार शहरों के आकड़ों लिए गए हैं। जबकि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलकर देश के 300 शहरों में वायु गुणवत्ता की निगरानी करते हैं।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर


भारत के 14 शहरों का इसमें शामिल होना इसलिए भी चिंता पैदा करती है क्योंकि अभी हमारे देश में वायु प्रदूषण संकट से निपटने के लिये बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने वर्ष 2016 में दुनिया के सबसे 15 प्रदूषित शहरों की सूची जारी की है, जिनमें 14 शहर भारत के हैं। हालांकि रिपोर्ट में शामिल पूरी दुनिया के 859 शहरों की वायु गुणवत्ता के आंकड़ों को देखें तो यह चिंता बढ़ाने वाली है। भारत के 14 शहरों का इसमें शामिल होना इसलिए भी चिंता पैदा करती है क्योंकि अभी हमारे देश में वायु प्रदूषण संकट से निपटने के लिये बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

इसी साल के शुरू में ग्रीनपीस इंडिया ने जारी अपनी रिपोर्ट एयरोप्किल्पिस 2 में भी 280 भारतीय शहरों के आंकडों को शामिल किया था।इस रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया था कि 80 प्रतिशत शहरों की हवा सांस लेने योग्य नहीं है, जो डब्लूएचओ की रिपोर्ट से भी ज्यादा खतरनाक तस्वीर पेश करती है।

डाटा की कमी एक बड़ी चुनौती

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस रिपोर्ट को तैयार करने में सिर्फ 32 भारतीय शहरों के आंकड़ें को शामिल किया है। इसमें उत्तर प्रदेश के सिर्फ चार शहरों के आकड़ों लिए गए हैं। जबकि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलकर देश के 300 शहरों में वायु गुणवत्ता की निगरानी करते हैं। फिर भी, चौंकाने वाला तथ्य यह है कि डब्लूएचओ ने सिर्फ 32 शहरों का डाटा लिया है। शायद यह इसलिए हुआ है कि बाकी सभी शहरों के वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। अगर यह आंकड़े डब्लूएचओ के पास उपलब्ध होते तो लिस्ट में और भी कई भारतीय शहरों के नाम शामिल हो सकते थे!

राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम में शामिल 100 अयोग्य शहरों के बीच अंतर

पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम के भीतर 100 अयोग्य शहरों को चिन्हित किया है, हालांकि इस कार्यक्रम में डब्लूएचओ रिपोर्ट में शामिल सबसे प्रदूषित 14 शहरों में से 3 शहर गया, पटना और मुजफ्फरपुर गायब हैं।

ग्रीनपीस इंडिया के सीनियर कैंपेनर सुनील दहिया कहते हैं, "डब्लूएचओ की रिपोर्ट अपने आप में पूरा नहीं है क्योंकि उसमें कई साल के पुराने आंकड़ों को मिला दिया गया है जबकि वास्तव में भारत में स्थिति और भी खराब है। इसलिए यह जरुरी है कि राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम में प्रदूषण को कम करने के लिये स्पष्ट लक्ष्य और निश्चित समय सीमा को शामिल किया जाये।"

चीन की वायु गुणवत्ता में तुलनात्मक रूप से सुधार

अगर हम कुछ साल पहले के आंकड़ों देखें तो हम पाते हैं कि 2013 में विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में चीन के कई शहरों का नाम आते थे, लेकिन पिछले सालों में चीन के शहर कार्ययोजना बनाकर, समयसीमा निर्धारित करके और अलग-अलग प्रदूषण कारकों से निपटने के लिये स्पष्ट योजना बनाकर वायु गुणवत्ता में काफी सुधार कर लिया है। लेकिन इसी स्पष्टता का अभाव प्रस्तावित राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के ड्राफ्ट में स्पष्ट रूप से दिख रहा है

डब्लूएचओ रिपोर्ट की प्रमुख बातें-

1- रिपोर्ट में यह बात भी सामने आयी है कि 70 लाख लोगों की पूरी दुनिया में मौत बाहरी और भीतर वायु प्रदूषण की वजह से होती है।

2- वायु प्रदूषण से मरने वाले लोगों में 90 प्रतिशत निम्न और मध्य आयवर्ग के देश हैं जिनमें एशिया और अफ्रीका शामिल है।

3- बाहरी वायु प्रदूषण की वजह से 42 लाख मौत 2016 में हुई, वहीं घरेलू वायु प्रदूषण जिसमें प्रदूषित ईंधन से खाना बनाने से होने वाला प्रदूषण शामिल है से 38 लाख लोगों की मौत हुई।

यह भी पढ़े: जोधपुर के स्कूली बच्चे महिलाओं के प्रति अपराध और दहेज जैसे अत्याचार को खत्म करने के लिए ले रहे शपथ

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