IIT मद्रास के वैज्ञानिकों की खोज कैंसर पीड़ितों के लिए साबित हो सकती है वरदान

IIT मद्रास के वैज्ञानिकों की मानें, तो पेन किलर गोली एस्पिरिन द्वारा किया जा सकता है कैंसर का इलाज।

IIT मद्रास के वैज्ञानिकों की खोज कैंसर पीड़ितों

के लिए साबित हो सकती है वरदान

Monday May 01, 2017,

4 min Read

पिछले कुछ सालों से कई वैज्ञानिकों ने सामान्य सिरदर्द की दवा ऐस्पिरिन के बारे में बताया है, कि इसमें कैंसर का इलाज करने की क्षमता है। हालांकि, वे इसको लेकर बिल्कुल निश्चित नहीं थे कि ये कैसे किया जा सकता है। लेकिन यदि The Times of India की रिपोर्ट पर जायें, तो IIT मद्रास के वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि ये सस्ती और सामान्य-सी दवा कैंसर कोशिकाओं को कैसे नष्ट कर सकती है।

<p style=

फोटो साभार: Pixabay

a12bc34de56fgmedium"/>कैंसर जो कि हमेशा से ही एक जानलेवा बिमारी के रूप में हमारे सामने कई सारे सवाल लेकर खड़ा हो जाता है, अब उसका इलाज मुमकिन है। यदि हम IIT मद्रास के वैज्ञानिकों की बातों पर जायें तो, ये इलाज मुमकिन है और वो भी एक मामूली-सी दवाई एस्परिन से। 

कई लोगों के लिए ये विश्वास करना मुश्किल है, कि इतनी सस्ती एक एंटीबायोटिक से कैंसर का इलाज किया जा सकता है। फिर भी ये हालिया अनुसंधान कैंसर पीड़ितों के लिए आशा की एक किरण के रूप में आया है। अधिक से अधिक लोगों को कैंसर से पीड़ित होने के जोखिम के साथ, ये खोज एक बड़ी सफलता के रूप में सामने आयी है और साथ ही सस्ते कैंसर उपचार का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती हैं।

एस्पिरिन, जो एक गैर-स्टेरायड, एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा है और इसके बारे में बताया गया है कि ये वोल्टेज-डिपेंडेंट एनिओन चैनल (VDAC) नामक प्रोटीन में होने वाले घातक कोशिकाओं के इलाज में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है। ये अध्ययन साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इंडिया टुडे के अनुसार IIT मुंबई में जैव प्रौद्योगिकी के प्रोफेसर अमल कांती बेरा का कहना है, कि

'ये दवा कैंसर कोशिकाओं के मिटोकोंड्रिया (mitochondria) में कैल्शियम आयनों को उच्च स्तर पर ले आती है। कैल्शियम का ऊंचा स्तर मिटोकोंड्रिया (mitochondria) को भोजन से ऊर्जा में बदलने से रोकता है। एस्पिरिन इस ऊर्जा उत्पादन को रोकता है और सेल को मारने वाले विषाक्त पदार्थों का उत्सर्जन करता है।'

शोधकर्ता देबंजान तिवारी, (जिन्होंने तीन साल पहले जब प्रोटीन पर अपना पीएचडी कार्य शुरू किया था तब जानवरों पर अध्ययन के दौरान उन्हें एस्पिरिन में कैंसर के प्रतिरोधक गुणों का पता चला था) ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया,

'ये अध्ययन औषधि शोधकर्ताओं को और अधिक शक्तिशाली कैंसर विरोधी दवाओं को बनाने में मदद करेगा। जब हम ये जानते हैं कि एक अणु कैसे काम करता है, तब नई दवा की खोज का रास्ता थोड़ा आसान हो जाता है। अनुसंधान से ये पता चला है कि हर दिन एस्पिरिन की एक कम खुराक उच्च जोखिम वाले लोगों में हृदय रोगों के जोखिम को कम कर सकती है। हमें उम्मीद है कि कैंसर पर भी इसका ऐसा ही प्रभाव होगा।'

साथ ही अमल कांती बेरा ने ये भी कहा,

'हम ये नहीं कह सकते हैं, कि एस्पिरिन का सीधे कैंसर विरोधी दवा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि अभी इस पर बड़े ​​अध्ययनों की आवश्यकता है। लेकिन हम जानते हैं, कि नाउम्मीदी के इस अँधेरे में हमें ज्योति की एक किरण दिखाई दे रही है।'

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की 2016 की एक रिपोर्ट में बताया गया था, कि उस साल नये कैंसर के मामलों की कुल संख्या 14.5 लाख रहने का अनुमान था, जिसके कि 2020 तक लगभग 17.3 लाख तक पहुंच जाने की संभावना है। 2016 में कैंसर से ग्रस्त लोगों की संख्या लगभग 7.36 लाख से अधिक होने का अनुमान था और वो आंकड़ा 2020 तक 8.8 लाख तक पहुंच सकता है। आंकड़ों के मुताबिक, ये भी पाया गया, कि केवल 12.5 प्रतिशत कैंसर से पीड़ित ही शुरुआती चरणों में उपचार के लिए आते हैं।

कई लोगों के लिए ये विश्वास करना मुश्किल है, कि इतनी सस्ती एक एंटीबायोटिक से कैंसर का इलाज किया जा सकता है। फिर भी ये हालिया अनुसंधान कैंसर पीड़ितों के लिए आशा की एक किरण के रूप में आया है। अधिक से अधिक लोगों को कैंसर से पीड़ित होने के जोखिम के साथ, ये खोज एक बड़ी सफलता के रूप में सामने आयी है और साथ ही सस्ते कैंसर उपचार का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती हैं।