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सौंदर्य निखारने का प्रेम बन गया उद्यम, त्वचा और केश के उपचार में शुभा धर्माना ने बनाया शानदार मुक़ाम

ग्लैमर की दुनिया छोड़ी, डाक्टर बनीं ... लोगों की खूबसूरती निखारते-निखारते बनी उद्यमी... अपने देश को कुछ देने की प्रबल इच्छा लिए यूके से भारत लौटने पर हुआ धोखा, लेकिन अपने आप को संभाला, उठाया और फिर सौंदर्य उपचार के क्षेत्र में किया स्थापित ....कई सेलीब्रेटीज़ को भी दी सेवाएँ, उनका भी रंग-रूप निखारा ....विदेश में विख्यात सौंदर्य विशेषज्ञों से सीखी तकनीक से सौंदर्य निखारने के लिए किये कामयाब प्रयोग.. और स्थापित किये हैदराबाद और बैंगलूरू में अपने क्लिनिक 

13th Jun 2016
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ग्यारह साल तक यूके में डाक्टरी करने के बाद जब शुभा धर्माना उद्यमी बनने के लिए स्वदेश आयीं तब उनके साथ धोखा हुआ। उनके साथ वादाखिलाफी की गयी। एक रसूख़दार नामचीन शख्सियत ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि भारत में डर्मेटालॉजी क्लिनिक की एक शृंखला शुरू की जाएगी और उन्हें इसका प्रमुख बनाया जाएगा। इसी भरोसे पर वे यूके से भारत लौट आयीं। अपने देश में काम करने की ख्वाहिश में उन्होंने यूके में अपना बना बनाया करियर छोड़ दिया। नए-नए सपने लिए , ख़ुशी और उम्मीदों से भरे मन से वे स्वदेश आ गयीं ।लेकिन उनके साथ धोखा हुआ। उस शख्सियत ने शुभा धर्माना से यह कहते हुए डर्मेटोलॉजी क्लीनिक की शृंखला शुरू करने से इन्कार कर दिया कि इन्कम टैक्स की कुछ समस्याओं के कारण वे यह कारोबार शुरू नहीं कर सकते हैं। उस शख्सियत की इस वायदाखिलाफी ने शुभा धर्माना को बुरी तरह से हिलाकर रख दिया । ये उनके लिए अपने जीवन में सबसे बड़ी मुसीबतों वाला समय था। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। 

यूके में वे बतौर डाक्टर काफी प्रसिद्धि पा चुकी थीं। केश और त्वचा को निखारने के मकसद से दूर-दूर से लोग सलाह और इलाज के लिए उनके पास आया करते थे । शुभा धर्माना लोगों की ख़ूबसूरती निखारते हुए आराम से जी रही थीं। ज़िंदगी मज़े से चल रही थी। खूब नाम था और अच्छी कमाई भी । धन-दौलत थी, शोहरत थी। बड़ी खुशहाल ज़िंदगी छोड़कर वे भारत आयी थीं, यह सपना लेकर कर कि यूके में जो सेवाएँ वे दे रही हैं, वही सबकुछ अपने देश में करेंगी , लेकिन उस धोखे ने सारे सपने चकनाचूर कर दिये थे। यूके से तो वे सबकुछ निबटाकर आयी थीं और यहाँ के सारे रास्ते बंद हो गये थे। 

शुभा धर्माना को स्वदेश-वापसी पर काफी सारी दिक्कतें पेश आयीं। मुश्किल भरे लम्हों से उबरने के लिए उन्होंने हैदराबाद में एक अस्पताल में नौकरी कर ली। बहुत ही कम तनख्वा पर उन्होंने इस अस्पताल में नौकरी शुरू की । इसके बाद फिर अस्पताल बदलते गये और उन्होंने अपनी सेवाओं से अपने आपको उन्नत किया। एक दिन उन्होंने वो स्थान प्राप्त कर ही लिया, जिसकी तमन्ना लिये वो यूके से लौटकर भारत आयी थी। अपने बलबूते ही उन्होंने डर्मेटोलॉजी क्लिनिक्स की एक शृंखला शुरू कर ली। अब वे एक कामयाब उद्यमी भी हैं।

डॉ. शुभा धर्माना की कहानी काफी रोचक है। कहानी एक ऐसी लड़की और महिला की है जिसने ग्लैमर की दुनिया से चिकित्सा की दुनिया में कदम रखा और फिर लोगों को सुंदर बनाने की कला से उन्हें प्रेम हो गया। एक मायने में वे लोगों को सुन्दर बनाने वाली कलाकार बन गयीं । वे केश एवं त्वचा उपचार और सौंदर्य निखार के क्षेत्र में दुनिया के मशहूरतरीन लोगों की सूची में अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं। ब्यूटी एक्सपर्ट, डर्मेटालॉजिस्ट, हेयर ट्रांस्प्लैंट सर्जन और लेज़र स्पेशलिस्ट के रूप में उन्होंने खूब प्रसिद्धि पायी है। उनके द्वारा स्थापित लीज्वेन ग्रूप ऑफ मेडस्पास की शाखाएँ हैदराबाद और बैंगलूर में कई लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।

शुभा धर्माना की ज़िंदगी के कई दिलचस्प पहलू हैं । वे बचपन से ही मॉडल बनना चाहती थीं । कालेज के दिनों में वे फिल्मों में काम करने और बड़ी अदाकारा बनने के सपने भी देखती थीं। चूँकि माता-पिता खूब पढ़े-लिखे थे और मॉडलिंग और फ़िल्मी करियर को थोड़े-से समय वाला करियर मानते थे उन्होंने शुभा को डाक्टर बनने की सलाह दी । शुभा के पिता आंध्र विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान और जन-प्रबंधन विभाग के प्रमुख थे। वे राजनीति शास्त्र के बड़े विद्वान् थे। उनका खूब रुतबा था । विदेश में भी उनकी ख्याति थी ।  माँ पुरातत्व विषय की ग्रैज्वेट थीं। वह लायब्ररियन के तौर पर काम करती थीं। उन्हें संगीत का शौक था और ऑल इंडिया रेडियो पर उनके कार्यक्रम भी हुआ करते थे। उन्हीं दिनों उन्होंने एक ब्यूटीपार्लर भी खोला था। ऐसे माहौल में शुभा की परवरिश बेटी कम और बेटे के रूप में अधिक हुई। एनसीसी में भाग लेना, स्कूल में खेल एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हमेशा आगे रहना, मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाना, जैसी कई गतिविधियों ने उन्हें विशाखापट्टणम के केंद्रीय विद्यालय में विद्यार्थियों का लीडर बना दिया था। स्कूल के ज़माने से ही वे अच्छी वक्ता मानी जाती थीं।

स्कूल से जैसे ही शुभा विशाखापट्टणम के एवीएन कॉलेज पहुँची, सुंदर कद-काठी की होने के कारण बहुत जल्द वे सारे कॉलेज में मशहूर हो गयीं। ग्लैमर की दुनिया से जुडीं, मॉडलिंग की, फैशन शोज़ में हिस्सा लेकर रैंप वॉक किया। वे वैज़ाक की दूसरी सबसे लंबी लड़की के रूप में भी काफी चर्चा में रहीं। उन्हीं दिनों एक फिल्म के गीत में भी उन्होंने बतौर अभिनेत्री काम किया। अभी ग्लैमर की उस चकाचौंध दुनिया के प्रवेश द्वार पर ही थी कि उन्हें अपने पिता की बात मानकर वहाँ से लौटना पड़ा। शुभा ने मिस वैज़ाक, मिस स्टील सिटी , मिस आंध्र जैसे कई खिताब भी जीते। वे फेमिना मिस इंडिया और मिस ग्लाडरैग्स के फाइनल तक भी पहुँचीं, लेकिन उनके माता-पिता को यह लाइन पसंद नहीं थी। उनके पिताजी मानते थे कि यह शार्ट टर्म की चीज है। मॉडलिंग- लॉंग टर्म छाप छोड़ने वाला करियर नहीं है।

शुभा कहतीं हैं,"वैसे मेरा मन पढ़ाई पर कम था। मैं डाक्टर नहीं बनना चाहती थी, ग्लैमर मेरी प्राथमिकता बन गयी थी, लेकिन घर में मुझे कहा गया कि पढ़ने पर ध्यान दो। मैं हमेशा फर्स्ट या सेकंड रैंकर ही रही। तीसरा रैंक हमारे घर पर मंज़ूर ही नहीं था। पढ़ाई में दिलचस्पी ज्यादा नहीं थी फिर मैंने कभी कम नंबर नहीं लाये और माता-पिता को निराश नहीं किया।"

शुभा नहीं चाहती थीं कि वे ग्लैमर की दुनिया से दूर हों, लेकिन माता-पिता उन्हें डाक्टर बनाना चाहते थे । टकराव की स्थिति थी, लेकिन इससे किसी को कोई परेशानी न हो, इसके लिए शुभा ने एक तरकीब निकाली ।उन्होंने अपने माता-पिता के सामने एक शर्त रखी । शुभा ने बताया, "मैंने शर्त रखी कि डॉक्टर बनने के बाद मुझे इस बात की छूट दी जाएगी कि मैं ग्लैमर की गतिविधियों में हिस्सा लूँ। मेरे माता-पिता ने ये शर्त मान ली । लेकिन, एमबीबीएस की पढ़ाई इतनी कठिन थी कि मुझे ग्लैमर की दुनिया छोड़नी पड़ी । हालत ऐसी हो गयी थी कि अगर मैं अपना पूरा ध्यान एमबीबीएस की पढ़ाई पर नहीं दे पाती तो मैं फेल हो जाती। डाक्टर बनने के लिए मुझे रैंप से दूर होना पड़ा । इस तरह मैंने फेमिना मिस इंडिया के फाइनल में हिस्सा लिए बिना ही अपना दिल पढ़ने में लगाने की कोशिश की।"

शुभा ने ये भी कहा, " उन्हीं दिनों मेरी मुलाकात जानी-मानी हस्ती कौशल घोष से हुई थी, उन्होंने कहा था कि मुझ में टाइलेंट बहुत है, लेकिन इसके लिए मुझे बड़ा सोचना होगा, वैज़ाक जैसी छोटी जगह से निकलना होगा। वैज़ाक में मेरी ख़ूबसूरती और काबिलियत - दोनों दब कर रह जाएगी।"

शुभा ने एमबीबीएस करने के बाद यूके का रुख किया। यहाँ मेडिकल प्रैक्टिशनर के रूप में सामान्य मामले भी देखे, एमर्जेन्सी में भी काम किया। विभिन्न अस्पतालों में काम करते हुए शुभा ने अपना शानदार करियर बनाया। यूके में उन्हें काफी कुछ सीखने का मौका मिला। एमर्जेंसी में उन्होंने देखा कि काफी गंभीर मामले आते हैं। विशेषकर अग्निदुर्घटनाओं के पीड़ितों की हालत बहुत नाज़ुक होती है। अपने झुलसे हुए शरीर और चेहरे को देखकर वे जीने की उम्मीद छोड़ देते हैं। त्वचा की बीमारियाँ लोगों को परेशान कर देती हैं। ऐसे में उन्हें अपनी माँ का ब्यूटी पार्लर याद आया। उन्हें याद आया किस तरह उनकी माँ लोगों की खूबसूरती निखार कर उन्हें खुश कर देती थीं। शुभा ने महसूस किया था कि त्वचा और केश ठीक न हो पाने की वजह से कई लोग बहुत परेशान रहते थे। शुभा ने इन्हीं लोगों की परेशानी दूर करने की ठान ली। और फिर एक दिन शुभा मेडिसिन में जनरल प्रैक्टिस से डर्मेटालॉजी की ओर मुड गयीं। उन्होंने लेज़र प्रशिक्षण प्राप्त किया और फिर यूके में उन्होंने काम करने के साथ-साथ लुटोन में दि अल्टिमेट ब्युटी और वेस्ट लंदन में कॉस्मेटिक नामक दो क्लिनिक स्थापित किये। उन्होंने नेशनल स्लिमिंग एण्ड कास्मेटिक क्लिनिक में भी काम किया। डर्मेटालोजी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त करना भी उनके लिए काफी लाभदायक सिद्ध हुआ। अपने दौर के विख्यात हेयर ट्रांस्पलैंट सर्जन डॉ. मारवान सैफी के साथ काम करते हुए उन्होंने हेयर ट्रांस्प्लैंट की आधुनिक तकनीकें सीखीं। शुभा ने  त्वचा और केश के उपचार की पद्धतियाँ सीखने के लिए खूब मेहनत की, दक्ष एवं अनुभवी सौंदर्य शास्त्रियों से त्वचारोग का उपचार सीखा। खूब नाम कमाया और पहचान भी पायी। अपने इस नये रूप के बारे में वे कहती हैं,

- जिन लोगों को स्किन और हेयर की समस्याएँ होती हैं, उनकी मानसिक स्थिति बुहत खराब होती है। वे तनाव का शिकार हो जाते हैं। लोगों से मिलना-जुलना बंद कर देते हैं। ऐसे लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए मैंने यूके से ही डर्मेटालॉजी में डिप्लोमा किया।

सौंदर्य की दुनिया में आने के बाद शुभा की जिंदगी में नया परिवर्तन आया। लोगों के चेहरों में निखार लाने के लिए कई बड़ी संस्थाओं ने उनकी सेवाएँ प्राप्त कीं। शुभा ने बहुत सारे नये -नये प्रयोग किये, जिससे न केवल लोगों की सुंदरता में निखार लाया जा सका, बल्कि बढ़ती उम्र के प्रभाव को भी कम किया जा सका। 

यूके में सबकुछ ठीक चल रहा था, जिंदगी बहुत आराम दायक और शानदार थी, लेकिन शुभा को अपने देश लौटकर यहाँ अपनी कला की महारत दिखाने की ख्वाहिश थी और उसी ख्वाहिश में उन्हें एक नामचीन व्यक्ति के हाथों धोखा खाना पड़ा। उसके बाद उन्होंने हैदराबाद के एक छोटे से अस्पताल में नौकरी की। यहाँ का वेतन यूके में मिलने वाले वेतन की तुलना में कुछ भी नहीं था। मुश्किल समय गुज़ारना था। उन्होंने फिर एक से दूसरे कई अस्पतालों में काम किया, लेकिन इससे वह संतुष्ट नहीं हुईं, क्योंकि यहाँ सारा काम पुरानी पद्धति पर चल रहा था। नये तौर तरीकों की जानकारी लोगों को नहीं थी। जिन दवाइयों और लोशन का इस्तेमाल किया जा रहा था, उनकी प्रामाणिकता भी संदेह के घेरे में थी। इस स्थिति को देखते हुए एक दिन उन्होंने सोचा कि अपना क्लिनिक शुरू करना चाहिए। फिर 2012 में माधापुर में उन्होंने अपना पहला क्लनिक डॉ. शुभा स्किन एण्ड लेज़र क्लिनिक के नाम से शुरू किया और बाद में उसे लीज्वेन ग्रूप ऑफ मेडस्पास के रूप में विकसित किया। धोखे की उस घटना से आहत होने के बाद शुभा को फिर से नयी दुनिया बसाने के लिए कुछ समय लगा ज़रूर, लेकिन उन्होंने जो कुछ अर्जित किया, जो कुछ लोगों को दिया, जिस तरह से लोगों के खूबसूरती के सपनों को आकार दिया, वह मेहनत, लगन और कामयाबी की अनोखी कहानी है। अपनी इस सफलता के बारे में शुभा कहती हैं,

- भारत लौटने के बाद मेरा पहला अनुभव बहुत खराब था, लेकिन बाद में भारत से मुझे जो कुछ मिला, वह बहुत अच्छे अनुभव थे। काफी अच्छे दोस्त मिले। लोगों के साथ काम करने का आनंद मिला। मुझे लोगों का सौंदर्य निखारने के काम से प्रेम हो गया।

आज कई फ़िल्मी सितारे भी शुभा से अपने सौंदर्य को निखारते हैं। बढ़ती उम्र का असर त्वचा और केश पर न हो इसके लिए शुभा की काबिलियत और अनुभव की मदद लेते हैं । और भी कई सेलिब्रेटीज़ उनकी सेवाएँ प्राप्त कर रहे हैं । उन्होंने अपने इस उद्यम का विस्तार करते हुए इसकी कई शाखाएँ खोलीं। उन्होंने भारत आकर कई समाचारपत्र-पत्रिकाओं के लिए सौंदर्य पर स्तंभ भी लिखे। 

इसी बीच उनकी मुलाक़ात उनके जीवन साथी से हुई और जब पति का काम बैंगलूर में शुरू हुआ तो शुभा भी बैंगलूर स्थानांतरित हुई और वहाँ भी अपना काम फैलाया। इसी दौरान शुभा ने अपना सोशल सर्कल भी काफी बढ़ा लिया। अब वह हैदराबाद और बैंगलूर में एक जानी मानी हस्ती हैं। उन्होंने पैशनेट फाउंडेशन नाम की एक गैर-सरकारी समाज-सेवी के ' टीच फॉर चेंज' कार्यक्रम के साथ भी अपने को जोड़ लिया है। शुभा को उनकी सेवाओं के लिए वुमेन ऑफ दि इयर और बेस्ट वुमेन डर्मेटालॉजिस्ट का पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।

शुभा कहती हैं, "भारत में अब भी सौंदर्य को निखारने के मामले में कई सारे मिथ हैं। जब मुझे हैदराबाद में अपना निजी क्लिनिक खोलने का अवसर मिला तो मैंने पाया कि मैं इन मिथ्स को तोड़ने तथा लोगों को सही जानकारी देने के लिए बहुत कुछ कर सकती हूँ। हालाँकि मैंने अपना करियर मॉडलिंग के तौर पर शुरू किया था, लेकिन बाद में जाकर पता चला कि कैमरे के पीछे सबकुछ वैसा नहीं है, जैसा मैं चाहती हूँ। मैं ऐसा काम करना चाहती थी, जिसमें नयापन हो, जिससे लोगों के जीवन में बदलाव आये और आज मैं वही कर रही हूँ।

शुभा ने ग्लैमर की दुनिया छोड़ लोगों को ग्लैमरस बनाने के उद्देश्य की पूर्ति को अपनी मंज़िल बनाया और वह न केवल एक सफल उद्यमी के रूप में अपने आपको स्थापित कर किया है, बल्कि पत्नी और माँ के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। उनका लक्ष्य है कि वे त्वचा और केश के उपचार में भारत में उन्नत और प्रभावी तकनीकों से लोगों को लाभान्वित करें।

शुभा का कहना है कि भारतीय समाज से उन्हें बहुत कुछ दिया है। उन्हें भारत में भी सम्मान मिला, प्यार मिला । भारत में भी उन्होंने खूब धन-दौलत कमाई और कमा भी रहीं हैं। वे कहती हैं, "मैं अब समाज को बहुत कुछ देना चाहती हूँ। अब मेरे लिए देने का समय भी है। मैं 'टीच फॉर चेंज' से जुड़ कर बहुत खुश हूँ। मैं और भी कई तरह से समाज की सेवा करना चाहती हूँ।" 'टीच फॉर चेंज' कार्यक्रम के ज़रिये कुछ युवा समाज-सेवी सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को उन्नत बनाने की कोशिश में हैं। इसी कार्यक्रम के तहत स्वयंसेवियों की मदद ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की हर मुमकिन मदद की जा रही है। कार्यक्रम का मकसद यही है कि कोई भी विद्यार्थी संसाधनों के अभाव में उन्नत स्तरीय शिक्षा से दूर न रहे। शुभा इसी कार्यक्रम/आन्दोलन के बैंगलोर चैप्टर की ब्रांड एम्बेसडर हैं।

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