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पुरुषों के वर्चस्व वाले गेमिंग क्षेत्र में अनिला ने गाड़े कामयाबी के झंडे

गेमिंग की उस्ताद बनीं अनिलाभारत की गेमिंग इंडस्ट्री को विश्वस्तर का बनाया है अनिला ने

9th Apr 2015
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पढ़ोंगे लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे तो होओगे खराब। भारत में प्रचलित यह पुरानी कहावत बताती है कि हमारे देश में बेशक कई तरह के खेल व बड़े-बड़े खिलाड़ी हुए लेकिन पढ़ाई की तुलना में खेलों को हमेशा नीची निगाह से देखा गया। फिर भी इस कहावत को खिलाडिय़ों ने बार-बार गलत साबित किया। लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। भारत में जिस रफ्तार से खेलों का विकास हो रहा है वह काबिलेतारीफ है। आज क्रिकेट, टेनिस, बैडमिंटन, शूटिंग, शतरंज, गोल्फ जैसे खेलों में भारत के खिलाड़ी विश्व पटल पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं और यह देश के विकास के लिए भी काफी शुभ संकेत हैं। समय के साथ-साथ आज खेलों की परिधि में भी बहुत विस्तार हो गया है। आज खेल केवल मैदान तक सीमित नहीं बल्कि आपके मोबाइल फोन तक भी दस्तक दे चुके हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आज मोबाइल और कंप्यूटर गेमिंग में भी युवाओं के लिए रोजगार के कई मौके हैं।

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अनिला एंड्रेड भी उन युवाओं में से एक हैं जिन्होंने मोबाइल गेमिंग कंपनी 99गेम्स के बूते न सिर्फ भारत में बल्कि विश्व की गेमिंग इंडस्ट्री में अपना खासा स्थान बना लिया है।

अनिला को बचपन से ही खेलने का शौक था जब भी उन्हें समय मिलता वह अपने कंप्यूटर में गेम खेलने लगती। मोबाइल गेम्स के साथ सबसे अच्छी चीज यह है कि इन गेम्स को किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति खेल सकता है। हर किसी आयु वर्ग के इंसान के लिए यहां गेम्स मौजूद हैं।

मस्कट में जन्मी अनीला की मां एक अध्यापिका हैं और उनके पिता अकाउंटेेंट। जब अनिला छोटी थीं तभी अपनी मां और भाई-बहनों के साथ मैंगलोर आ गयी जबकी उनके पिता वहीं मस्कट में नौकरी करते रहे। अनीला ने अपनी स्कूली शिक्षा मैंगलोर में ही की इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की और फिर इकफाई यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। मां की शिक्षा का अनिला के व्यक्तित्व पर खासा प्रभाव रहा। उनकी मां हमेशा उन्हें समझाया करती थीं कि जिंदगी में आत्मनिर्भर बनना बहुत जरूरी है। इसलिए जब भी कोई मौका मिले, उसे कभी मत छोड़ो। अनीला की मां उन्हें स्कूल में स्पीच देने के लिए प्रोत्साहित करती और उनकी स्पीच खुद तैयार करके याद भी करवाती थीं। इस सब ने अनिला के व्यक्तित्व को और निखारा, जिससे उनके अंदर आत्मविश्वास पैदा हुआ। इसी आत्मविश्वास ने अनिला को एक ऑलराउंडर बना दिया। वह पढ़ाई में तो तेज थीं ही साथ ही वह बाकी सभी चीजों जैसे डिबेट, संगीत व खेल में भी काफी अच्छी थीं।

अनिला ने अपने कैरियर की शुरूआत रोबोसॉफ्ट नाम की कंपनी से की जहां वे क्वालिटी कंट्रोल इंजीनियर थीं।

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अनिला को रोबोसॉफ्ट में नौकरी मिलना भी किसी संयोग से कम नहीं था। दरअसल जब रोबोसॉफ्ट कंपनी टेस्ट के लिए उनके कॉलेज आई तो अनिला को इसके बारे में जानकारी नहीं थी लेकिन काफी दिक्कतों के बाद उन्हें टेस्ट में बैठने दिया गया और वह उस टेस्ट में पास हो गईं। रोबोसॉफ्ट में अनिला को काफी सीखने को मिला और कम समय में ही उनका नाम कंपनी के श्रेष्ठ कर्मचारियों में होने लगा। कंपनी ने अपने नए प्रोजेक्ट 99गेम्स के लिए कुछ लोगों का चयन किया जिसमें अनिला को भी स्थान मिला। वर्डसवर्थ पहला गेम था जिस पर अनिला ने काम किया। यह अक्षरों का गेम था और इसको उन्होंने आईफोन के लिए डिजाइन किया। वर्डसवर्थ को काफी सफलता मिली। यह वर्ड श्रेणी में दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल बन गया। उसके बाद अनिला जोकि अब तक डिजाइनर के रूप में काम कर रही थी अब प्रोड्यूसर बन गई।

गेमिंग इंडस्ट्री विदेशों में तो काफी तरक्की कर चुकी है लेकिन भारत में अभी इसने शुरूआत ही की है। भारत में गेमिंग कंपनियां कम हैं और गेम्स की मांग तेजी से बढ़ रही है इसलिए इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। यह एक ऐसी जगह है जहां रचनात्मकता के साथ-साथ आपको तकनीकी ज्ञान होना भी उतना ही जरूरी है। संक्षेप में कहा जाए तो यह इंडस्ट्री बाकी इंडस्ट्री से काफी अलग है। नई होने के साथ-साथ यहां एक स्पेशल टेलेंट की जरूरत होती है। आपको इस बात को समझना होता है कि अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों को क्या पसंद आएगा, साथ ही आपको विश्व भर की गेमिंग इंडस्ट्री पर भी नजर रखनी होती है। इस क्षेत्र में महिलाएं काफी कम हैं अगर ज्यादा महिलाएं इस तरफ रुख करेंगी तो यकीनन इस इंडस्ट्री को फायदा ही होगा।

गेमिंग इंडस्ट्री में एक प्रोड्यूसर का रोल काफी अहम होता है आपको डिजाइनिंग की तो जानकारी होनी ही चाहिए साथ ही आपको सब लोगों से समन्वय बनाकर भी चलना होता है। आपको मार्केटिंग का भी ज्ञान होना आवश्यक है। आज भारत में कुछ प्रोफेशनल कॉलेज और इंस्टीट्यूट गेमिंग की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

उडूपी स्थित 99गेम्स की एक बेहतरीन टीम को लीड करने वाली अनिला महिलाओं के लिए आज मिसाल हैं। गेमिंग इंडस्ट्री में कम ही महिलाएं हैं। आज सफलता के शीर्ष पर पहुंची अनिला को देश-विदेश के विभिन्न मंचों पर बुलाया जाता है आज लगभग 20 मिलियन लोग अनिला और उनकी टीम द्वारा बनाए गए गेम्स से जुड़े हैं। 99 गेम्स के मोबाइल गेम्स ऐप्प्ल, एन्ड्रोइड व विंडो तीनों जगहों पर मौजूद हैं। इनमें से कुछ गेम्स पेड हैं तो कुछ फ्री भी हैं।

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अनिला मानती हैं कि हर नया फैसला जो भी आप लेते हैं वो एक चुनौती ही होता है और हमें इस चुनौती को अवसर में बदल देना चाहिए। एक महिला के लिए एक ऐसे उद्योग में काम करना जहां ज्यादातर पुरूष होते हैं बहुत मुश्किल तो होता है लेकिन आसान भी होता है। बस आपको समन्वय बनाना आना चाहिए। अनिला की टीम में अधिकांश पुरूष ही हैं लेकिन अनीला को कभी भी किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। एक महिला टीम लीडर के नाते अनिला को सबको सुनना होता है तथा उनकी समस्याओं को सुलझाना होता है क्योंकि माना जाता है कि महिलाएं ज्यादा संवेदनशील होती हैं इसलिए कई बार महिलाओं से ज्यादा उम्मीद भी लगाई जाती है। ऐसे में यदि आप एक बार सबका विश्वास जीत लेते हैं तो काम करना आसान हो जाता है।

अनिला को घूमना, लोगों से मिलना और पढऩा काफी पसन्द है। इससे उन्हें नए-नए आइडियाज भी मिलते हैं और नई ऊर्जा भी मिलती है। अनिला अपनी कामयाबी का श्रेय अपने परिवार को देती हैं जो हमेशा उनके साथ खड़ा रहा और आगे बढऩे की प्रेरणा देता रहा।

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