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मिलिए दीपिका पादुकोण को डिप्रेशन से निकालने वाली महिला एना चांडी से

11th Oct 2017
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उन्होंने बॉलिवुड ऐक्ट्रेस दीपिका पादुकोण को भी डिप्रेशन से बाहर निकाला। दीपिक के मामले में उन्हें पता था कि वे ठीक नहीं हैं। लेकिन वजह क्या था ये नहीं पता था। दीपिका ने एना को फोन किया और फोन पर ही अपना हाल बताकर रोने लगीं। 

दीपिका पादुकोण के साथ एना (दीपिका के ठीक बाएं)

दीपिका पादुकोण के साथ एना (दीपिका के ठीक बाएं)


 वह न्यूरो लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग और आर्ट थेरेपी में भी सर्टिफाइड हैं। मूलत: चेन्नई की रहने वाली एना ने बेंगलुरु में काफी समय बिताया है। 

हर आम भारतीय परिवार की तरह एना को भी घर से फ्यूचर सिक्योर करने के बारे में कहा गया। लेकिन वह अपने सपने पूरे करने चाहती थीं। 

बेंगलुरु हरे-भरे इंदिरानगर इलाके में ही दीपिका पादुकोण द्वारा स्थापित 'द लिव लव लाफ फाउंडेशन' का ऑफिस है। इस फांउंडेशन को चलाने वाली एना चांडी ने कभी दीपिका को डिप्रेशन से बाहर निकाला था। जैसे ही मैं ऑफिस के भीतर गई, दीवारों पर सजी तस्वीरें इस फाउंडेशन की पिछले दो साल की सफल यात्रा का वर्णन कर रही थीं। ऑफिस के अंदर जगह-जगह पर रखे पौधे और नीले कुशन वाली कुर्सियां शायद मेरा स्वागत कर रही थीं। अंदर घुसते ही मुझे सकारात्मक महसूस होने लगा। इस संगठन ने न जाने कितने लोगों को डिप्रेशन से बाहर निकाल कर उनकी जिंदगी बचाई होगी।

लिव लाफ फाउंडेशन की डायरेक्टर एना चांडी का व्यक्तित्व काफी आकर्षक है। वह भारत की पहली सुपरवाइजिंग और ट्रेनिंग ट्रांजैक्शनल ऐनालिस्ट हैं जिन्हें काउंसलिंग के क्षेत्र में विशेषता के साथ इंटरनेशनल ट्रांजैक्शनल ऐनालिस्ट एसोसिएशन से मान्यता मिली है। वह न्यूरो लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग और आर्ट थेरेपी में भी सर्टिफाइड हैं। मूलत: चेन्नई की रहने वाली एना ने बेंगलुरु में काफी समय बिताया है। उनके पास लगभग 30 साल का कार्य अनुभव है। वह कई तरह के डिप्रेशन के शिकार लोगों की देखभाल करती हैं।

एक परंपरागत दक्षिण भारतीय परिवार में पैदा हुईं एना ने बेंगलुरु के बिशप कॉटन स्कूल से अपनी स्कूलिंग की और उसके बाद माउंट कारमेल कॉलेज से आगे की पढ़ाई की। इसके बाद घरवालों ने उनकी शादी कर दी। उनके देवर को सीजोफ्रेनिया नाम की बीमारी थी। वह बताती हैं, 'परिवार में किसी को भी इस बीमारी के बारे में पता नहीं था। परिवार वालों को साइकोथेरेपिस्ट ने सिखा दिया था कि उसकी देखभाल कैसे करनी है। एक आम भारतीय परिवार में पालन-पोषण होने की वजह से एना ने उसकी अच्छी देखभाल की। ताकि उसकी जिंदगी को और आसान बनाया जा सके।'

एना ने इसके बाद 'विश्वास' नाम की एक गैरसरकारी संस्था के साथ एक फ्रीलांसर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। उस वक्त उनकी उम्र 30 साल की थी। आज उस कंपनी के तीन विभागहैं, विश्वास, विवेक और स्नेह और यह कंपनी असमर्थता और विकास के क्षेत्र में काम करती है। एना के अच्छे काम की वजह से उस कंपनी में उन्हें काफी तवज्जो दी गई और उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई। इसके बाद उन्होंने अमेरिका से ट्रांजैक्शनल ऐनालिसिस के बारे में जानकारी ली। तीन साल के बाद वह एक ट्रांजैक्शनल काउंसलर बन गईं। इस तरह से डिप्रेशन और मानसिक बीमारी को देखने वाली वह पहली भारतीय महिला थीं।

भारतीय समाज में मानसिक बीमारियों से मिथ को तोड़ने के लिए उन्होंने काउंसलर बनने का साहसिक फैसला लिया था। वह कहती हैं, 'काउंसलिंग से जुड़ी एक अच्छी बात यह है कि आप अपने बारे में बहुत कुछ सीख जाते हैं।' हर आम भारतीय परिवार की तरह एना को भी घर से फ्यूचर सिक्योर करने के बारे में कहा गया। लेकिन वह अपने सपने पूरे करने चाहती थीं। लेकिन मुश्किल ये थी कि उस वक्त भारत में काउंसलिंग को करियर के तौर पर चुनने का कोई मतलब नहीं था। लेकिन धीरे-धीरे लोगों में जागरूरकता आई और उन्होंने ऐसी स्थिति में पहुंचने पर लोगों का मार्गदर्शन लेना शुरू कर दिया।

वह कहती हैं, 'मेरा काम निराश लोगों को आशा प्रदान करना था। आज जब मैं जब पीछे मुड़कर पीछे के सफर को देखती हूं तो मुझे उन परेशानियों का अहसास होता है जो मैंने झेला। लेकिन आज भी मैं अपने पैशन को लेकर काफी जुनूनी रहती हूं। मुझे लगता है कि सशक्तिकरण, खुशी और आजादी जैसी चीजें हमारे अंदर से ही आती हैं इसका दूसरे लोगों से कोई लेना-देना नहीं है।' एना की दो बेटियां हैं और वह अपनी जिंदगी में काफी खुश हैं।

उन्होंने बॉलिवुड ऐक्ट्रेस दीपिका पादुकोण को भी डिप्रेशन से बाहर निकाला। दीपिक के मामले में उन्हें पता था कि वे ठीक नहीं हैं। लेकिन वजह क्या था ये नहीं पता था। दीपिका ने एना को फोन किया और फोन पर ही अपना हाल बताकर रोने लगीं। एना ने दीपिका की आवाज से ही उनकी समस्या को पहचानने की कोशिश की और अगले ही दिन वह मुंबई में दीपिका के पास थीं। उन्होंने दीपिका के साथ पूरा दिन बिताया और उसके बाद उन्हें एक डॉक्टर के पास ले गईं। पहले तो दीपिका ने मना किया, लेकिन बाद में वे राजी हो गईं। लिव लव लाफ दीपिका की फिलोस्फी है। वह सोसाइटी के लिए कुछ करना चाहती थीं इसलिए इस फाउंडेशन की स्थापना हुई। यह एक ट्रस्ट है जहां मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम होता है।

यह भी पढ़ें: दिव्यांग लड़कियों को पीरियड्स के बारे में जागरूक करते हैं गांधी फेलोशिप के विनय

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