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कर्मचारी चयन का आसान तरीका, 'ग्रोनआउट'

- सुमित और हरसिमरन ने की ग्रोनआउट की शुरुआत।- एक आसान सी प्रकिया से चुन सकते हैं अच्छे कर्मचारी।

24th Jun 2015
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किसी भी कंपनी को शीर्ष पर पहुंचाने में जहां अच्छी तकनीक व अच्छे उत्पाद की जरूरत होती है वहीं अनुभवी व भरोसेमंद कर्मचारियों का होना भी बहुत जरूरी है। कर्मचारियों की अच्छी टीम ही किसी कंपनी का भविष्य तय करती है और कंपनी भी हर संभव प्रयास करती हैं कि उनकी कंपनी में अच्छे कर्मचारियों की ही नियुक्ति हो। इसके लिए कंपनियां अखबारों में विज्ञापन देती हैं। विभिन्न जॉब पोटल से संपर्क करती हैं। लेकिन यह चीज़ें अब थोड़ी पुरानी होती जा रही हैं। चूंकि इसमें लागत काफी ज्यादा आती है साथ ही समय भी बहुत लगता है। ऐसे में आजकल रेफ्रेंल हाइरिंग काफी जोर पकड़ रही है। जिसमें कंपनी अपने यहां कार्य कर रहे कर्मचारियों को ही अच्छे विशेषज्ञ खोजने की जिम्मेदारी दे देती है। अच्छे कर्मचारी खोजने का यह सबसे सस्ता और आसान तरीका भी है। इसलिए काफी कंपनियां इसे अपना रही हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में भी एक कमी है और वह यह कि अक्सर कर्मचारी अपने काम में लगे रहते हैं और घर जाकर वे अपनी घर की जिम्मेदारियों में व्यस्त हो जाते हैं। यानी काफी बिजी होने के कारण वे इस काम को तुरंत नहीं कर पाते। कंपनियों की इसी समस्याओं को सुलझाने के लिए कार्य कर रहे हैं सुमित गुप्ता और हरसिमरन वालिया।

सुमित गुप्ता और हरसिमरन अपनी स्टार्टअप फर्म 'ग्रोन आउट' के जरिए कंपनियों को अच्छे कर्मचारी दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। काफी हद तक वे इस काम में सफल भी रहे हैं। दिल्ली स्थित इस स्टार्टअप के अभी तक 12 बिजनेस टू बिजनेस एक्टिव यूजर हैं। बहुत कम समय में इन्हें यह बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है।

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सुमित राजस्थान के एक छोटे से शहर में पैदा हुए और दिल्ली से उन्होंने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की और इंजीनियरिंग भी की। वहीं हरसिमरन चंडीगढ़ से हैं उन्होंने आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया है। उसके बाद उन्होंने कई नामी कंपनियों में भी काम किया। इस स्टार्टअप को शुरु करने के लिए हरसिमरन ने अपनी जॉब छोड़ी और सुमित के साथ ग्रोन आउट की शुरुआत की।

नौकरी छोड़ कर एक नई स्टार्टअप खोलना आसान काम नहीं था। चूंकि पहले जहां दोनों के पास एक फिक्स सैलेरी आ रही थी अब वह आनी बंद हो गई थी।

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सुमित और हरसिमरन शुरुआत से ही कुछ अलग काम करना चाहते थे। दोनों ने तय किया कि वे एक रिसर्च करते हैं कि वे क्या काम बेहतर तरीके से कर सकते हैं। दोनों को एमप्लॉई हाइरिंग प्रोसेस में बहुत संभावनाएं लगी। जनवरी 2013 में सुमित और हरसिमरन ने ग्रोनआउट पर काम करना शुरु किया। शुरुआत इन्होंने चंडीगढ़ से की लेकिन जल्दी ही यह लोग दिल्ली शिफ्ट हो गए। नवंबर 2013 में इन्होंने अपने प्रोडक्ट का बीटा वर्जन लॉच किया और उसके बाद इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। नैसकॉम ने दस हजार स्टार्टअप में इन्हें शुरुआती टॉप रैंक में सिलेक्ट किया है। दो लोगों से शुरु हुई इस टीम में अब सात सदस्य हैं। और इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सुमित बताते हैं कि बाजार में हमें कई कंपनियों से प्रतिस्पर्धा मिल रही है। हमें भरोसा है कि हम अपने बेहतर काम की वजह से सबको पीछे छोड़ देंगे।

ग्रोन आउट में यह लोग कंपनियों को वन स्टॉप सल्यूशन देते हैं। वन स्टॉप सल्यूशन अर्थात जहां कंपनियों की नियुक्ति संबंधी सभी समस्याओं का हल हो सके। इसके लिए कंपनियों को कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

यह लोग कर्मचारियों के विभिन्न सोशल नेटवर्कों के जरिए नए कर्मचारियों का चयन करते हैं। कंपनियों को इनकी साइट पर जाकर अपनी जरूरतें बतानी होती हैं। उसके बाद आपकी जरूरत के मुताबिक कई प्रोफाइल आपके पास आ जाते हैं। यह कर्मचारी चयन का बहुत ही आसान तरीका है जिसमें कुछ भी मुश्किल नहीं है। बस आप अपने कर्मचारियों के नेटवर्क के जरिए ही अच्छे कर्मचारियों को चुन सकते हैं।

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