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प्लंबिंग और बिजली के कामों जैसे दैनिक घरेलू परेशानियों से घर बैठे निबटना है तो ‘गापून’ है ना

3rd Nov 2015
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भारत में आॅन-डिमांड की अवधारणा तेजी से अपने पांव पसारती जा रही है और समय के साथ हाइपरलोकल स्तर पर छोटी-बड़ी विभिन्न सेवाओं को उपलब्ध करवाने वाले बेशुमार स्टार्टअप्स सामने आते जा रहे हैं। किराने के सामान से लेकर सहायक सेवाओं और यहां तक कि सेलून जैसी सुविधाएं तक आज की बेहद व्यस्त दिनचर्या वाले मेट्रो शहरों में आसानी से उपलब्ध हैं।

आज जब बाजार में कई खिलाड़ी सक्रिय हें ऐसे में गापून (Gapoon) का मानना है कि बड़े पैमाने पर फैली गड़बड़ी और समस्याओं से पार पाने के लिये एक उचित समाधान की अभी भी कमी है। विविधताओं युक्त सेवाओं, एट्रीब्यूट मैपिंग, वेबसाइट और एप्प पर पहले से ही अंकित मूल्यों और पूर्णतः स्वचालित नेतृत्व प्रबंधन प्रणाली के साथ गापून का मानना है कि वे इस अव्यवस्थित बाजार में मौजूद समस्त बाधाओं को दूर करने में सफल रहे हैं और उपभोक्ताओं और विक्रेताओं के लिये प्रारंभ से अंत तक पूरा समर्थन प्रदान करने में सफल रहे हैं।

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एक विचार का जन्म

गापून बाजार की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखकर सेवा की गुणवत्ता और समय की पाबंदी पर खरा उतरने के लिये तत्पर है। गापून के संस्थापक और सीईओ अपूर्व मिश्रा का कहना है कि कुंठा और निराशा इस विचार के जन्म पीछे की मुख्य वजह रही हैं। बीते वर्ष अगस्त के महीने में नई नौकरी के चलते उन्हें बैंगलोर शिफ्ट होना पड़ा और वे अपने नए घर पर प्लंबिंग और बिजली से संबंधित बुनियादी कामों को करवाने के लिये विश्वसनीय तरीका तलाशने में बेहाल हो गए।

उसी समय उन्होंने अपने साथ कमरा साझा करने वाले अंकित बिंदल और एक मित्र अंकिता असई के साथ मिलकर इस अव्यवस्थित बाजार की समस्या को सुलझाते हुए लोगों को इन बुनियादी कामों से निबटने के आसान और विश्वसनीय तरीके उपलब्ध करवाने की ठानी। अपूर्व कहते हैं, ‘‘हमनें बाजार के गहन अनुसंधान के साथ ऐसी उपभोक्ताआ सेवा डोमेन की डायनेमिक्स को समझने और फिर उनके हिसाब से सर्वश्रेष्ठ समाधान उपलब्ध करवाने के विचार को अमली जामा पहनाने में तीन महीनों से भी अधिक का समय लगाया।’’

अनुसंधान और यादगार लम्हा

अपने अनुसंधान के दौरान इस टीम को अहसास हुआ कि बाजार में संरचना की कमी से सिर्फ उपभोक्ता ही त्रस्त नहीं हैं बल्कि विक्रेता भी ऐसी ही निराशा के दौर से गुजर रहे हैं। इन क्षेत्रों से जुड़े अधिकतर सेवा प्रदाता आॅनलाइन उपस्थिति से कोसों दूर थे। और जो लोग आॅनलाइन थे भी वे ‘क्वालिटी लीड’ से बहुत दूर थे।

यहां क्वालिटी लीड से इनका तात्पर्य उस कार्य से है जिसकी पुष्टि उपयोगकर्ता ने की हो, जो किसी भी प्रकार की बाधाओं से बचने के लिये सिर्फ एक ही सेवा प्रदाता को अग्रसरित हुआ हो और सेवा प्रदाता की आवश्यकताओं और विशेज्ञताओं से मेल खाता हो। ऐसे अधिकतर विक्रेता उन कामों के बदले बहुत अधिक खर्च कर रहे थे जो वे करने में सक्षम नहीं हैं।

केंद्रीय टीम की संरचना

गापून की स्थापना से पहले अपूर्व फ्रेक्टल और ईएक्सएल के साथ बीमा, खुदरा और दूरसंचार के क्षेत्रों में व्यपार सलाहकार के रूप में 18 महीनों तक काम कर चुके थे। सहसंस्थापक और सीएमओ अंकिता उत्तर-पूर्वी भारत में श्लमबर्जर के साथ एक आॅइल-फील्ड इंजीनियर के रूप में काम कर चुकी हैं।

इनके अलावा सहसंस्थापक और सीटीओ प्रोडिंटल के साथ एक वरिष्ठ साॅफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम कर चुके हैं। तकनीक के जानकार होने के चलते वे कंपनी की वेबसाइट, एप्लीकेशन विकास और बैक-एंड सपोर्ट को संभालते हैं। ये तीनों ही आईआईटी खड़गपुर के स्नातक होने के अलावा अच्छे मित्र भी रहे हैं। सीओओ निखिल गुप्ता वर्ष 2013 में आईआईटी दिल्ली से स्नातक करने के बाद फ्रेक्टल एनालिटिक्स में एक व्यापार सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। फिलहाल वे गापून के संचालन का काम संभालते हैं।

गापून उन सभी उपयोगकर्ताओं के लिये एक मंच है जो आसानी से आॅनलाइन पेशेवर सेवा प्रदाताओं को तलाशना चाहते हैं। इसके अलावा ये सेवा प्रदाताओं को क्वालिटी लीड्स भी देते हैं जो उनके व्यापार को बढ़ाने में काफी मददगार साबित होता है और उनके समय और पैसे दोनों की बचत करता है।

यह क्या करता है?

गापून प्लम्बिंग, बिजली के काम, बढ़ईगीरी, पुताई, पेस्ट कंट्रोल के अलावा सभी प्रकार से घरेलू उपकरणों और यहां तक कि लैपटाॅप इत्यादि जैसे घरेलू रखरखाव के काम को करने वालों के एक पूरे डोमेन को कवर करता है। बिल्कुल खुले और उचित मूल्यों, पूर्णतः स्वचालित लीड डिस्पैच और फाॅलो-अप सिस्टम के साथ गापून बाजार में फैली अव्यवस्था को एक समाधान प्रदान करने का काम करता है। अपूर्व कहते हैं, ‘‘हमें इस बात का विश्वास है कि एक उत्पाद के रूप में इन सेवाओं का मानकीकरण करके ही हम एक व्यवहार्य समाधान पेश करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा सकते हैं।’’

उपभोक्ता और निवेश

फरवरी 2015 में अस्तित्व में आने के बाद से अबतक 3,500 से भी अधिक उपभोक्ता गापून की सेवाओं का लाभ उठा चुके हैं। इनका दावा है कि विजि़टर्स, पूछताछ और सफलतापूर्वक निबटाये गए आर्डरों के आधार पर मूल्यांकन करें तो ये प्रतिमाह 100 फीसदी की दर से वृद्धि कर रहे हैं। वर्तमान में ये बैंगलोर में प्रदान की गई सेवाओं के बदले प्रतिदिन 150 के करीब आर्डर पा रहे हैं।

अब से कुछ महीने पहले गापून ने बैंगलोर और मुंबई के कुछ निवेशकों के समूह से प्रारंभिक निवेश पाने मे सफलता हासिल की है। इनका इरादा आने वाले कुछ महीनों में प्रतिदिन 1000 आर्डरों के आंकड़े तक पहुंचने के अलावा आने वाली तिमाही में भारत के अन्य शहरों में भी विस्तार करने का है।

ऐसा माना जाता है कि वर्ष 2013 में करीब 117 आॅन-डिमांड कंपनियों ने निवेश पाने में सफलता पाई है। बीते एक वर्ष में आॅन-डिमांड सेवाएं भारत में खासी लोकप्रिय हुई हैं और सौंदर्य के क्षेत्र में व्योमो, स्टेग्लैड, गेटलुक, बुलबुल और वैनिटीक्यूब सहित कई अन्य स्टार्टअप बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने में सफल रहे हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस वर्ष सामने आने वाले लगभग सभी स्टार्टअप निवेश पाने में भी सफल रहे हैं। यूवीकैन द्वारा समर्थन प्राप्त व्योमो कुछ दिन पूर्व ही लगभग 2 मिलियन अमरीकी डाॅलर का निवेश पाने में सफल रहा है और वहीं दूसरी तरफ वैनिटीक्यूब ने भी कुछ अनाम निवेशकों से 3.5 लाख अमरीकी डाॅलर का निवेश पाया है।

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