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देश के गौरव: अभिनव बिंद्रा को मिला शूटिंग का सर्वोच्च सम्मान

posted on 1st December 2018
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ओलंपिक में भारत को निशानेबाजी में स्वर्ण पदक दिलाने वाले अभिनव बिंद्रा को अंतरराष्ट्रीय शूटिंग फेडरेशन ने ब्लू क्रॉस अवॉर्ड से नवाजा है। यह सम्मान हासिल करने वाले वह पहले भारतीय हैं।

अभिनव बिंद्रा

अभिनव बिंद्रा


36 वर्षीय बिंद्रा ओलंपिक की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के एकमात्र खिलाड़ी और 10 मीटर एयर रायफल स्पर्धा में भारत के प्रमुख निशानेबाज हैं।

ओलंपिक में भारत को निशानेबाजी में स्वर्ण पदक दिलाने वाले अभिनव बिंद्रा को अंतरराष्ट्रीय शूटिंग फेडरेशन ने ब्लू क्रॉस अवॉर्ड से नवाजा है। यह सम्मान हासिल करने वाले वह पहले भारतीय हैं। बीते शुक्रवार को अभिनव को यह सम्मान प्रदान किया गया। यह पुरस्कार निशानेबाजी में सर्वोत्तम प्रदर्शन करने के लिए दिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय शूटिंग फेडरेशन निशानेबाजों की सर्वोच्च संस्था है। अभिनव बिंद्रा ने 15 साल की उम्र से ही निशानेबाजी करना प्रारंभ किया था।

36 वर्षीय बिंद्रा ओलंपिक की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के एकमात्र खिलाड़ी और 10 मीटर एयर रायफल स्पर्धा में भारत के प्रमुख निशानेबाज हैं। उन्होंने ने 2008 में बीजिंग में हुए ओलिंपिक गेम्स की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था। हालांकि बिंद्रा के नाम कई सारे पुरस्कार पहले से ही हैं। उन्हें 2000 में अर्जुन अवॉर्ड और उसी के अगले साल 2001 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।

ओलंपिक पदक जीतकर लौटने पर 2009 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान से नवाजा गया था। 2016 में रियो में संपन्न हुए ओलंपिक खेलों में बिंद्रा से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वह कोई भी पदक हासिल करने में नाकाम रहे। इसी के साथ ही उन्होंने अपने शूटिंग करियर से रिटायरमेंट ले लिया था। म्यूनिख में ब्लू क्रॉस सम्मान प्राप्त करने के बाद बिंद्रा ने कहा कि वह इस सम्मान को पाने के बाद गदगद हैं।

उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, 'ISSF के शीर्ष अवॉर्ड को पाकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। एथलीट्ल और ISSF के लिए काम करना काफी अच्छा रहा।' बिंद्रा ने ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतने के अलावा एक वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड मेडल (2006) और 7 कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडल जीते हैं। इसके अलावा उनके नाम 3 एशियन गेम्स मेडल भी हैं।

यह भी पढ़ें: किसी फ़िल्म से कम नहीं इस पिता के संघर्ष और बेटे की सफलता की कहानी

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