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सबसे सस्ती वॉशिंग मशीन

इंजीनियर पीयूष अग्रवाल ने 1500 रूपये में बनाई पोर्टेबल वॉशिंग मशीन

14th Feb 2015
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इस कहानी की शुरुआत करें उससे पहले एक सवाल का जवाब दें कि अगर आप मार्केट में वॉशिंग मशीन खरीदने जाते हैं तो उसकी क्या कीमत आपको चुकानी होगी। हमारे हिसाब से कम से कम 10 से 15 हज़ार रूपये। लेकिन अगर हम कहें कि सिर्फ 1500 रूपये में आप वॉशिंग मशीन पा सकते हैं तो आप क्या हम क्या कोई भी चौंक जाएगा। मगर अपनी काबिलियत से इंजीनियर पीयूष अग्रवाल ने इसे सच करके दिखाया है..पीयूष ने महज़ 1500 रूपये में बना दी है एक पोर्टेब वॉशिंग मशीन..और इस वॉशिंग मशीन को नाम दिया है ‘वीनस’ ...

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‘वीनस’ को CROWDFUNDING के मंच INDIGO ने पेश किया है। इस मशीन को इस्तेमाल करना बडा आसान है। एक दस साल का बच्चा भी इसे चला सकता है।

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विदेश से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद पीयूष ने भारत में Vimbas नाव्रचना नाम से अपनी कंपनी की शुरुआत की है। 'वीनस' इस कंपनी का सबसे प्रमुख उत्पाद है। साल 2002 तक पीयूष ने भारत में पुरुष शौचालय में लगे फ्लश सेंसर की मार्केटिंग की लेकिन कुछ खास फायदा नही होने के वजह से ये काम बंद कर दिया इसके बाद पीयूष अग्रवाल ने गुड़गांव की एक कंपनी में बिज़नेस कंसलटेंसी के साथ काम किया और बाकी का अपना सारा समय अपनी कंपनी Vimbas नाव्रचना समर्पित कर दिया। जिसका परिणाम आज सबके सामने है।

कैसे काम करती है ‘वीनस’ वॉशिंग मशीन ?

आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह मशीन काम कैसे करती है। तो सबसे पहले आप ये जान लीजिए यह मशीन आम महंगी वॉशिंग मशीनों की तरह चलती तो बिजली से ही है लेकिन बिजली खपत ना के बराबर होती है। पीयूष अग्रवाल ने बताया है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले बाल्टी में मशीन के माउंड भाग को डालें। फिर पानी और डिटर्जेंट डालकर मशीन चालू करें इसके बाद इसमें 2-4 कपड़े डालकर 5 मिनट तक मशीन चलाए फिर कपड़ों को निकालकर साफ पानी से धोएं।पीयूष का कहना है कि यह मशीन खासकर ग्रामीण महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। आज से चालीस साल पहले बुल्गारिया में इसी तरह की मशीन का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन वो मशीन काफी भारी होती थी जो एक साथ कई कपड़ों को धोया करती थी। उसी से प्रेरणा लेते हुए पीयूष अग्रवाल ने यह हल्की और छोटी मशीन इजात की है। जो एक बाल्टी में आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है।

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‘वीनस’ बनाने के पीछे की कहानी

पीयूष अग्रवाल के मुताबिक आठ साल पहले उनकी मां की ब्रेन की सर्जरी हुई थी जिसके बाद उन्हें पैरालिसिस हो गया था। वो हमेशा बिस्तर पर रहती थीं। इस दौरान पीयूष के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी उनकी मां के बिस्तर की चादर और कपड़ों को धोना। वॉशिंग मशीन में कपड़े धोना स्वच्छता के लिहाज से ठीक नही था,और बाथरूम में कपड़े धोने का मतलब यह है कि हर बार बाथरूम को अच्छी तरह साफ करना,जो कभी कभी काफी मुश्किल होता था उसी दौरान पीयूष अग्रवाल के मन में एक ऐसी पोर्टेबल वॉशिंग मशीन बनाने का ख्याल आया जो आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सके,कपड़े भी साफ धोए, साथ ही टाइम और पैसे भी बचाए,उसकी का परिणाम है ‘वीनस’..


‘वीनस’ को बनाने में सिर्फ सात लोग शामिल हैं।पीयूष के अनुसार "हमारी कंपनी अभी नई है इसलिए ज्यादा निवेश नही हो पाया। लेकिन हमारे ग्रुप में जितने भी लोग हैं वो सब अपने अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं इसलिए ज्यादा दिक्कत नहीं हुई।सबकी मिलीजुली मेहनत का नतीजा है वीनस "

बनाने में क्या क्या दिक्कतें आईं?

इसे बनाना आसान नहीं था। कई चुनौतियां सामने आई लेकिन कहते है कि अगर आप अपने सपने को साकार करने का मन बना लें तो कुछ भी मुश्किल नहीं रहता।जो लोग अपनी असफलता का ज़िम्मेदार समय और संसाधनों की कमी को मानते हैं वैसे लोग पीयूष को बिलकुल पसंद नहीं,बल्कि आपके पास जितने भी संसाधना है उन्हीं से अपने काम को पूरा करें। यह भी जान लें कि चुनौतियां ज्यादा समय के लिए आप पर हावी नही हो सकती। अब सबसे बड़ी चुनौती लोगों को यह समझना है कि 'वीनस' बेहतरीन होने के साथ-साथ इसकी कीमत भी सही है। वाकय पीयूष की

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