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ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के लिए लॉन्च हुआ सेनेटरी पैड बैंक

महाराष्ट्र में वर्सोवा की एमएलए डॉ. भारती लावेकर ने एक नई पहल करते हुए अपनी एनजीओ टी फाउंडेशन के जरिये आदिवासी इलाके की औरतों एवं जरूरतमंद लड़कियों के लिए सेनेटरी पैड बैंक लॉन्च किया है।

29th Jun 2017
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भारतीय महिलाओं की मासिक धर्म से जुड़े निराशाजनक आंकड़े सामने आए हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के मुताबिक 57.6% महिलाओं ने मासिक धर्म के वक्त सेनेटरी पैड का उपयोग किया। ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाएं मासिक धर्म के दौरान कपड़े या कपड़े से बने पैड का इस्तेमाल करती हैं। इनमें से कुछ प्रतिशत महिलाएं ऐसी भी हैं जो मासिक धर्म के दौरान बिना किसी पैड के भी रहती हैं।

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इस अभियान के तहत ना सिर्फ महिलाओं को पैड दिया गया बल्कि एक नए सैनेटरी पैड को भी लॉन्च किया गया। डॉ भारती के इस नए फाउंडेशन के जरिए गांव के कोने-कोने तक सैनेटरी पैड को पहुंचाया जाएगा।

ट्राइबल क्षेत्र की महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन्स नि:शुल्क और बिना किसी प्रायर आइडेंटिटी चेकिंग के दिया जाएगा। इसके लिए नॉन ट्राइबल एरिया की महिलाओं को अपना रजिस्ट्रेशन ऑरेंज कार्ड दिखा कर कराना होगा, उसके बाद उन्हें महीने के 10 सेनेटरी नैपकिन्स दिए जाएंगे। महिलाएं अपना रजिस्ट्रेशन फेसबुक, वेबसाइट, फोन कॉल या ऑफिस में आ कर भी करा सकती हैं।

सभी जानते हैं कि महिलाओं की आधी जनसंख्या पीरियड्स के दौरान सैनेटरी पैड का इस्तेमाल नहीं करती हैं। आमतौर पर ऐसी कई महिलाएं हैं जो मासिक धर्म को लेकर जागरुक नहीं है। कई महिलाएं ऐसी हैं जो सेनेटरी पैड का इस्तेमाल नहीं करती हैं, जिसकी वजह से उन्हें कई तरह की बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है। कई ब्लड बैंक बने, मिल्क बैंक बने, लेकिन किसी का भी ध्यान महिलाओं की इस समस्या पर नहीं गया। महाराष्ट्र में वर्सोवा की एमएलए डॉ. भारती लावेकर ने एक नई पहल करते हुए अपनी एनजीओ टी फाउंडेशन के जरिये आदिवासी इलाके की औरतों एवं जरूरतमंद लड़कियों के लिए सेनेटरी पैड बैंक लॉन्च किया है। यह अपनी ही तरह का पहला सेनेटरी बैंक है, जिसके जरिये समाज में मेन्स्ट्रूअल हेल्थ और हाइजीन की अवेयरनेस को बढ़ाया जाएगा।

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भारतीय महिलाओं की मासिक धर्म से जुड़े निराशाजनक आंकड़े सामने आए हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के मुताबिक 57.6% महिलाओं ने मासिक धर्म के वक्त सेनेटरी पैड का उपयोग किया। ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाएं मासिक धर्म के दौरान कपड़े या कपड़े से बने पैड का इस्तेमाल करती हैं। इनमें से कुछ प्रतिशत महिलाएं ऐसी भी हैं जो मासिक धर्म के दौरान बिना किसी पैड के भी रहती हैं।

क्या है योजना

ट्राइबल क्षेत्र की महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन्स नि:शुल्क और बिना किसी प्रायर आइडेंटिटी चेकिंग के दिया जाएगा। इसके लिए नॉन ट्राइबल एरिया की महिलाओं को अपना रजिस्ट्रेशन ऑरेंज कार्ड दिखा कर कराना होगा, उसके बाद उन्हें महीने के 10 सेनेटरी नैपकिन्स दिए जाएंगे। महिलाएं अपना रजिस्ट्रेशन फेसबुक, वेबसाइट, फोन कॉल या ऑफिस में आ कर भी करा सकती हैं। इस कैंपेन के अंतर्गत स्कूल, कॉलेज और पब्लिक शौचालय में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन और डिस्पोजल मशीन भी लगाई जाएंगी। सेनेटरी पैड बैंक का भव्य लॉंचिंग फिल्म अभिनेत्री जीनत अमान एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस की पत्नी अमृता फड़नवीस के द्वारा किया गया। महाराष्ट्र में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी ने महिलाओं को जागरुक करने और उनकी सेहत को ध्यान में रखकर उनके लिए सैनेटरी पैड बैंक बना डाला।

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क्या है इस अभियान का उद्देश्य

इस अभियान के तहत ना सिर्फ महिलाओं को पैड दिया गया, बल्कि एक नए सैनेटरी पैड को भी लॉन्च किया गया। डॉ भारती के इस नए फाउंडेशन के जरिए गांव के कोने-कोने तक सैनेटरी पैड को पहुंचाया जाएगा। डॉ भारती का कहना है कि 'जब तक महिलाएं जागरुक नहीं होंगी अपनी सेहत का ख्याल नहीं रखेंगी तो आने वाली जनरेशन को जागरुक करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल सरकार 10 महीनों के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड फ्री में मुहैया करवा रही है लेकिन इसमें साल भर की दो महीने की छुट्टी शामिल नहीं है लेकिन ग्रामीण स्कूल हमारे साथ जुड़ते हैं तो हम उन्हें दो महीने तक यह पैड फ्री प्रदान करेंगे जो सरका की योजना में शामिल नहीं है। टी फाउंडेशन के माध्यम से डोनर्स और जरूरतमंदों के बीच गैप को कम करने के उद्देश्य से डिजिटल सैनीटरी पैड बैंक की शुरुआत की गई है। इसके लिए बीते एक साल से तैयारी की जा रही थी। डोनर्स या तो पैसे या फिर सैनिटरी पैड दान कर सकते हैं। 10 पैड के एक पैकेट की कीमत सात रुपए रुपये है। हम लोगों की जरूरत अनुरूप उन तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।'

एक आंकड़े के अनुसार आज भी 50 प्रतिशत से ज्यादा लड़कियां मासिक धर्म के कारण स्कूल नहीं जाती हैं। महिलाओं को आज भी इस मुद्दे पर बात करने में झिझक होती है जबकि आधे से ज्यादा को तो ये लगता है कि मासिक धर्म कोई अपराध है। बस गांव की लड़कियों की इस सोच को बदलने का ये अच्छा मौका है। 

इस पैड बैंक को उम्मीद है, कि यह उनकी मांग के मुताबिक हर महिला और लड़की के लिए उपलब्ध होगा है। इस डिजिटल ऑनलाईन बैंक का कहना है कि वह हर तरह की लड़कियों और महिलाओं को उनकी इच्छा के अनुसार सैनिटरी पैड उपल्ब्ध करवाएगा। महिलाए को ज्यादा जानकारी नहीं होती जिसके चलते वे मासिक धर्म के दौरान खराब चीजों का उपयोग करती हैं, जो सर्वाइकल कैंसर का एक प्रमुख कारण है। इसलिए महिलाओं और लड़कियों को उनकी आवश्यक्ता के अनुसार सैनिटरी पैड उपलब्ध करवाने के लिए इस तरह की पहल की जरुरत है।

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