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कैंपस प्लेसमेंट के लिए छात्रों को तैयार करने में जुटा 'फेस '

-वेंकट और राजेश ने रखी 'फेस ' इंस्टीट्यूट की नीव ।- छात्रों को नौकरी दिलाने के लिए प्रशिक्षित कर रहा है 'फेस ' ।- अब तक साढ़े 5 लाख से ज्यादा छात्रों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

Ashutosh khantwal
19th Aug 2015
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जोश, जज्बा औऱ जुनून ये तीन ऐसे सकारात्मक शब्द हैं जो किसी भी व्यक्ति को किसी भी मुकाम तक पहुंचा सकते हैं। एक प्रसिद्ध कहावत है कि विजेता कुछ नया काम नहीं करते, वे बस काम को नए तरीके से करते हैं और जब वही नया तरीका सबके सामने आता है तो वह नीव रखता है नई शुरूआत कि जिससे कई नए आइडियाज जनरेट होते हैं और कुछ नयी चीजे लोगों को मिलती हैं। राजेश और वेंकट की कहानी भी कुछ ऐसी ही है जिन्होंने लोगों को ट्रेनिंग दी और नौकरी पाने में उनकी मदद की जहां बाकी कोचिंग व ट्रेनिंग सेंटर छात्रों को परीक्षा में उत्तीर्ण होने की ट्रेनिंग देते थे वहीं राजेश और वेंकट ने अपनी इंस्टीट्यूट के जरिए भारत के प्रतिष्ठित कॉलेजों और इंस्टीट्यूट में पढ़ रहे छात्रों को ट्रेनिंग दी ताकि वे नौकरी प्राप्त कर सके और उनकी ये कोशिश इतनी सफल हुई कि आज उनका सेंटर फोकस अकेडमी फॉर करियर इनहैंसमेंट इस क्षेत्र में काम में लगे बाकी संस्थानों में से सबसे बड़ा औऱ सबसे अग्रणी बन चुका है।

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आईआईएम से 2007 में पढ़ाई करने के बाद राजेश और वेंकट ने सिटीबैंक और डेलॉइट जैसी बड़ी कंपनी में काम किया। वे दोनों हमेशा से ही कुछ अपना काम करना चाहते थे कुछ ऐसा कार्य जो लोगों से और शिक्षा से जुड़ा हो । दोनों इसी उधेड़बुन में लगे रहते कि आखिर वो क्या हो । एक बार वे दोनों कहीं जा रहे थे तभी वे सड़क हादसे का शिकार हो गए दोनों को अस्पताल में एडमिट किया गया जब दोनों आस पास के बेड पर पड़े हुए थे तो उन्होंने वहां भी इस संदर्भ में बात की और तब दोनों को एक इंस्टीट्यूट खोलने का विचार आया जो उन्होंने पूरा भी किया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने नौकरी भी छोड़ दी और अपने प्रोजेक्ट पर काम करने लगे फिर उन्होंने एक स्टार्टअप फर्म खोली जिसका नाम रखा 'फोकस अकेडमी फॉर करियर इनहैंसमेंट' (फेस) उनके इंस्टीट्यूट ने छात्रों को एमबीए की परीक्षा कैट और मैट के लिए कोचिंग देना शुरू किया लेकिन उन्हें उस क्षेत्र में पहले से ही काम कर रहे नामी गिनामी इंस्टीट्यूट जैसे टाइम और आईएमएस से टक्कर मिली लेकिन बहुत जल्द ही फेस ने भी नाम कमाना शुरू किया।

काम मुश्किल था लेकिन दोनों डटे रहे। कुछ समय बाद उसी इलाके के एक कॉलेज ने उनसे संपर्क किया और कहा कि वे दोनों उनके कॉलेज में पढ़ रहे बच्चों को ट्रेन करें ताकि वे नौकरी पा सकें कॉलेज में सेशन के अंत में विभिन्न कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए आती थी। राजेश और वेंकट ने इसे तुरंत स्वीकार कर लिया और अपना कार्य प्रारंभ किया जिसमें उन्हें अभूतपूर्व सफलता मिली और उनके द्वारा ट्रेनिंग प्राप्त छात्रों को आसानी से नौकरियां मिलने लगी। ये एक नयी तरह की शुरूआत थी। इससे पहले कोचिंग इंस्टीट्यूट्स कॉलेजों में एन्ट्री के लिए तो कोचिंग दे रहे थे लेकिन कोई भी इंस्टीट्यूट छात्रों को नौकरी पाने के लिए ट्रेन नहीं कर रहा था। यह एक बहुत बड़ा बाजार था जिसे फेस ने कैप्चर किया।

कॉलेजों ने भी फेस के कार्यक्रम को अपने पाठ्यक्रम का एक हिस्सा बनाया इससे उनके कॉलेजों के ज्यादा से ज्यादा छात्रों को नौकरियां मिलने लगीं और उनके कॉलजों का नाम होने लगा। धीरे-धीरे फेस ने पूरे दक्षिण भारत में अपने काम के बल पर पहचान बनानी शुरू की। दिसंबर 2008 में शुरू हुआ ' फेस ' का यह सफर काफी तेजी से आगे बढ़ा। इतने कम समय में ही 'फेस' साढ़े 5 लाख से ज्यादा छात्रों को ट्रेन कर चुका है ये लोग 400 से ज्यादा शैक्षिक संस्थानों के लिए काम कर चुके हैं जिनमें आईआईटी भी शामिल है। उनके द्वारा ट्रेन किए गए छात्रों को भारत की सबसे नामी गिनामी कंपनियों ने अपने यहा चयनित भी किया है। कोयंबटूर से शुरू हुआ ये सफर आज दूर दराज तक पहुंच चुका है। फेस के पास 150 से ज्यादा ट्रेनर हैं जिंन्हें खुद राजेश और वैंकट ने ट्रेन किया है।

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वैकंट बताते हैं कि कई कॉलेज और इंस्टीट्यूट पैसे बचाने के लिए अपेक्षाकृत कम प्रोफेशनल टीचर्स को रखते हैं ये टीचर्स वे होते हैं जिंन्हें कहीं नौकरी नहीं मिलती जिसके कारण उन इंस्टीट्यूट्स का पढ़ाई का स्तर गिर जाता है और जब नौकरियां देने के लिए कंपनिया आती हैं तो वे छात्रों को नहीं चुनती तब उन इंस्टीट्यूट्स को पता चलता है कि उन्होंने गलत किया और तब उन्हें उनके छात्रों के लिए ट्रेनर्स की जरूरत पढ़ती है। इसके अलावा कई बेहतरीन इंस्टीट्यूट्स कैंपस प्लेसमेंट का रिकॉर्ड 100 प्रतिशत रखने के लिए भी उन्हें बुलाते हैं।

फेस साउथ के चार राज्यों में अपनी अच्छी खासी पहचान बना चुका है और आने वाले वर्षों में वह भारत के बाकी राज्यों में भी अपनी दमदार उपस्थिती दर्ज करवाना चाहता है। उपने कार्यक्रम को और बेहतर बनाने के लिए फेस तकनीक पर भी बल दे रहा है और खुद को अपग्रेड करते रहने का प्रयास कर रहा है।

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